भारत का कृषि क्षेत्र बहुत देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है. भारत का कृषि व्यापार आमतौर पर फायदे में रहता है, यानी यह बाहर भेजता है उससे ज्यादा लाता है. लेकिन हाल में यह फायदा कम हो गया है. अप्रैल-दिसंबर 2023 से 2024 तक बाहर भेजा माल 6.5% बढ़ा, पर लाया हुआ माल 18.7% बढ़ गया. इस वजह से फायदा 10.6 बिलियन डॉलर से घटकर 8.2 बिलियन डॉलर हो गया. ऐसा क्यों हुआ? कीमतों में बदलाव, सरकार के नियम, और दुनिया में हुई चीजें जैसे महामारी और युद्ध इसके पीछे हैं.
भारत के खेती व्यापार का मौजूदा रुझान क्या है?
भारत के कृषि सेक्टर को व्यापार के नजरिए से देखें तो वो अभी फायदे में हैं. इसका मतलब है कि भारत जो खेती का सामान बाहर भेजता है, वो उससे ज्यादा है जो वो बाहर से लाता है. लेकिन यह अंतर अब कम हो रहा है. अप्रैल से दिसंबर 2023 और अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच भारत का खेती निर्यात 6.5% बढ़ा. लेकिन इसी समय में आयात बहुत ज्यादा, यानी 18.7% बढ़ गया. इसकी वजह से अंतर $10.6 बिलियन से घटकर $8.2 बिलियन रह गया. यह दिखाता है कि भारत का खेती व्यापार अब पहले जितना मजबूत नहीं रहा. निर्यात बढ़ रहा है, लेकिन आयात उससे भी तेजी से बढ़ रहा है. इससे अधिशेष कम हो रहा है और यह चिंता की बात है.
पिछले दस सालों में भारत के खेती अधिशेष में उतार-चढ़ाव के कारण क्या हैं?
पिछले दस सालों में भारत के खेती अधिशेष में कई बार बदलाव आया. इसके कई कारण हैं. सबसे पहले, 2013-14 से 2019-20 तक दुनिया में खेती के सामानों की कीमतें कम हो गईं. इससे भारत का सामान बाहर बेचना मुश्किल हो गया, क्योंकि दूसरे देशों का सामान सस्ता था. फिर कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से दुनिया की सप्लाई चेन खराब हो गई. इससे कीमतें फिर बढ़ीं और भारत का निर्यात बढ़ गया. लेकिन जब ये कीमतें कम हुईं, तो भारत का निर्यात भी घट गया और अधिशेष छोटा हो गया. इसके अलावा, भारत सरकार ने कुछ सामानों जैसे चीनी और गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई. ऐसा इसलिए किया गया ताकि देश में खाना कम न हो और महंगाई न बढ़े. इन सब कारणों से अधिशेष में उतार-चढ़ाव आया.
भारत के मुख्य खेती निर्यात कौन से हैं और हाल में उनका प्रदर्शन कैसा है?
भारत का सबसे बड़ा खेती निर्यात समुद्री उत्पाद हैं, जैसे मछली और झींगा. लेकिन हाल में इनकी कीमत कम हुई है. दूसरी तरफ, चावल (बासमती और गैर-बासमती) का निर्यात बहुत अच्छा चल रहा है. बासमती चावल, मसाले, कॉफी और तंबाकू का निर्यात नए रिकॉर्ड बना सकता है. ये सामान बाहर बहुत पसंद किए जाते हैं. लेकिन चीनी का निर्यात बहुत कम हो गया है.इसका कारण सरकार की रोक है, ताकि देश में चीनी की कमी न हो. तो कुछ सामानों का निर्यात बढ़ रहा है, पर कुछ का घट रहा है.
भारत के खेती निर्यात कहां जाते हैं और क्या जोखिम हैं?
भारत का खेती सामान सबसे ज्यादा अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ में जाता है. अमेरिका भारत के समुद्री उत्पादों का बड़ा खरीदार है. लेकिन इन बड़े बाजारों में जोखिम भी हैं. अगर अमेरिका में नए टैरिफ (कर) लगे, जैसे कि राष्ट्रपति ट्रंप लगा सकते हैं, तो भारत का निर्यात कम हो सकता है. ऐसे कर से सामान महंगा हो जाएगा और खरीदार कम हो सकते हैं. इसलिए इन देशों पर निर्भरता भारत के लिए खतरा बन सकती है.
भारत के मुख्य खेती आयात क्या हैं और वे क्यों जरूरी हैं?
भारत सबसे ज्यादा खाने का तेल और दालें बाहर से लाता है. पहले दालों का उत्पादन बढ़ने से आयात कम हुआ था. लेकिन 2023-24 में फसल खराब होने से दालों का आयात फिर बढ़ गया. खाने के तेल का आयात भी बढ़ रहा है, क्योंकि दुनिया में इसकी कीमतें बहुत ज्यादा हैं. ये दोनों चीजें भारत के लिए जरूरी हैं, क्योंकि देश में इनकी मांग बहुत है और उत्पादन कम पड़ता है. इसलिए आयात बढ़ना जरूरी हो गया है.
भारत का कपास निर्यात में क्या बदलाव आया और क्यों?
पहले भारत कपास का बड़ा निर्यातक था. Bt क्रांति की वजह से कपास का उत्पादन बहुत बढ़ा था. लेकिन अब कपास का निर्यात बहुत कम हो गया और आयात बढ़ गया है. इससे भारत कपास का शुद्ध निर्यातक से शुद्ध आयातक बन गया. इसका कारण है कि भारत का उत्पादन अब पहले जितना अच्छा नहीं रहा और बाहर से सस्ता कपास मिल रहा है. यह भारत की प्रतिस्पर्धा और उत्पादन के लिए चिंता की बात है.
भारत का मसाला व्यापार कैसे चलता है?
भारत मसालों का बड़ा निर्यातक है. खासकर मिर्च और नए बीज मसाले बाहर बहुत बिकते हैं. लेकिन भारत काली मिर्च और इलायची जैसे मसाले बाहर से भी लाता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि देश में इनकी मांग ज्यादा है और उत्पादन कम है. तो भारत कुछ मसाले बेचता है और कुछ खरीदता है.
दुनिया की घटनाएं भारत की खेती को कैसे प्रभावित करती हैं?
दुनिया की घटनाएं भारत की खेती पर बहुत असर डालती हैं. कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध से सप्लाई चेन खराब हुई और खाने की कीमतें बढ़ीं. इससे भारत का निर्यात बढ़ा. दूसरी तरफ, ब्राजील में सूखे और वियतनाम में तूफान की वजह से वहां कॉफी और तंबाकू की कमी हुई.इससे भारत का कॉफी और तंबाकू निर्यात बढ़ गया. ये उदाहरण दिखाते हैं कि भारत की खेती दुनिया की सप्लाई चेन से जुड़ी है. जब दुनिया में कुछ बदलता है, तो भारत पर भी असर पड़ता है.
भारत का खेती व्यापार अभी अधिशेष में है, लेकिन यह कम हो रहा है. निर्यात बढ़ रहा है, पर आयात उससे तेजी से बढ़ रहा है. पिछले दस सालों में कीमतों में बदलाव, वैश्विक घटनाएं और सरकार की नीतियों ने अधिशेष को प्रभावित किया. समुद्री उत्पाद, चावल, मसाले और कॉफी भारत के बड़े निर्यात हैं, पर चीनी और कपास का निर्यात घटा है. अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में जोखिम हैं.भारत को तेल और दालों का आयात करना पड़ता है, क्योंकि देश में कमी है. मसालों का व्यापार मिश्रित है और वैश्विक घटनाएं भारत की खेती को बदलती रहती हैं. यह सब दिखाता है कि भारत की खेती दुनिया से जुड़ी है और उसमें लगातार बदलाव हो रहा है.







