मौसम की बेवफाई ने भले राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया, लेकिन इस संकट से निपटने के लिए कृषि विभाग का एक्शन प्लान भी तैयार था। हालांकि राज्य सरकार के एहतियाती कदम के आगे मौसम भी कुछ मेहरबान हुआ। स्थिति यह है कि 100 फीसदी का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में प्रयासरत कृषि विभाग पूरे राज्य में लक्ष्य में अबतक 80.55 प्रतिशत धान की रोपनी में सक्षम हो पाया है।
100 फीसदी से ज्यादा धन रोपनी वाले जिला
कृषि विभाग के मंत्री मंगल पांडेय ने आज सूचना भवन में जानकारी दी कि कई जिले ऐसे हैं, जहां 100 फीसदी से ज्यादा धन रोपा जा चुका है। ऐसे जिलों में कटिहार 107.74 प्रतिशत और सहरसा 101.13 प्रतिशत धान की रोपनी हो चुकी है। 100 फीसदी से थोड़ा अधिक धान की रोपनी जहां हुई है, उन जिलों में किशनगंज, गोपालगंज, अररिया, पश्चिम चंपारण और पूर्णिया जिला भी शामिल है।
60 प्रतिशत से नीचे किन जिलों में हुई धान की रोपनी
मौसम की मार सबसे ज्यादा जिन जिलों में पड़ी है, उनमें जमुई और बांका है। जमुई में धान रोपनी 46.60 और बांका में 49.62 प्रतिशत ही रोपनी हो पाई है। 60 प्रतिशत से भी जहां कम धान की रोपनी हुई, उनमें गया, नवादा, औरंगाबाद और भागलपुर शामिल है। इन जिलों में क्रमशः 57.44, 58.42, 58.55 और 59.01 प्रतिशत ही धान की रोपनी हुई।
जहां बारिश नहीं, वहां डीजल अनुदान
मौसम की बेरुखी को देखते राज्य सरकार जुलाई के अंतिम सप्ताह में ही जाग गई थी। सरकार ने आनन-फानन में डीजल अनुदान देने का फैसला लेकर किसानों के लक्ष्य को पूरा करने का एक तरह से संकल्प लिया। चिंतित राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अल्पवृष्टि को देखते सिंचाई के लिए डीजल अनुदान देने के प्रावधान को स्वीकृति दे डाली। और इस मद में सरकार ने 150 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी। अब किसानों को पटवन के लिए मिलने वाला डीजल अनुदान प्रति एकड़ 750 रुपये मिलेंगे। यह अधिकतम 8 एकड़ खेत के लिए मिलेंगे। अनुदान स्वीकृत होते ही लगभग 32 हजार आवेदन आ चुके है। जांच के बाद किसानों को डीजल अनुदान दिया जाएगा।







