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H-1B वीजा को लेकर एक बार फिर नई बहस ..

UB India News by UB India News
January 1, 2025
in TAZA KHABR
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H-1B वीजा: अमेरिका में क्यों मचा है बवाल, केंद्र सरकार भी चिंतित
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अमेरिका जाने का सपना पाले बैठे भारतीयों के लिए H-1B वीजा हासिल करना भले ही मुश्किल काम हो सकता है, मगर यह खुद अमेरिकी कंपनियों के भी हित में नहीं है। दरअसल, अमेरिकी कंपनियों के लिए स्किल्ड प्रोफेशनल्स की ज्यादातर जरूरत भारतीय ही पूरी करते हैं। खुद सरकार भी यह नजर रख रही है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद अमेरिकी वीजा नीतियां, विशेष रूप से आईटी और तकनीक, प्रबंधन और अन्य योग्य पेशेवरों के लिए कैसे विकसित होती हैं।
इस बीच, स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क के H-1B वीजा में सुधार की जरूरत की बात कहने पर इसे लेकर एक बहस छिड़ गई है। जानते हैं कि क्या है H-1B वीजा जिसे यूएस सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (USCIS) जारी करता है? भारतीयों और अमेरिका के लिए यह कितना जरूरी है? क्या इसमें वाकई में सुधार की जरूरत है? जानते हैं सबकुछ।

H-1B वीजा क्या है और इसकी अहमियत कितनी है
H-1B वीजा एक गैर आप्रवासी वीजा है। यह हाई स्किल्ड विदेशी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में कुछ खास व्यवसायों में काम करने की इजाजत देता है। इन व्यवसायों के लिए कम से कम स्नातक की डिग्री की आवश्यकता होती है। तकनीकी, इंजीनियरिंग, गणित और चिकित्सा विज्ञान जैसे क्षेत्रों में इस वीजा के लिए सबसे ज्यादा आवेदन आते हैं।

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कब शुरू किया गया था H-1B वीजा प्रोग्राम
H-1B वीजा प्रोग्राम 1990 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद ऐसे नियोक्ताओं की मदद करना था, जिनकी जरूरतें अमेरिकी वर्कफोर्स से पूरी नहीं हो पाती हैं। इसके लिए उन्हें योग्य विदेशी व्यक्तियों को अस्थायी रूप से काम पर रखने की अनुमति दी गई। H-1B वीज़ा शुरुआत में 3 साल के लिए जारी होता है, जिसे अधिकतम 6 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद वीज़ा धारक को वापस लौटने से पहले कम से कम 12 महीने की अवधि के लिए अमेरिका छोड़ना पड़ता है या स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए आवेदन करना और प्राप्त करना पड़ता है।

अमेरिका में घूमने के लिए भी जाते हैं भारतीय
जो लोग अलग-अलग शहरों को घूमने का शौक रखते हैं उनके लिए अमेरिका ने H1-B Visa रखा है जिसकी मदद से अमेरिका में 3 साल तक रह सकते हैं और यहां पर घूम सकते हैं। जानकारी के अनुसार अमेरिका में सबसे ज्यादा भारतीयों की संख्या कैलिफोर्निया और दूसरी संख्या न्यूयॉर्क में रहती है फिर उसके बाद न्यू जर्सी, टेक्सास में भारतीयों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है। आंकड़े के अनुसार, अमेरिका में लगभग 35 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं।

विजिटर्स, स्टूडेंट्स जैसे जारी होते हैं 185 तरह के वीजा
अमेरिका करीब 185 तरह के वीजा जारी करता है। इनमें विजिटर्स वीजा,स्टूडेंट्स वीजा अहम है। F-1 वीजा पूर्णकालिक छात्रों के लिए है, जबकि M-1 वीजा व्यावसायिक छात्रों के लिए है। वर्किंग वीजा जैसे H-1B, H-2ए, H-2बी और L-1 वीजा। ये वीजा उन लोगों के लिए होते हैं जो सीमित समय के लिए अमेरिका में काम करना चाहते हैं।

इतने आवेदनों को दी गई मंजूरी, यहां जानिए
वित्तीय वर्ष 2023 में USCIS ने शुरुआती रोजगार के लिए 1,18,948 याचिकाओं और रेगुलर रोजगार के लिए 2,67,370 याचिकाओं को मंजूरी दी। उच्च शिक्षा संस्थानों या ऐसे संस्थानों से संबद्ध गैर-लाभकारी संस्थाओं, गैर-लाभकारी शोध संगठनों या सरकारी शोध संगठनों में रोजगार चाहने वाले लोग भी इस सीमा से छूट पाने के पात्र हैं।

H-1B कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी कौन हैं
भारत में जन्मे लोग H-1B कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अमेरिकी सरकार के डेटा से पता चलता है कि 2015 से हर साल स्वीकृत सभी H-1B याचिकाओं में से 70% से अधिक भारतीयों के खाते में हैं। चीन में जन्मे लोग दूसरे स्थान पर हैं, जो 2018 से 12-13% के आसपास हैं। यह भारतीयों का प्रभुत्व है जिसने मूलनिवासी MAGA रिपब्लिकन का ध्यान आकर्षित किया है, जिन्होंने मैक्सिकन और मध्य अमेरिकियों की काम पर रखने की वकालत की है। इस मामले में भारतीय लोग चीन से काफी आगे हैं।

12 लाख भारतीयों को ग्रीन कार्ड का इंतजार
अमेरिका में नौकरी कर रहे 12 लाख भारतीयों को ग्रीन कार्ड आवेदन किए हुए कई साल बीत गए, मगर अभी तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। उनका वेटिंग पीरियड बढ़ता ही जा रहा है। इन 12 लाख भारतीयों में उनके आश्रित भी शामिल हैं। इनमें ज्यादातर प्रोफेसर, रिसर्चर, मल्टीनेशनल कंपनियों में एग्जीक्यूटिव और मैनेजर, आईटी प्रोफेशनल्स वगैरह शामिल हैं। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है।

क्या है ग्रीन कार्ड, क्या यह H-1B के आगे की राह
अमेरिका में जिसके पास ग्रीन कार्ड होता है, उसे वहां स्थायी रूप से बसने या वहां रहकर काम करने की वैधता मिल जाती है। दरअसल, यूएस सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (USCIS) किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से रहने के लिए परमानेंट रेजिडेंट कार्ड जारी करता है, जिसे आमतौर पर ग्रीन कार्ड कहा जाता है। यह H-1B के आगे की राह है, क्योंकि इससे अमेरिका में नौकरी कर रहे लोगों को वहां स्थायी रूप से बसने की मंजूरी मिलती है।

किन्हें मिल सकता है अमेरिका का ग्रीन कार्ड
अमेरिकी नागरिकों और स्थायी निवासियों के पति या पत्नी, माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए पात्र हो सकते हैं। इसके लिए वो लोग भी पात्र हैं, जिनके अमेरिकी नागरिकता वाले पति या पत्नी नहीं हैं। अपने माता-पिता को अमेरिका में ग्रीन कार्ड धारक के रूप में रहने के लिए आपको अमेरिकी नागरिक होना चाहिए। साथ ही आपकी उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए।

क्या ग्रीन कार्ड मिलने में 200 साल लग जाएंगे
अगर अमेरिकी संसद इस मामले में जल्दी दखल नहीं देती है तो भारतीयों की संख्या दिनोंदिन और बढ़ती जाएगी। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस के एक अनुमान के अनुसार, 2030 तक अमेरिका में नौकरी कर रहे और ग्रीन कार्ड का इंतजार करने वाले भारतीयों की संख्या 21 लाख के पार हो जाएगी। इन सभी को ग्रीन कार्ड मिलने में करीब 200 साल लग जाएंगे।

हर देश के लिए 7 फीसदी ही कोटा, भारतीय भी टेंशन में
USCIS के अनुसार, करीब 12 लाख भारतीय ऐसे हैं, जो बरसों से अमेरिका का ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए कतार में हैं। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में हर देश के हिसाब से ग्रीन कार्ड की लिमिट तय है और सालाना कोटा भी काफी कम है। अमेरिकी कानून के अनुसार, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड जारी किए जाने की सालाना लिमिट 1,40,000 है। इसके अलावा, हर देश के लिए 7 फीसदी ही कोटा है। इसका खामियाजा भारत-चीन जैसे ज्यादा आबादी वाले देशों के हाई स्किल्ड युवाओं को भुगतना पड़ता है।

तो क्या यह भारतीयों के लिए टेंशन की बात है?
नहीं। भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए पहले की ही तरह मौके रहेंगे। ट्रंप के आने के बाद भी अमेरिकी नीतियों में खास बदलाव नहीं होने वाला है, क्योंकि अमेरिकी कंपनियों और अमेरिका में काम कर रही विदेशी कंपनियों को कुशल विदेशी कामगारों को हायर करने की जरूरत बनी रहेगी। अमेरिका में वर्कफोर्स काफी महंगा है और पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। ऐसे में भारतीयों जैसे विदेशी कामगारों की जरूरत हमेशा बनी रहेगी। वैसे भी भारतीय प्रोफेशनल्स आईटी सेक्टर, रिसर्च, हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में काफी आगे हैं। ऐसे में उनकी जरूरत हमेशा बनी रहेगी।

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