चुनाव आयोग ने राज्यसभा के उपचुनाव की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 14 अगस्त से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगा और 21 अगस्त तक प्रत्याशी नामांकन कर सकेंगे। 27 अगस्त को नाम वापसी की आखिरी तारीख है। अगर मतदान की स्थिति बनती है तो 3 सितंबर को वोटिंग होगी। उसी दिन रिजल्ट की भी घोषित की जाएगी।
बिहार की भी दो सीटों पर चुनाव होना हैं। राजद नेत्री मीसा भारती और बीजेपी के विवेक ठाकुर के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ये सीटें खाली हुई हैं। बिहार की दोनों सीटों पर वोटिंग की संभावना कम है। दरअसल, दोनों सीटों पर अलग-अलग वोटिंग होगी। संख्या बल के आधार पर NDA का पलड़ा भारी है।
एक 2028 तक तो एक 2026 तक वैलिड
चुनाव आयोग की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक मीसा भारती का कार्यकाल 7 जुलाई 2028 तक था। वहीं, विवेक ठाकुर का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक था। उपचुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार का कार्यकाल उतना ही रहेगा।
उपेंद्र के नाम की हो चुकी है घोषणा
NDA की तरफ से एक सीट पर उपेंद्र कुशवाहा कैंडिडेट होंगे। इसकी घोषणा एक जुलाई को ही तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने की थी। ऐसे में राज्यसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का सांसद बनना तय है। हालांकि, दूसरी सीट पर अभी भी पेंच फंसा है।
इसकी वजह है कि एक सीट राजद के कोटे की थी और दूसरी बीजेपी की। राजद की सीट से अगर उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा जाते हैं तो बीजेपी दूसरी सीट अपने पास रखना चाहेगी। हालांकि, इस पर अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है।
पवन सिंह के कारण काराकाट से हार गए थे उपेंद्र कुशवाहा
उपेंद्र कुशावाहा ने लोकसभा चुनाव से पहले NDA से गठबंधन किया था। गठबंधन के तहत उन्हें काराकाट सीट दी गई थी। लेकिन, यहां से भाजपा के बागी पवन सिंह के चुनाव लड़ने से उपेंद्र कुशवाहा का पूरा समीकरण बिगड़ गया था। इसके कारण उपेंद्र कुशवाहा चुनाव हार गए। अब कुशवाहा वोट की नाराजगी को दूर करने के लिए एनडीए की तरफ से उन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी है।
क्या है कुशवाहा की ताकत
सभी पार्टियों ने भले अलग-अलग कुशवाहा नेताओं पर दांव लगाया, लेकिन बिहार में कुशवाहा के स्वीकार्य नेता अब भी उपेंद्र कुशवाहा ही हैं। उपेंद्र कुशवाहा कभी भी मास लीडर नहीं रहे। उनकी पहचान एक कास्ट लीडर के रूप में है। बिहार में जातीय गणना की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में कुशवाहा की आबादी लगभग 4.2% है। कुशवाहा भले सीट जीत नहीं पाए, लेकिन सीट को हरवाने में वो सफल रहते हैं।







