भारत मां के लाल उद्योगपति रतन नवल टाटा के देहांत से पूरे देश में शोक की लहर है. महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में राजकीय शोक का ऐलान किया गया है. रतन टाटा की मौत के बाद अंतिम संस्कार के दौरान किन रीति रिवाजों को अपनाया जाएगा, यह हर कोई जानना चाहता है. चलिए हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं. रतन टाटा एक पारसी है. लिहाजा पारसी रिति रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार होगा. मुंबई के वर्ली की पारसी शमशान भूमि में उनके पार्थिव शरीर को लेकर जाया जाएगा.
सबसे पहले पार्थिव शरीर को प्रेयर हॉल में रखा जाएगा. प्रेयर हॉल में करीब 200 लोग मौजूद रह सकते हैं. करीब 45 मिनट तक रतन टाटा की आत्मा की शांति के लिए प्रेयर की जाएगी. प्रार्थना हॉल में पारसी रीति से ‘गेह-सारनू’ पढ़ा जाएगा. रतन टाटा के पार्थिव शरीर व मुंह पर एक कपड़े का टुकड़ा रख कर ‘अहनावेति’ का अध्याय पढ़ा जाएगा. ये शांति प्रार्थना की एक प्रक्रिया है. प्रेयर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर को इलेक्ट्रिक अग्निदाह में रखा जाएगा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
पारसी समाज ने बदला संस्कार का तरीका!
प्राप्त जानकारी के मुताबिक पहले यह बताया जा रहा था कि एक पारसी रिति रिवाज के अनुसार शव को एक लाइट हाउस में रखा जाता है. ताकि गिद्ध व चील-कोवे शव को खा लें. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि शव अपवित्र होता है. उसे जमीन में दफनाना व जलाना उचित नहीं है. इसीलिए पारसी सामाज शव को लाइटहाउस में रखता है. ताकि उसे गिद्ध व चील-कोवे खा सकें. इसे लेकर पारसी समाज में काफी मंथन हुआ. इसे पर्यावरण के लिए सही नहीं माना गया. बाद में सभी इस नतीजे पर पहुंचे की इलेक्ट्रिक अग्निदाह के माध्यम से शव को राख में बदला जाना ही उचित होगा.






