बिहार कृषि विश्वविद्यालय अब किसानों के 25 उत्पादों को जीआई दिलाने की तैयारी में है. इसके लिए प्रस्ताव को चेन्नई भेजा गया है. जीआई मिलने से सभी उत्पादों को विश्वस्तरीय पहचान मिलेगी. इसमें मगही ठेकुआ, तितुआ मसूर, मोकामा मसूर, चना सत्तू, बौना मंसूरी, सीता सिंदूर, तिलोड़ी, अदौरी, माल भोग राइस, सोना चूर राइस, कनक जीरा राइस, मंसूरी धान समेत कई उत्पादों को जीआई टैग मिलेगा. इसको मिलने से सभी उत्पादों को काफी फायदा मिलेगा.
अब तक पांच उत्पादों को मिल चुका है जीआई टैग
आपको बता दें कि बीएयू किसानों के प्रति हर हमेशा सजग रहती है. ऐसे में बीएयू किसानों को 5 उत्पादों का जीआई दिला चुकी है. इसमें जर्दालु आम, कतरनी चावल, मगही पान, शाही लीची व मखाना शामिल है. ये सभी उत्पाद अभी विश्व लेवल पर है. आपको बता दें कि इन सभी चीजो की ब्रांडिंग पर भी जोर दिया जा रहा है. ताकि बिहार का उत्पाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक में सप्लाइ हो सके. डॉ डी आर सिंह ने बताया कि जीआई मिलने से वहां पर एकाधिकार प्राप्त होता है. वहीं बड़े बाज़ार में व्यवसाय का रास्ता भी साफ होगा. इससे किसानों को इन उत्पादों के अधिक दाम भी मिल पाएंगे.
बिहार कृषि विश्वविद्यालय उत्पाद का करता है खोज
आपको बता दें कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय पूरे बिहार में ऐसे उत्पादों की खोज करता है जिसको जीआई मिल पाए. जीआई मिलने से किसानों को होने वाले फायदे के भी बारे में बताएगा. जीआई मिलने के कई फायदे हैं. पहले तो उस उत्पाद उस क्षेत्र की स्पेशलिटी बन जाती है. वहीं किसानों को उस उत्पाद का दाम भी अधिक मिल पायेगा. इससे किसानों को ब्रांडिंग करने में आसानी होती है. अभी जर्दालु आम की बात करें तो विदेशों में अपने स्वाद का डंका बजा रहा है. मखाना की बात करें तो जीआई मिलने के बाद किसानों को कई गुना अधिक मुनाफा हो रहा है. आसानी से किसान अपना उत्पाद विदेश भी भेज पा रहे हैं.






