प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि घटना टेंशन में डालने वाली है, लेकिन इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है. राज्य सरकार ने भी न्यायिक जांच आयोग बनाया है. यहां सुनवाई की ज़रूरत नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इस याचिका में महाकुंभ में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश और नियम लागू करने का अनुरोध किया गया था.
प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अवसर पर अमृत स्नान से पहले संगम नोज पर भगदड़ मचने से 30 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
CJI और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने खारिज की अपील
सुप्रीम कोर्ट में वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच कर रही थी. PIL में भगदड़ की घटनाओं को रोकने और अनुच्छेद 21 के तहत समानता एवं जीवन के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का अनुरोध किया गया था. याचिका में केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया था.
याचिका में केंद्र-राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग
इसमें केंद्र और राज्य सरकारों को सामूहिक रूप से काम करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था ताकि महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सके. याचिका में ये भी कहा गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दायर की गई है जिसमें महाकुंभ में भगदड़ की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकारों को दिशानिर्देश देने का अनुरोध किया गया.
यूपी सरकार को निर्देश दे कोर्ट, PIL में की गई थी मांग
याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार को भगदड़ की घटना पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दे.







