भूकंप ने चीन के तिब्बत क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई है. वहां इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई है. पूरे उत्तर भारत में मंगलवार सुबह 6:35 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. केवल भारत ही नहीं नेपाल, बांग्लादेश, चीन भी इसकी चपेट में आए. भूकंप की तीव्रता इतनी तेज थी कि सर्द रातों के बीच घर पर सो रहे लोग की नींद टूट गई. कुछ इलाकों में लोग डर से कांपते हुए नजर आए.
तिब्बत में मंगलवार को भूकंप के जोरदार झटके महसूस किये गये। इस भीषण भूकंप में 95 लोगों की मौत हो गई। जबकि 130 लोग घायल हुए हैं। चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (सीईएनसी) के अनुसार मंगलवार सुबह 9:05 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 6.8 मापी गयी।
चीन की सरकारी मीडिया मुताबिक तिब्बत के शिजांग शहर के डिंगरी काउंटी में 6.8 तीव्रता के भूकंप में 95 लोगों की मौत हुई है। 130 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में 28.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 87.45 डिग्री पूर्वी देशांतर में था।
भूकंप की स्थिति में भूलकर भी ना करें ये काम?
1. यदि आप ऊंची इमारतों में रहते हैं तो नीचे जाने के लिए भूलकर भी लिफ्ट ना लें. भूकंप रुकने तक घर में ही रहें. जल्दबाजी में भागने से कोई दुर्घटना हो सकती है.
2. भूकंप की स्थिति में भूलकर भी घर के दरवाजों, खिड़की के पास ना खड़े हों. खासकर शीशे की खिड़कियां, दरवाजों से तो दूर ही रहें. इनके टूटने का खतरा हमेशा रहता है.
3. जब भूकंप के झटके बंद हो जाएं तब बिना देरी किए घर की खिड़कियों, दरवाजों को ना खोलें. कई बार ये झटकों से क्रैक हो जाते हैं, जो पता नहीं चलता है.
4. भूकंप की स्थिति में फंसे लोग घर के किसी भी बिजली के सामान को ना चलाएं. स्विच बोर्ड को ऑन-ऑफ ना करते रहें.
NCS ने बताया कि पहले भूकंप के तुरंत बाद इस क्षेत्र में दो और भूकंप आए। लोकल अधिकारी लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं, इस वजह से हताहतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।



प्रभावित इलाके में लेवल-3 इमरजेंसी घोषित
रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप के बाद बड़ी संख्या में लोग मलबे में फंस गए हैं। इन्हें रेस्क्यू किया जा रहा है। चीन की CCTV न्यूज के अनुसार चीन की स्टेट काउंसिल ने भूकंप प्रभावित इलाके में टास्क फोर्स भेजी है और लेवल-3 इमरजेंसी घोषित कर दी है।
लेवल-3 की इमरजेंसी तब डिक्लियर की जाती है जब दुर्घटना इतनी बड़ी हो कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और स्टेट की सरकार उससे नहीं निपट सकती। ऐसे हालात में केंद्र सरकार अपनी तरफ से तत्काल मदद भेजती है।
400 किमी दूर तक महसूस हुआ असर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोकल अधिकारी भूकंप के नुकसान का आकलन करने के लिए इलाके के लोगों से संपर्क कर रहे हैं। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि 400 किमी दूर नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी इसका असर महसूस किया गया।
आज का भूकंप पिछले 5 साल में 200 किलोमीटर के दायरे में दर्ज किया गया सबसे शक्तिशाली भूकंप था। भूकंप का सेंटर उस जगह पर मौजूद है जहां भारत और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेट्स टकराती हैं। इन प्लेटों के टकराने से हिमालय के पर्वतों में ऊंची तरंग उठती हैं।
भूकंप क्यों आता है? हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है और इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
भूकंप के बाद तिब्बत में तेजी से जारी है राहत-बचाव का काम, लेवल-3 की इमरजेंसी घोषित
चीन की सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार तिब्बत में बड़ी संख्या में लोग भूकंप के बाद ही मलबे के बीच घर में फंस गए हैं. उन्हें बाहर निकालने का काम चल रहा है. उधर, चीन की सीसीटीवी न्यूज वेबसाइट का कहना है कि चीन की स्टेट काउंसिल ने तिब्बत क्षेत्र में एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स भेजी है और लेवल-3 इमरजेंसी घोषित कर दी है.
एक्सपर्ट का दावा- अरावली पर्वतमाला की दरार एक्टिव हुई, आते रहेंगे भूकंप भूगोल के जानकार डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार अरावली पर्वतमाला के पूर्व में एक भ्रंश रेखा (दरार) है। यह भ्रंश रेखा राजस्थान के पूर्वी तट से होते हुए धर्मशाला तक जाकर मिलती है। इसमें राजस्थान के जयपुर, अजमेर, भरतपुर इलाके शामिल हैं।
एक्सपर्ट का कहना है कि अरावली पहाड़ में जो दरारें हैं, उनमें हलचल शुरू हो चुकी है। अब ऐसे भूकंप के झटके जयपुर समेत इससे सटे हुए अन्य इलाकों में भी आते रहेंगे। जयपुर जोन-2 और पश्चिमी राजस्थान जोन-3 में आता है। इसमें सामान्य भूकंप के झटके आते हैं।
467 साल पहले चीन में आए भूकंप में 8.30 लाख लोगों की मौत हुई थी
सबसे जानलेवा भूकंप चीन में 1556 में आया था, जिसमें 8.30 लाख लोगों की मौत हुई थी। तीव्रता के लिहाज से अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप चिली में 22 मई 1960 को आया था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 9.5 थी। इसकी वजह से आई सुनामी से दक्षिणी चिली, हवाई द्वीप, जापान, फिलीपींस, पूर्वी न्यूजीलैंड, दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भयानक तबाही मची थी। इसमें 1655 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 3000 लोग घायल हुए थे।







