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2024 की कुछ बड़ी सियासी घटनाए…..मोदी की हैट्रिक, नीतीश की पलटी से केजरीवाल-सोरेन को जेल

UB India News by UB India News
December 25, 2024
in TAZA KHABR, केंद्रीय राजनीती
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2024 की कुछ बड़ी सियासी घटनाए…..मोदी की हैट्रिक, नीतीश की पलटी से केजरीवाल-सोरेन को जेल
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साल 2024 भी गुजरने वाला है। इस साल भारत के लोग कई अहम राजनीतिक घटनाओं के गवाह बने। यही वह साल रहा जब लोकसभा चुनाव हुए और 62 साल बाद देश में किसी पार्टी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। लोकसभा के अलावा आठ राज्यों के विधानसभा चुनाव भी इसी साल हुए। इसी साल देश की राजधानी में राजनीतिक संकट खड़ा हुआ जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल चले गए। ऐसा ही कुछ घटनाक्रम झारखंड में भी हुआ। हिमाचल में भी सरकार के सामने संकट आया।

जनवरी: साल की शुरुआत से ही लोकसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई। प्रधानमंत्री मोदी साल की शुरुआत होते ही दक्षिण के राज्यों में पहुंचे। उन्होंने 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले कई मंदिरों में दर्शन किया। इसके साथ ही दक्षिणी राज्यों में रोड शो भी किया। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भाजपा का मिशन दक्षिण बताया।

जनवरी के मध्य में महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित करने वाला एक बड़ा घटनाक्रम हुआ। शिवसेना के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट के विधायकों की अयोग्यता पर फैसला हुआ। अयोग्यता का फैसला महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सुनाया, जिसका आदेश उच्चतम न्यायालय ने दिया था। स्पीकर ने उद्धव गुट की दलीलें खारिज कर दीं और शिंदे गुट को असली शिवसेना माना।

महीने के अंत में बिहार ने एक बार फिर नीतीश कुमार को गठबंधन बदलते देखा गया। नीतीश कुमार ने बिहार सीएम के पद से इस्तीफा देकर भाजपा के साथ नई सरकार बना ली। यह पहली बार नहीं था जब नीतीश कुमार महागठबंधन को छोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ आए। इससे पहले तीन बार जदयू ने साथी बदले थे लेकिन दिलचस्प है कि नीतीश कुमार हर बार मुख्यमंत्री रहे। भले उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या उनके सहयोगी से कम रही हो।

जनवरी के अंत में ही झारखंड में बड़ी उठापटक हुई। अवैध जमीन घोटाले में फंसे हेमंत सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस गठबंधन ने सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया।

फरवरी

इस महीने की शुरुआत में झारखंड की राजनीति सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही। हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद चंपई सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके साथ दो और मंत्रियों ने भी शपथ ली। महीने की शुरुआत में ही अपने तीसरे कार्यकाल की भविष्यवाणी करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए यह नारा दिया था।

चुनाव आयोग ने अजित पवार वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को ही असली एनसीपी करार दिया। छह महीने से अधिक समय तक चली 10 से अधिक सुनवाई के बाद आयोग ने एनसीपी में विवाद का निपटारा कर दिया।

फरवरी में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने वाली सोनिया गांधी नेहरू-गांधी खानदान की तीसरी सदस्य बन गईं। इससे पहले खानदान से उमा नेहरू और इंदिरा गांधी राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुनी गई थीं।

फरवरी मध्य में देश की सर्वोच्च अदालत ने चुनावी बॉन्ड पर बड़ा निर्णय दिया। उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए इस पर रोक लगा दी। न्यायालय ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की आलोचना की और कहा कि राजनीतिक पार्टियों को हो रही फंडिंग की जानकारी मिलना बेहद जरूरी है।

महीने के अंत में हिमाचल प्रदेश में सियासी उठापटक हुई। इसकी शुरुआत राज्यसभा चुनाव से हुई जिसमें छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। इसके चलते बिना आवश्यक संख्या के भाजपा ने अपने प्रत्याशी हर्ष महाजन को कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी के खिलाफ जिता लिया। क्रॉस वोटिंग से सुक्खू सरकार भी संकट में आ गई हालांकि यह संकट बाद में टल गया।

मार्च: लोकसभा चुनाव से पहले देश में मार्च में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। इसी कड़ी में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ जब चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी एनडीए में वापस आ गई। 2014 का चुनाव दोनों दलों ने साथ मिलकर लड़ा था लेकिन 2018 आते-आते दोनों के रास्ते अलग हो गए थे।

उधर हरियाणा में दो बड़ी राजनीतिक घटनाएं घटीं। भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी का चार साल चार महीने पुराना गठबंधन टूट गया। गठबंधन टूटने के साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन भी हुआ। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह नायब सैनी मुख्यमंत्री बने।

16 मार्च को चुनाव आयोग ने लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया। तारीखों के एलान के साथ ही आम चुनाव के लिए सियासी बिगुल बज गया और राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतर आए।

मार्च का अंत दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के लिए मुसीबत लेकर आया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली शराब नीति घोटाले मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। यह पहली बार था जब कोई मुख्यमंत्री गिरफ्तार हुआ।

अप्रैल: इस महीने की शुरुआत में भी लोकसभा चुनाव की सरगर्मी रही। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने  ‘न्याय पत्र’ तो भाजपा ने संकल्प पत्र के नाम से अपना घोषणा पत्र जारी किया। पहले दो चरण के लोकसभा चुनाव भी अप्रैल में हुए। इसके साथ ही नितिन गडकरी, नकुल नाथ, राहुल गांधी, शशि थरूर, हेमा मालिनी समेत कई दिग्गजों की सियासी किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। इसी महीने अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराया गया।

मई: इस महीने की पहली बड़ी राजनीतिक खबर रायबरेली सीट से राहुल गांधी की उम्मीदवारी का एलान रही। नामांकन के आखिरी दिन कांग्रेस ने रायबरेली सीट से राहुल गांधी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। मई महीना आम आदमी पार्टी के लिए एक राहत भी लेकर आया जब दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिल गई। दिल्ली के सीएम को यह राहत सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मिली।

तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे चरण के लोकसभा चुनाव भी मई में कराए गए। इसमें अमित शाह, राजनाथ सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राहुल गांधी, स्मृति ईरानी, उमर अब्दुल्ला, मेनका गांधी, धर्मेंद्र यादव, मनोहर लाल, चिराग पासवान, डिंपल यादव, असदुद्दीन ओवैसी, सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार जैसे बड़े चेहरों की सीटों पर भी मतदान हुआ।

जून: इस महीने का आगाज सातवें चरण के लोकसभा चुनाव से हुआ। इस चरण में पीएम मोदी, कंगना रनौत, अनुराग ठाकुर, चरणजीत सिंह चन्नी की सीटों पर मतदान हुआ। सातवें चरण के मतदान के साथ ही 1 जून को अलग-अलग मीडिया चैनलों और सर्वे एजेंसियों की तरफ से एग्जिट पोल जारी किए गए। सभी सर्वे में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को प्रचंड बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया।

4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए जिसने एग्जिट पोल के अनुमानों को धता बताते हुए नतीजों ने चौंकाया। भाजपा बहुमत से दूर 240 सीटों तक ही पहुंच पाई। वह एनडीए के सहयोगी दलों की मदद से 293 तक पहुंची। वहीं विपक्षी गठबंधन इंडिया ने 240 सीटों के साथ कड़ी टक्कर दी। नतीजों के बाद 9 जून को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लोकसभा चुनाव 2024 से साथ अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के विधानसभा चुनाव के परिणाम आए।

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर की जगह टीडीपी-भाजपा-जन सेना पार्टी के गठबंधन की सरकार बनी और चंद्रबाबू नायडू सीएम बने। ओडिशा में बीजू जनता दल की जगह भाजपा की सरकार बनी और मोहन चरण मांझी को राज्य की कमान मिली। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने अपनी सत्ता को बरकरार रखा और पेमा खांडू फिर मुख्यमंत्री बने। सिक्किम में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने अपनी सरकार बरकरार रखी और प्रेम सिंह तमांग राज्य के मुखिया बने।

जुलाई: इस महीने की शुरुआत में झारखंड में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन चर्चा का विषय रहा। जेल से रिहा हुए हेमंत सोरेन ने तीसरी बार राज्य के सीएम पद की शपथ ली। इससे पहले चंपई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया।

इसी महीने सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान हुआ। इनमें सबसे ज्यादा चार सीटें पश्चिम बंगाल की रहीं। वहीं, हिमाचल प्रदेश की तीन तो उत्तराखंड की दो सीटों पर भी वोट डाले गए। लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद पहली बार चुनाव हुए। केंद्र की सत्ताधारी भाजपा को इस चुनाव में नुकसान हुआ। वहीं, विपक्षी गठबंधन को 13 में से 10 सीटों पर जीत मिली। हिमाचल और मध्य प्रदेश एक-एक सीट पर भाजपा और बिहार में एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते। हिमाचल में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर भी चुनाव जीतने में सफल रहीं।

अगस्त: इस महीने के आरंभ में संसद में पेश हुआ वक्फ संशोधन विधेयक चर्चा में रहा। कांग्रेस और सपा समेत कई विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया। वहीं, सरकार का कहना है कि इस विधेयक के जरिए वक्फ बोर्ड को मिली असीमित शक्तियों पर अंकुश लगाकर बेहतर और पारदर्शी तरीके से प्रबंधन किया जाएगा। सरकार ने बाद में इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की सिफारिश कर दी। इसी महीने आप को एक बड़ी राहत मिली जब दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सर्वोच्च अदालत ने जमानत दे दी।

अगस्त में ही कर्नाटक का मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) भूमि घोटाला चर्चा में रहा। इसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम और अन्य पर आरोप लगे।

महीने के मध्य में चुनाव आयोग ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान किया। 5 अगस्त 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से जम्मू कश्मीर उपराज्यपाल के प्रशासन के आधीन था।

झारखंड में चुनाव से पहले सियासी उठापटक हुई। कभी झामुमो की तरफ से राज्य के मुख्यमंत्री रहे चंपई सोरेन भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने झामुमो में खुद का अपमान होने की बात कह कर पार्टी से अलग राह तलाश ली।

सितंबर: यह महीना आप के लिए फिर एक बड़ी राहत लाया जब आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल गई। दिल्ली शराब घोटाला मामले में जेल में बंद केजरीवाल जेल से बाहर आ गए। आप नेता को यह राहत सुप्रीम कोर्ट ने दी। केजरीवाल से पहले आप के कई बड़े नेताओं को इसी मामले में जमानत मिल चुकी थी जिसमें मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विजय नायर भी शामिल हैं।

‘एक देश, एक चुनाव’ पर बनी कोविंद समिति की रिपोर्ट को केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी भी सितंबर में मिली। विधि मंत्रालय के 100 दिवसीय एजेंडे के हिस्सा के रूप में कैबिनेट के सामने रिपोर्ट पेश की थी, जिसे कैबिनेट से मंजूरी मिल गई।

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए। सितंबर में दो चरण में राज्य में मतदान कराया गया।

अक्तूबर: इस महीने की शुरुआत में हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे सुर्खियों में रहे। हरियाणा में सत्ताधारी भाजपा ने इतिहास रचा और हरियाणा के गठन के बाद पहली बार भाजपा ऐसी पार्टी बन गई जिसने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। नायब सिंह सैनी दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। वहीं जम्मू कश्मीर की सत्ता में 10 साल बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की वापसी हुई। फारुख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में बहुमत हासिल किया। इसके अलावा कुछ निर्दलीय और अन्य दलों के विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दिया। केंद्र शासित प्रदेश की कमान उमर अब्दुल्ला ने संभाली।

अक्तूबर के मध्य में चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। इसके साथ ही देश भर में 14 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो राज्यों की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव भी तय कर दिया। इसमें राहुल गांधी द्वारा खाली की गई वायनाड लोकसभा और अखिलेश यादव की करहल सीट भी शामिल रही।

इस महीने की बड़ी सियासी घटना कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की लोकसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारी भी रही। प्रियंका ने मां सोनिया गांधी, भाई राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में वायनाड लोकसभा उपचुनाव के लिए पर्चा भरा।

नवंबर: इस महीने की ज्यादातर सुर्खियां महाराष्ट्र और झारखंड के नाम रहीं। झारखंड में 13 और 20 नवंबर को दो चरण का विधानसभा चुनाव हुए। 20 तारीख को ही महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए सभी 288 सीटों पर मतदान कराया गया।

23 नवंबर को झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने भाजपा नीत एनडीए को हराकर बहुमत हासिल किया। वहीं, महाराष्ट्र में एक बार फिर महयुति सरकार की प्रचंड बहुमत के साथ वापसी हुई।

नवंबर में ही केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए। कांग्रेस उम्मीदवार प्रियंका गांधी ने बड़ी जीत दर्ज की। करीब साढ़े तीन दशक का खुद का राजनीतिक अनुभव बताने वाली प्रियंका पहली बार चुनावी राजनीति में दाखिल हुई और पहले ही चुनाव में सफलता हासिल की।

इसी महीने की आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव की हलचल भी तेज हो गई। आम आदमी पार्टी ने 11 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची में छह नाम ऐसे हैं जो बीते 25 दिन के अंदर ही कांग्रेस या भाजपा से आप में आए थे। पार्टी ने 2020 में हारे तीन उम्मीदवारों पर भी फिर से भरोसा जताया।

महीने के अंत में हेमंत सोरेन की ताजपोशी चर्चा के केंद्र में रही। वह चौथी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। इसके साथ ही उनकी चौथी पारी शुरू हो गई। झारखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार है। इस नए नवेले राज्य के 24 साल के इतिहास में तीन चेहरे तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इनमें हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन, भाजपा नेता अर्जुन मुंडा और खुद हेमंत सोरेन शामिल थे। चौथी बार शपथ लेते ही हेमंत इस श्रेणी से आगे निकल गए।

दिसंबर:
इस महीने की खबरें महाराष्ट्र के नाम रही। 23 नवंबर को नतीजे आने के बाद 11 दिनों तक महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर संशय बना रहा। उधर निवर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाराज होने की खबरें भी आती रहीं। मुंबई से दिल्ली तक की बैठकों के बीच भाजपा ने तय किया कि उसके नेता देवेंद्र फडणवीस राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। 5 दिसंबर को फडणवीस ने तीसरी बार महाराष्ट्र की सत्ता की कुर्सी संभाली। वहीं उनकी कैबिनेट में एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मुंबई में हुए शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए का शक्ति प्रदर्शन भी दिखा।इसी महीने संसद के हंगामेदार शीतकालीन सत्र भी लगातार चर्चा में रहा। राज्यसभा में नोटों की गड्डी मिलने की घटना भी सुर्खियों में रही।

दिसंबर में ही आप की दूसरी, तीसरी और चौथी सूची की चर्चा रही। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए जारी उम्मीदवारों की दूसरी सूची में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, शिक्षाविद से नेता बने अवध ओझा और विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़लान जैसे नाम शामिल रहे। पटपड़गंज से विधायक मनीष सोसोदिया को इस बार जंगपुरा विधानसभा सीट से टिकट दिया गया। चौथी सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी का नाम शामिल रहा। इसके साथ ही आप ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए।

इसके अलावा कांग्रेस ने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची जारी कर दी। पहली सूची में दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव, अनिल चौधरी, संदीप दीक्षित और हारुन यूसूफ जैसे बड़े नाम शामिल हैं। नई दिल्ली सीट पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के सामने कांग्रेस से संदीप दीक्षित उम्मीदवार होंगे। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर चुके हैं।

साल 2024 भी गुजरने वाला है। इस साल भारत के लोग कई अहम राजनीतिक घटनाओं के गवाह बने। यही वह साल रहा जब लोकसभा चुनाव हुए और 62 साल बाद देश में किसी पार्टी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। लोकसभा के अलावा आठ राज्यों के विधानसभा चुनाव भी इसी साल हुए। इसी साल देश की राजधानी में राजनीतिक संकट खड़ा हुआ जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल चले गए। ऐसा ही कुछ घटनाक्रम झारखंड में भी हुआ। हिमाचल में भी सरकार के सामने संकट आया।

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जनवरी: साल की शुरुआत से ही लोकसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई। प्रधानमंत्री मोदी साल की शुरुआत होते ही दक्षिण के राज्यों में पहुंचे। उन्होंने 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले कई मंदिरों में दर्शन किया। इसके साथ ही दक्षिणी राज्यों में रोड शो भी किया। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भाजपा का मिशन दक्षिण बताया।

जनवरी के मध्य में महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित करने वाला एक बड़ा घटनाक्रम हुआ। शिवसेना के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट के विधायकों की अयोग्यता पर फैसला हुआ। अयोग्यता का फैसला महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सुनाया, जिसका आदेश उच्चतम न्यायालय ने दिया था। स्पीकर ने उद्धव गुट की दलीलें खारिज कर दीं और शिंदे गुट को असली शिवसेना माना।

महीने के अंत में बिहार ने एक बार फिर नीतीश कुमार को गठबंधन बदलते देखा गया। नीतीश कुमार ने बिहार सीएम के पद से इस्तीफा देकर भाजपा के साथ नई सरकार बना ली। यह पहली बार नहीं था जब नीतीश कुमार महागठबंधन को छोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ आए। इससे पहले तीन बार जदयू ने साथी बदले थे लेकिन दिलचस्प है कि नीतीश कुमार हर बार मुख्यमंत्री रहे। भले उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या उनके सहयोगी से कम रही हो।

जनवरी के अंत में ही झारखंड में बड़ी उठापटक हुई। अवैध जमीन घोटाले में फंसे हेमंत सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस गठबंधन ने सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया।

फरवरी

इस महीने की शुरुआत में झारखंड की राजनीति सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही। हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद चंपई सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके साथ दो और मंत्रियों ने भी शपथ ली। महीने की शुरुआत में ही अपने तीसरे कार्यकाल की भविष्यवाणी करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए यह नारा दिया था।

चुनाव आयोग ने अजित पवार वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को ही असली एनसीपी करार दिया। छह महीने से अधिक समय तक चली 10 से अधिक सुनवाई के बाद आयोग ने एनसीपी में विवाद का निपटारा कर दिया।

फरवरी में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने वाली सोनिया गांधी नेहरू-गांधी खानदान की तीसरी सदस्य बन गईं। इससे पहले खानदान से उमा नेहरू और इंदिरा गांधी राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुनी गई थीं।

फरवरी मध्य में देश की सर्वोच्च अदालत ने चुनावी बॉन्ड पर बड़ा निर्णय दिया। उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए इस पर रोक लगा दी। न्यायालय ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना की आलोचना की और कहा कि राजनीतिक पार्टियों को हो रही फंडिंग की जानकारी मिलना बेहद जरूरी है।

महीने के अंत में हिमाचल प्रदेश में सियासी उठापटक हुई। इसकी शुरुआत राज्यसभा चुनाव से हुई जिसमें छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। इसके चलते बिना आवश्यक संख्या के भाजपा ने अपने प्रत्याशी हर्ष महाजन को कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी के खिलाफ जिता लिया। क्रॉस वोटिंग से सुक्खू सरकार भी संकट में आ गई हालांकि यह संकट बाद में टल गया।

मार्च: लोकसभा चुनाव से पहले देश में मार्च में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। इसी कड़ी में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ जब चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी एनडीए में वापस आ गई। 2014 का चुनाव दोनों दलों ने साथ मिलकर लड़ा था लेकिन 2018 आते-आते दोनों के रास्ते अलग हो गए थे।

उधर हरियाणा में दो बड़ी राजनीतिक घटनाएं घटीं। भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी का चार साल चार महीने पुराना गठबंधन टूट गया। गठबंधन टूटने के साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन भी हुआ। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह नायब सैनी मुख्यमंत्री बने।

16 मार्च को चुनाव आयोग ने लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया। तारीखों के एलान के साथ ही आम चुनाव के लिए सियासी बिगुल बज गया और राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतर आए।

मार्च का अंत दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के लिए मुसीबत लेकर आया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली शराब नीति घोटाले मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। यह पहली बार था जब कोई मुख्यमंत्री गिरफ्तार हुआ।

अप्रैल: इस महीने की शुरुआत में भी लोकसभा चुनाव की सरगर्मी रही। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने  ‘न्याय पत्र’ तो भाजपा ने संकल्प पत्र के नाम से अपना घोषणा पत्र जारी किया। पहले दो चरण के लोकसभा चुनाव भी अप्रैल में हुए। इसके साथ ही नितिन गडकरी, नकुल नाथ, राहुल गांधी, शशि थरूर, हेमा मालिनी समेत कई दिग्गजों की सियासी किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। इसी महीने अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराया गया।

मई: इस महीने की पहली बड़ी राजनीतिक खबर रायबरेली सीट से राहुल गांधी की उम्मीदवारी का एलान रही। नामांकन के आखिरी दिन कांग्रेस ने रायबरेली सीट से राहुल गांधी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। मई महीना आम आदमी पार्टी के लिए एक राहत भी लेकर आया जब दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिल गई। दिल्ली के सीएम को यह राहत सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मिली।

तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे चरण के लोकसभा चुनाव भी मई में कराए गए। इसमें अमित शाह, राजनाथ सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राहुल गांधी, स्मृति ईरानी, उमर अब्दुल्ला, मेनका गांधी, धर्मेंद्र यादव, मनोहर लाल, चिराग पासवान, डिंपल यादव, असदुद्दीन ओवैसी, सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार जैसे बड़े चेहरों की सीटों पर भी मतदान हुआ।

जून: इस महीने का आगाज सातवें चरण के लोकसभा चुनाव से हुआ। इस चरण में पीएम मोदी, कंगना रनौत, अनुराग ठाकुर, चरणजीत सिंह चन्नी की सीटों पर मतदान हुआ। सातवें चरण के मतदान के साथ ही 1 जून को अलग-अलग मीडिया चैनलों और सर्वे एजेंसियों की तरफ से एग्जिट पोल जारी किए गए। सभी सर्वे में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को प्रचंड बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया।

4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए जिसने एग्जिट पोल के अनुमानों को धता बताते हुए नतीजों ने चौंकाया। भाजपा बहुमत से दूर 240 सीटों तक ही पहुंच पाई। वह एनडीए के सहयोगी दलों की मदद से 293 तक पहुंची। वहीं विपक्षी गठबंधन इंडिया ने 240 सीटों के साथ कड़ी टक्कर दी। नतीजों के बाद 9 जून को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लोकसभा चुनाव 2024 से साथ अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के विधानसभा चुनाव के परिणाम आए।

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर की जगह टीडीपी-भाजपा-जन सेना पार्टी के गठबंधन की सरकार बनी और चंद्रबाबू नायडू सीएम बने। ओडिशा में बीजू जनता दल की जगह भाजपा की सरकार बनी और मोहन चरण मांझी को राज्य की कमान मिली। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने अपनी सत्ता को बरकरार रखा और पेमा खांडू फिर मुख्यमंत्री बने। सिक्किम में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने अपनी सरकार बरकरार रखी और प्रेम सिंह तमांग राज्य के मुखिया बने।

जुलाई: इस महीने की शुरुआत में झारखंड में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन चर्चा का विषय रहा। जेल से रिहा हुए हेमंत सोरेन ने तीसरी बार राज्य के सीएम पद की शपथ ली। इससे पहले चंपई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया।

इसी महीने सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान हुआ। इनमें सबसे ज्यादा चार सीटें पश्चिम बंगाल की रहीं। वहीं, हिमाचल प्रदेश की तीन तो उत्तराखंड की दो सीटों पर भी वोट डाले गए। लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद पहली बार चुनाव हुए। केंद्र की सत्ताधारी भाजपा को इस चुनाव में नुकसान हुआ। वहीं, विपक्षी गठबंधन को 13 में से 10 सीटों पर जीत मिली। हिमाचल और मध्य प्रदेश एक-एक सीट पर भाजपा और बिहार में एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते। हिमाचल में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर भी चुनाव जीतने में सफल रहीं।

अगस्त: इस महीने के आरंभ में संसद में पेश हुआ वक्फ संशोधन विधेयक चर्चा में रहा। कांग्रेस और सपा समेत कई विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया। वहीं, सरकार का कहना है कि इस विधेयक के जरिए वक्फ बोर्ड को मिली असीमित शक्तियों पर अंकुश लगाकर बेहतर और पारदर्शी तरीके से प्रबंधन किया जाएगा। सरकार ने बाद में इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की सिफारिश कर दी। इसी महीने आप को एक बड़ी राहत मिली जब दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सर्वोच्च अदालत ने जमानत दे दी।

अगस्त में ही कर्नाटक का मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) भूमि घोटाला चर्चा में रहा। इसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम और अन्य पर आरोप लगे।

महीने के मध्य में चुनाव आयोग ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान किया। 5 अगस्त 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से जम्मू कश्मीर उपराज्यपाल के प्रशासन के आधीन था।

झारखंड में चुनाव से पहले सियासी उठापटक हुई। कभी झामुमो की तरफ से राज्य के मुख्यमंत्री रहे चंपई सोरेन भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने झामुमो में खुद का अपमान होने की बात कह कर पार्टी से अलग राह तलाश ली।

सितंबर: यह महीना आप के लिए फिर एक बड़ी राहत लाया जब आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल गई। दिल्ली शराब घोटाला मामले में जेल में बंद केजरीवाल जेल से बाहर आ गए। आप नेता को यह राहत सुप्रीम कोर्ट ने दी। केजरीवाल से पहले आप के कई बड़े नेताओं को इसी मामले में जमानत मिल चुकी थी जिसमें मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विजय नायर भी शामिल हैं।

‘एक देश, एक चुनाव’ पर बनी कोविंद समिति की रिपोर्ट को केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी भी सितंबर में मिली। विधि मंत्रालय के 100 दिवसीय एजेंडे के हिस्सा के रूप में कैबिनेट के सामने रिपोर्ट पेश की थी, जिसे कैबिनेट से मंजूरी मिल गई।

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए। सितंबर में दो चरण में राज्य में मतदान कराया गया।

अक्तूबर: इस महीने की शुरुआत में हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे सुर्खियों में रहे। हरियाणा में सत्ताधारी भाजपा ने इतिहास रचा और हरियाणा के गठन के बाद पहली बार भाजपा ऐसी पार्टी बन गई जिसने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। नायब सिंह सैनी दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। वहीं जम्मू कश्मीर की सत्ता में 10 साल बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की वापसी हुई। फारुख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में बहुमत हासिल किया। इसके अलावा कुछ निर्दलीय और अन्य दलों के विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दिया। केंद्र शासित प्रदेश की कमान उमर अब्दुल्ला ने संभाली।

अक्तूबर के मध्य में चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। इसके साथ ही देश भर में 14 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो राज्यों की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव भी तय कर दिया। इसमें राहुल गांधी द्वारा खाली की गई वायनाड लोकसभा और अखिलेश यादव की करहल सीट भी शामिल रही।

इस महीने की बड़ी सियासी घटना कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की लोकसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारी भी रही। प्रियंका ने मां सोनिया गांधी, भाई राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में वायनाड लोकसभा उपचुनाव के लिए पर्चा भरा।

नवंबर: इस महीने की ज्यादातर सुर्खियां महाराष्ट्र और झारखंड के नाम रहीं। झारखंड में 13 और 20 नवंबर को दो चरण का विधानसभा चुनाव हुए। 20 तारीख को ही महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए सभी 288 सीटों पर मतदान कराया गया।

23 नवंबर को झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने भाजपा नीत एनडीए को हराकर बहुमत हासिल किया। वहीं, महाराष्ट्र में एक बार फिर महयुति सरकार की प्रचंड बहुमत के साथ वापसी हुई।

नवंबर में ही केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए। कांग्रेस उम्मीदवार प्रियंका गांधी ने बड़ी जीत दर्ज की। करीब साढ़े तीन दशक का खुद का राजनीतिक अनुभव बताने वाली प्रियंका पहली बार चुनावी राजनीति में दाखिल हुई और पहले ही चुनाव में सफलता हासिल की।

इसी महीने की आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव की हलचल भी तेज हो गई। आम आदमी पार्टी ने 11 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची में छह नाम ऐसे हैं जो बीते 25 दिन के अंदर ही कांग्रेस या भाजपा से आप में आए थे। पार्टी ने 2020 में हारे तीन उम्मीदवारों पर भी फिर से भरोसा जताया।

महीने के अंत में हेमंत सोरेन की ताजपोशी चर्चा के केंद्र में रही। वह चौथी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। इसके साथ ही उनकी चौथी पारी शुरू हो गई। झारखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार है। इस नए नवेले राज्य के 24 साल के इतिहास में तीन चेहरे तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इनमें हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन, भाजपा नेता अर्जुन मुंडा और खुद हेमंत सोरेन शामिल थे। चौथी बार शपथ लेते ही हेमंत इस श्रेणी से आगे निकल गए।

दिसंबर:
इस महीने की खबरें महाराष्ट्र के नाम रही। 23 नवंबर को नतीजे आने के बाद 11 दिनों तक महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर संशय बना रहा। उधर निवर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाराज होने की खबरें भी आती रहीं। मुंबई से दिल्ली तक की बैठकों के बीच भाजपा ने तय किया कि उसके नेता देवेंद्र फडणवीस राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। 5 दिसंबर को फडणवीस ने तीसरी बार महाराष्ट्र की सत्ता की कुर्सी संभाली। वहीं उनकी कैबिनेट में एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मुंबई में हुए शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए का शक्ति प्रदर्शन भी दिखा।इसी महीने संसद के हंगामेदार शीतकालीन सत्र भी लगातार चर्चा में रहा। राज्यसभा में नोटों की गड्डी मिलने की घटना भी सुर्खियों में रही।

दिसंबर में ही आप की दूसरी, तीसरी और चौथी सूची की चर्चा रही। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए जारी उम्मीदवारों की दूसरी सूची में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, शिक्षाविद से नेता बने अवध ओझा और विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़लान जैसे नाम शामिल रहे। पटपड़गंज से विधायक मनीष सोसोदिया को इस बार जंगपुरा विधानसभा सीट से टिकट दिया गया। चौथी सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी का नाम शामिल रहा। इसके साथ ही आप ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए।

इसके अलावा कांग्रेस ने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची जारी कर दी। पहली सूची में दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव, अनिल चौधरी, संदीप दीक्षित और हारुन यूसूफ जैसे बड़े नाम शामिल हैं। नई दिल्ली सीट पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के सामने कांग्रेस से संदीप दीक्षित उम्मीदवार होंगे। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर चुके हैं।

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