बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हमला हो रहा है. बांग्लादेश और भारत के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. इससे पहले बांग्लादेश ने शेख हसीना के मामले पर भारत को ही चेतावनी दे दी थी. बांग्लादेश की ओर से चेतावनी दी गई थी कि दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ने की चेतावनी दी थी. इस बीच मोहम्मद यूनुस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की गुहार लगाई थी. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अब खबर है कि अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान पीएम मोदी की बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस से मिलने की उम्मीद नहीं है.
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश की ओर से महासभा के दौरान एक बैठक के लिए औपचारिक अनुरोध किया गया था. इसमें दोनों नेता भाग लेने वाले हैं. नाम न बताने की शर्त पर लोगों ने बताया कि यूनुस पीएम मोदी के साथ इस बैठक के मिलने के लिए उत्सुक थे. उन्हें उम्मीद थी कि इससे शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में उभरी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलेगी.
लेकिन सवाल है कि एक तरफ यूनुस सरकार बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर बेखबर हैं. वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश शेख हसीना पर भारत को वार्निंग दे रहा है ऐसे में भारत कैसे माने कि यूनुस भारत के साथ रिश्तों में सुधार चाहते हैं. अगर वह ऐसा चाहते हैं तो उन्हें पहले कूटनीति का ककहरा सीखना होगा. हर चीज उनके हिसाब से नहीं हो सकती है. लोगों का कहना है कि ऐसी कोई बैठक भारतीय पक्ष के एजेंडे का हिस्सा नहीं है.
यूनुस सरकार के सदस्य कर रहे हैं टिप्पणी
यूनुस द्वारा हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में भारत-बांग्लादेश संबंधों पर की गई टिप्पणियां और ढाका में अंतरिम सरकार के सदस्यों द्वारा लगभग प्रतिदिन की जाने वाली टिप्पणियां भारत को बिल्कुल रास नहीं आई. इंटरव्यू में यूनुस ने भारत में निर्वासन के दौरान बांग्लादेश में विकास पर टिप्पणी करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की आलोचना की. उन्होंने सुझाव दिया कि बांग्लादेश उनका प्रत्यर्पण मांग सकता है और कहा कि भारत को इस “कथा” से आगे बढ़ना चाहिए कि हसीना की अवामी लीग के अलावा हर राजनीतिक दल “इस्लामवादी” है.
अंतरिम सरकार के अन्य सदस्यों, जिनमें वास्तविक विदेश मंत्री तौहीद हुसैन भी शामिल हैं, ने हसीना के प्रत्यर्पण की संभावना को बार-बार उठाया है. बता दें कि हसीना जो अगस्त को पद छोड़ने के बाद बांग्लादेश से भागर भारत आ गईं थीं. हुसैन ने यह भी स्वीकार किया कि ऐसा कोई भी कदम “भारत सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति” पैदा करेगा.







