भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला हफ्ते के पहले सेशन में भी जारी है. सोमवार को निफ्टी, सेंसेक्स और निफ्टी बैंक करीब 1% की गिरावट के साथ खुले. शुरुआती कामकाज के दौरान कई दिग्गज स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है. सेक्टोरल फ्रंट पर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कामकाज कर रहे हैं. सबसे ज्यादा दबाव रियल्टी, मेटल, इंफ्रा और ऑयल & गैस स्टॉक्स में देखने को मिल रहा है.
सेंसेक्स में 1100 अंक की गिरावट है। ये 76,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 400 अंक की गिरावट है, ये 23,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
NSE सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी रियल्टी में 5.49% की गिरावट है। इसके अलावा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 3.60%, मीडिया में 3.21%, मेटल में 2.52% और निफ्टी ऑटो में 1.99% की गिरावट देखने को मिल रही है।
वहीं, BSE के इंडाइसेज में स्मॉल कैप में सबसे ज्यादा 2,445.36 अंक या 4.64% की गिरावट है। ये 50,276.98 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। मीड कैप भी 1,930.24 अंक या 4.36% नीचे 42,310.65 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
बाजार में गिरावट के 3 कारण
- पिछले शुक्रवार को जारी यूएस जॉब डेटा से ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल है। दिसंबर में अमेरिकी बेरोजगारी दर गिरकर 4.1% हो गई, जबकि जॉब ग्रोथ मजबूत रही। ऐसे में आशंका है कि फेडरल रिजर्व दर में कटौती को रोक सकता है। इससे भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
- फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। दिसंबर में उन्होंने 16,982 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं जनवरी में एफपीआई अभी तक 21,350 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेच चुके हैं। 10 जनवरी को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 2,254 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
- भारतीय रुपए में गिरावट से बाजार पर दबाव है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह अब तक के सबसे निचले स्तर 86.27 रुपए पर पहुंच गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत रोजगार आंकड़ों से उत्साहित डॉलर के मजबूत होने से घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ा।
ग्लोबल मार्केट में गिरावट
- एशियाई बाजार में जापान का निक्केई आज बंद है। कोरिया का कोस्पी आज 1.04% की गिरावट के साथ बंद हुआ। चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स भी 0.25% की गिरावट के साथ बंद हुआ।
- 10 जनवरी को अमेरिका का डाओ जोंस 1.63% गिरकर 41,938 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स 1.54% गिरावट के बाद 5,827 जबकि नैस्डैक इंडेक्स 1.63% गिरकर 19,161 के स्तर पर बंद हुए।
- NSE के डेटा के अनुसार, 10 जनवरी को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 2,254.68 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस दौरान घरेलू निवेशकों (DIIs) ने 3,961.92 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
स्टैंडर्ड ग्लास लाइनिंग का शेयर 22.8% ऊपर लिस्ट हुआ
स्टैंडर्ड ग्लास लाइनिंग टेक्नोलॉजी का शेयर आज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर अपने इश्यू प्राइस से 2.8% ऊपर 172 रुपए पर लिस्ट हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर इश्यू प्राइस से 25.71% ऊपर 176 रुपए पर लिस्ट हुआ। स्टैंडर्ड ग्लास लाइनिंग का इश्यू प्राइस 140 रुपए था।
क्या बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह:-
1. अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों में मजबूत ग्रोथ के बाद 10-साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी दिखी और यह 14 महीने के ऊपरी स्तरों पर पहुंच गया है. इससे अब दरों में कटौती की गुंजाईश कम हो गई है. ऐसे में भारत समेत दूसरे उभरते बाजार निवेश के लिहाज से कम आकर्षक हो गए हैं.
2. बॉन्ड यील्ड : 10-साल का अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी 4.73% पर पहुंच चुका है, जोकि अप्रैल के बाद शिखर पर है. रोजगार के आंकड़ों में मजबूती और सर्विस सेक्टर के मजबूती परफॉर्मेंस की वजह से बॉन्ड यील्ड में तेजी दिख रही है. इसके अलावा FOMC की जनवरी बैठक में दरों के स्थिर रखे जाने के अनुमान से भी बॉन्ड यील्ड में मजबूती दिखी है.
3. कच्चे तेल में भी तेजी : क्रूड ऑयल अब 3 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच चुका है. अमेरिका की ओर से रूस के क्रूड सप्लाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कच्चे तेल में उछाल देखने को मिला. ब्रूड क्रूड ऑयल अब 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है. 27 अगस्त के बाद ये ऊपरी स्तर पर है. WTI क्रूड ऑयल 77.97 डॉलर प्रति बैरल पर है. क्रूड ऑयल से संबंधित कई स्टॉक्स में आज दबाव देखने को मिल रहा है.
4. रुपये में कमजोरी बढ़ी : डॉलर इंडेक्स 109.9 पर पहुंच गया है. इसके बाद सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 23 पैसे कमजोर होकर 86.27 के भाव पर खुला. करेंसी एक्सचेंज रेट और विदेशी आउटफ्लो की वजह से भी रुपये में कमजोरी नजर आ रही है. FIIs की बिकवाली के बाद डॉलर की डिमांड बढ़ी है और रुपये में कमजोरी दिखी है. लेकिन, रुपये में इस कमजोरी पर आगे और आउटफ्लो का असर देखने को मिल सकता है.
5. FIIs की बिकवाली : विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली की वजह से भी बाजार में दबाव दिख रहा है. 10 जनवरी तक उनकी ओर से बिकवाली का यह आंकड़ा ₹22,259 करोड़ के पार पहुंच चुका है.
6. अर्निंग्स डाउनग्रेड का असर: लगातार 4 साल तक 10% से ज्यादा ग्रोथ के बाद पिछली 2 तिमाहियों से कंपनियों के अर्निंग्स पर दबाव देखने को मिल रहा है. तीसरी तिमाही में कोई पॉजिटिव सरप्राइज के संकेत नहीं मिल रहे है . ब्रोकरेज फर्म्स ने कहा कि पूरा कारोबारी साल 2025 के दौरान अर्निंग्स 10% से कम ही रह सकती है.






