पूर्व आईएएस अधिकारी संजीव हंस और आरजेडी के पूर्व विधायक गुलाब यादव को शुक्रवार की देर शाम ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय ने इन्हें गिरफ्तार किया है. हंस की गिरफ्तारी उनके पटना स्थित सरकारी आवास से हुई. वहीं गुलाब यादव को दिल्ली स्थित एक रिसॉर्ट से गिरफ्तार किया गया.
बेऊर जेल भेजे गए अधिकारी और नेता
ईडी के अधिकारी ने दोनों की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है. गिरफ्तारी के बाद दोनों को ईडी की विशेष अदालत में पेश किया गया और शाम को बेऊर जेल भेज दिया गया. इससे पहले शुक्रवार को ईडी की टीम ने संजीव हंस और उनके करीबियों के पटना और दिल्ली स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी. ये कार्रवाई पटना में दो जगहों पर हुई, जबकि दिल्ली में तीन जगहों पर देर शाम तक चली.
ईडी के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ये कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय ने की है. बता दें कि संजीव हंस और पूर्व नेता गुलाब यादव के खिलाफ जुलाई महीने में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया गया था और उनके पटना झंझारपुर, पुणे, मुंबई सहित कुल 21 स्थानों पर एक साथ छापा मारा गया था. बिहार की विशेष जांच इकाई ने भी हंस और पूर्व विधायक के खिलाफ अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था.
अवैध तरीके से कमाई का हुआ था खुलासा
दरअसल बीते महीने ही संजीव हंस के खिलाफ अवैध तरीके से कमाई से जुड़े मामले का खुलासा हुआ था. ईडी के मुताबिक संजीव हंस ने मोहाली और कसौली में करोड़ों की बेनामी संपत्ति खरीदी है. संजीव हंस ने पंजाब के मोहाली में जमीन का एक बड़ा प्लॉट और हिमाचल के मोहाली के कसौली में चार आलीशान विला खरीदे हैं, जिसे बेनामी संपत्ति बताया गया है. इसके अलावा कई अन्य जगहों पर भी काली कमाई के दस्तावेज मिले हैं.
बिहार के चर्चित आईएएस अफसर संजीव हंस को ईडी की टीम ने पटना बेउर जेल भेज दिया है. शुक्रवार की रात में 12:30 बजे वह जेल के अंदर भेजे गए और जानकारी के अनुसार, उनको आमद वार्ड में रखा गया है. बता दें कि आईएएस संजीव हंस को पटना स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया था. इसी के साथ पूर्व विधायक गुलाब यादव को भी दिल्ली के निकट उनके एक रिसॉर्ट से गिरफ्तार किया गया था. इन दोनों की गिरफ्तारी ईडी की टीम ने की है. ऐसे में हम जानते हैं कि संजीव कुमार और गुलाब यादव पर कौन सा केस है जिसमें इनकी गिरफ्तारी हुई है.
दरअसल, आईएएस संजीव हंस के खिलाफ मनी लाॉड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था और इसके बाद ईड की टीम ने पटना से दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में कई ठिकानों पर संजीव हंस के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. जांच में संजीव हंस की पत्नी के अतिरिक्त उनके रिश्तेदारों के खिलाफ भी कई सबूत मिले थे. आईएएस संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव के करीबियों के ठिकानों पर ईडी ने रेड 90 लाख से अधिक कैश, 13 किलो चांदी की सिल्ली जब्त की थी. इनके ठिकानों पर कई बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक्स सबूत मिले थे.
ऐसे हुआ पूरे मामले का खुलासा
बता दें कि ईडी ने आईएएस संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव के दिल्ली, कोलकाता और मुंबई स्थित चार ठिकानों पर बुधवार को भी सर्च किया था. 2 महीने पहले ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संजीव हंस और गुलाब यादव के पटना, पुणे, पंजाब, दिल्ली, नोएडा समेत दर्जनों ठिकानों पर रेड मारी थी. दरअसल, भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग के केस के इस मामले का खुलासा तब हुआ उसके बाद हुआ जब 2017 में एक महिला वकील से गैंगरेप का मामला सामने आया. इसमें पूर्व एमएलए गुलाब यादव और इस संजीव हंस पर गंभीर आरोप लगाए गए. महिला ने अबॉर्शन करने का भी आरोप लगाया था.
जानिये क्या है पूरा मामला
इसके बाद वर्ष 2018 में उक्त महिला वकील को एक बेटा हुआ तो महिला ने दावा किया कि बेटा इस आईएएस संजीव हंस का है. फिर क्या था यह मामला सुर्खियों में आ गया. इसके बाद लगातार यह मामला हाइलाइटेड रहा. वर्ष 2022 में उक्त महिला ने पटना पुलिस को आवेदन दिया, लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया. इसके बाद आरोप लगाने वाली महिला कोर्ट गई और कोर्ट के आदेश पर 2023 में पटना के रूपसपुर थाने में केस दर्ज कराया गया. इसके बाद पटना एसएसपी की 17 अप्रैल 2023 की रिपोर्ट में महिला के आरोपी को सही पाया गया.
इसके बाद 2020 और 2021 को ईडी ने गुलाब यादव और संजीव हंस के घर पर रेड की. इस मामले में ईडी ने महिला को पूछताछ के लिए अपने ऑफिस भी बुलाया था. इसके बाद 6 अगस्त 2024 को पटना हाई कोर्ट ने गैंगरेप केस कोही क्वैश यानी खत्म कर दिया था. लेकिन, इसके बाद 20 अगस्त को महिला ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया है. औरंगाबाद की रहने वाली पीड़ित महिला वकील अभी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रहती हैं.
कौन हैं आईएएस संजीव हंस?
बता दें कि संजीव हंस वर्ष 1997 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं. संजीव हंस के पिता भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में थे. संजीव हंस ने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. बिहार के बांका जिला में उनको पहली पोस्टिंग मिली थी इसके बाद कई जिलों के डीएम पद पर रहे. इसके बाद वह नीतीश कुमार के करीबी अधिकारियों में गिने जाने लगे थे. बाद में विद्युत विभाग का जिम्मा उनके दिया गया. वह जल संसाधन और स्वास्थ्य विभाग में भी अपनी सेवा दे चुके हैं.







