पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शनिवार को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने से कुछ घंटे पहले उनके स्मारक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सियासी बयानबाजी में कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है और कहा कि कम से कम मनमोहन सिंह के नाम पर गंदी राजनीति का खेल ना खेलें। कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उसी स्थान पर मनमोहन सिंह का स्मारक बनाने की संभावना तलाशने के बारे में बात की थी, जहां उनका आज अंतिम संस्कार होगा।
कांग्रेस प्रमुख खरगे ने कहा, “यह राजनेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों के अंतिम संस्कार के स्थान पर उनके स्मारक बनाने की परंपरा को ध्यान में रखते हुए है।” इसे लेकर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, केंद्र सरकार ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि डॉक्टर मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए जगह आवंटित की जाएगी, साथ ही उन्होंने कहा कि इस बीच दाह संस्कार और अन्य औपचारिकताएं आगे बढ़ सकती हैं।
कांग्रेस ने लगाया आरोप, भाजपा ने दिया जवाब
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने भी भाजपा पर तुरंत हमला बोलते हुए कहा कि लोग यह समझने में असमर्थ हैं कि केंद्र स्मारक के लिए स्थान क्यों नहीं ढूंढ सका, उन्होंने इसे भारत के पहले सिख प्रधान मंत्री का अपमान बताया।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए जगह आवंटित करने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा, “यह बहुत दुखद है और इस विषय पर कोई राजनीति नहीं की जानी चाहिए… यह निंदनीय है कि देश की सेवा करने वाले प्रधानमंत्री को एक छोटी सी जगह आवंटित नहीं की जा रही है…”
कांग्रेस सांसद और पार्टी के पंजाब प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा, “हम मांग कर रहे हैं कि सरकार स्मारक के लिए जगह मुहैया कराए। अगर अटल बिहारी वाजपेयी को जगह दी जा सकती है, तो मनमोहन सिंह को क्यों नहीं? वह देश के एकमात्र सिख प्रधानमंत्री थे…जब स्मारक बनेगा, तो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी…”
कांग्रेस नेताओं के आरोप पर बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस को डॉक्टर सिंह की मौत पर गंदी राजनीति बंद करनी चाहिए। पार्टी के एक बयान में कहा गया है, “कांग्रेस को याद करना चाहिए कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी की मृत्यु के बाद उनके साथ कैसा व्यवहार किया था।”
स्मारक के लिए जगह आवंटित करने की मांग को लेकर अब कांग्रेस के कई नेताओं के बयान आने लगे हैं. कांग्रेस सांसद और पंजाब कांग्रेस के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का कहना है, “हम मांग करते हैं कि सरकार स्मारक के लिए जगह आवंटित करे. अगर अटल बिहारी वाजपेयी के स्मारक के लिए जगह दी जा सकती है तो मनमोहन सिंह के लिए क्यों नहीं. वह देश के एकमात्र सिख प्रधानमंत्री थे. एक स्मारक बनेगा तो आने वाली पीढ़ियों को इससे प्रेरणा मिलेगी.”
स्मारक स्थल को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे ने कहा है, “वो एक नेक इंसान थे. वो हमारे देश के महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री थे. वो हर किसी की बात सुनते थे और ग़रीबों की बात करते थे. उन्होंने देश में आधार कार्ड लागू किया था. हम उनके लिए संघर्ष करेंगे.”
इस मुद्दे पर कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है, “उन्होंने देश और यहां के लोगों के लिए काम किया. उन्होंने देश के हर वर्ग का ध्यान रखा. यह समय की मांग है. मुझे उम्मीद है कि सरकार को सही विचार आएगा और कांग्रेस पार्टी के आग्रह को पूरा करेगी.”
हालांकि इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस नेता रहे प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी पर सवाल खड़े किए हैं. शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, “जब बाबा का निधन हुआ था, कांग्रेस पार्टी ने शोक जताने के लिए वर्किंग कमेटी की बैठक तक नहीं बुलाई थी. एक वरिष्ठ नेता ने मुझे कहा कि यह राष्ट्रपतियों के लिए नहीं होता.” “यह पूरी तरह बकवास है, क्योंकि जैसा कि बाद में मुझे बाबा की डायरी से पता चला कि केआर नारायणन के निधन के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई गई थी और उनका शोक संदेश बाबा ने ही तैयार किया था.”
हालांकि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन के समय भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना महामारी का दौर था. उनका निधन 31 अगस्त 2020 को हुआ था.
सुखबीर बादल ने इस मामले पर पीएम मोदी के दख़ल की मांग की है
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी मनमोहन सिंह के स्मारक के मुद्दे पर मोदी सरकार से नाराज़गी जताई है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है, “चौंकाने वाला और अविश्वसनीय! डॉ. मनमोहन सिंह के परिवार ने इस प्रतिष्ठित और उत्कृष्ट नेता का अंतिम संस्कार ऐसे स्थान पर करने का अनुरोध किया था जहां एक ऐतिहासिक स्मारक बनाया जा सके. केंद्र सरकार ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया. यह अत्यंत निंदनीय है…”
“यह समझ से परे है कि सरकार उस नेता के प्रति इतना अपमानजनक क्यों है जो सिख समुदाय का एकमात्र प्रधानमंत्री है. कांग्रेस के साथ हमारे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, हमने डॉ. मनमोहन सिंह को हमेशा सम्मान दिया है. वह एक व्यक्ति थे जो राजनीति और राजनीतिक संबंधों से हटकर थे.”
सुखबीर सिंह बादल ने मांग की, “सिख और पंजाब के मुद्दों पर, डॉ. मनमोहन सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के साथ अत्यधिक संवेदनशीलता और करुणा दिखाई. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सरकार के निंदनीय फैसले को पलटने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध करता हूं.”
वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक के मुद्दे पर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा है, “उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए. देश को मनमोहन सिंह जैसा नेता कभी नहीं मिलेगा. मैं उनकी सरकार में मंत्री था. मैं उनके काफ़ी क़रीब था.”
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है. सोशल मीडिया एक्स पर मायावती ने लिखा है, “केन्द्र सरकार देश के पहले सिख प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह के देहांत होने पर उनका अन्तिम संस्कार वहाँ कराए और उनके सम्मान में भी स्मारक आदि वहीं बनवाए जहाँ उनके परिवार की दिली इच्छा है.” मायावती का कहना है, “इसके लिए कोई भी राजनीति करना ठीक नहीं है और इन मामलों में केन्द्र सरकार पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार और सिख समाज की भी भावनाओं का ज़रूर सम्मान करे, तो यह उचित होगा.”
बीजेपी का जवाब
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया है
पूर्व प्रधानमंत्री के स्मारक के मुद्दे पर गर्म होती सियासत के बीच बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और एनडीए की सरकार पूर्व प्रधानमंत्री को उचित सम्मान देने के लिए पूरी तरह समर्पित है, जिन्होंने देश के आर्थिक विकास की नींव रखी थी. उनका कहना है, “इसके लिए कल कैबिनेट की मीटिंग में तय किया गया कि मनमोहन सिंह की याद में एक स्मारक और समाधि बनाई जाएगी और इसकी जानकारी कांग्रेस पार्टी को दे दी गई कि ज़मीन के अधिग्रहण, ट्रस्ट के निर्माण और ज़मीन के हस्तांतरण जैसी औपचारिकता में जो भी समय लगे, यह काम उचित तरीके़ और जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा.”
सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया है, “कांग्रेस पार्टी ने कभी भी मनमोहन सिंह का सम्मान नहीं किया. कम से कम इस दुःख के समय में राजनीति नहीं होनी चाहिए. जहां तक हमारी सरकार की बात है तो पीएम मोदी की सरकार ने सभी नेताओं को दलगत भावना से उठकर सम्मान दिया है.” पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन गुरुवार रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में हुआ था. वहां से उनका पार्थिव शरीर दिल्ली में उनके आवास ‘3, मोतीलाल नेहरू मार्ग’ पर रखा गया था. यहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.
निगमबोध घाट पर होगा अंतिम संस्कार
देश के पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में दिल्ली एम्स में निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दर्शन के लिए आज सुबह 8.30 बजे से एक घंटे के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में रखा जाएगा। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सिंह की अंतिम यात्रा शनिवार सुबह 9.30 बजे मुख्यालय से श्मशान घाट तक शुरू होगी। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ शनिवार सुबह 11.45 बजे नई दिल्ली के निगमबोध घाट पर होगा।







