बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की बीपीएससी 70वीं संयुक्त परीक्षा को लेकर छिड़ा विवाद अब बड़ा पॉलिटिकल मुद्दा भी बनता जा रहा है. छात्रों के इस मुद्दे को अब तमाम राजनीतिक पार्टियां भी भुनाने में जुट गयी हैं. बीपीएससी परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव तक चुके हैं. तेजस्वी यादव, प्रशांत किशोर और पप्पू यादव युवाओं से जुड़े इस मुद्दे पर पूरी तरह से अपनी सियासी रोटी सेंकने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं. अब इस पूरे मामले में बीपीएससी अभ्यर्थियों समेत बिहार के लोगों को सीएम नीतीश कुमार के स्टैंड का इंतजार है. नीतीश कुमार इस मामले पर अब कौन सा फैसला लेंगे यह देखना अहम होगा.
बीपीएससी अभ्यर्थियों को सबसे पहले बिहार में युवाओं का रोजगार देने का दावा करने वाले पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का समर्थन मिला. फिर धीरे-धीरे इस छात्रों के इस आंदोलन के समर्थन में प्रशांत किशोर से लेकर पप्पू यादव भी कूद पड़े. इन तीनों नेताओं ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का जमकर विरोध किया और आगे भी आंदोलन करने की धमकी दी है. अब ऐसे में सवाल यह है कि छात्रों का यह मुद्दा सियासी कैसे बनता जा रहा है. दरअसल बिहार में अगले साल 2025 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव में रोजगार, नौकरी और युवाओं का मुद्दा काफी अहम होने वाला है. ऐसे में हर सियासी दल और नेता चाह रहे हैं कि युवाओं के बीच वह हीरो बन जाएं ताकि आगामी चुनाव में उन्हें छात्राओं का समर्थन मिल सके.
आखिर क्या है पूरा मामला?
बता दें, बीपीएससी 70वीं संयुक्त परीक्षा 13 दिसंबर को होनी थी. इसके ठीक कुछ दिन पहले ही तमाम अभ्यर्थी परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन का विरोध करने लगे. इसको लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि अभ्यर्थी सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करने लगे. उस समय कुछ अभ्यर्थियों ने जब रास्ता जाम कर दिया. तब पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा था. इस दौरान पुलिस को लाठी चार्ज भी करनी पड़ी. इधर इस संबंध में बिहार लोक सेवा आयोग ने इस पूरे मामले में सफाई दी. आयोग ने बताया कि नॉर्मलाइजेशन इस परीक्षा में लागू नही किया गया है. आयोग ने इस संबंध में अखबारों में विज्ञापन भी निकाले, जिसमें इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की हिदायत दी. उस दौरान भी तेजस्वी यादव ने खुलकर बीपीएससी अभ्यर्थियों के समर्थन का ऐलान किया था.
दरअसल बीपीएससी अभ्यर्थियों का मुद्दा बिहार में हाल के दिनों में एक बड़ा हॉट टॉपिक बन गया है. बीपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी की बात न सिर्फ बिहार बल्कि देश के दूसरे राज्यों में भी हो रही है. सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा काफी ट्रेंड कर रहा है. दरअसल बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग लाखों छात्रों से जुड़ी हुई है. ऐसे में हर सियासी पार्टी और नेता इस मुद्दे पर अपनी पकड़ बनाने में जुटे हुए हैं. बात सिर्फ सियासी दलों और नेताओं की ही नहीं है यहां तक जाने-माने शिक्षक और कोचिंग संचालकों ने भी छात्रों का खुलकर समर्थन किया है. परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर खान सर और गुरु रहमान जैसे नामी शिक्षक भी छात्रों के संग धरना देने लगे हैं.
वहीं इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि जब छात्रों का यह मुद्दा इतना बड़ा है तो इस पर सत्ता पक्ष का स्टैंड है. दरअसल बिहार के सीएम नीतीश कुमार फिलहाल रूटीन चेकअप के दिल्ली में मौजूद हैं. लेकिन, इस बीच सोमवार को बीपीएससी (BPSC) अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाल मीना से मिलने सचिवालय पहुंचा है. वहीं इसी दौरान बीपीएससी के चेयरमैन रवि मनु भाई परमार ने भी राजभवन में राज्यपाल से मिलकर उनको पूरे मामले की स्थिति से अवगत कराया है.
सीएम नीतीश कुमार के स्टैंड का इंतजार
हालांकि इन तमाम पहलुओं के बीच सभी को इस मुद्दे पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार के स्टैंड का भी बेसब्री से इंतजार है. यानि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली से लौटने के बाद क्या नए साल 2025 में बीपीएससी अभ्यर्थियों के इस परेशानी को दूर करने के लिए कुछ बड़ा ऐलान कर सकते हैं? दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में होने वाला है. ऐसे में सीएम नीतीश कुमार भी नहीं चाहेंगे कि बिहार का कोई भी वर्ग खासकर युवा उनकी सरकार से किसी बात को लेकर नाराज हो जाएं. ऐसे में ऐसी संभावना है कि विपक्षी नेताओं की तरफ से इस मुद्दे को लेकर लिए जाए माइलेज के बीच सीएम नीतीश कुमार छात्रों को कुछ बड़ी सौगात दें या विपक्ष के इस स्टैंड को उल्टा उनके ही खिलाफ इस्तेमाल कर दें. हालांकि इस बारे में फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी लेकिन मुख्य सचिव से बीपीएससी अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद कोई न कोई हल निकालने की कोशिश जरूर की जाएगी.
वहीं इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय कहते हैं कि बीपीएससी छात्रों का मुद्दा निश्चित तौर पर बड़ा मुद्दा है. इस मुद्दे को लेकर भले ही तेजस्वी यादव, प्रशांत किशोर या पप्पू यादव राजनीति रोटी सेंकने में लगे हुए हैं. लेकिन, नीतीश सरकार निश्चित रूप से इस मामले में छात्रों से जुड़े इस मुद्दे का बातचीत से कोई बेहतर हल निकालेगी. हालांकि परीक्षा रद्द करने की मांग को पूरा कहीं से भी संभव नहीं दिखता है. बापू सभागार पर रद्द की गयी परीक्षा फिर से ली जाएगी.







