मुजफ्फरनगर में कांवड़ रूट पर दुकानदारों को अपना नाम और पहचान बताने वाले प्रशासन के आदेश पर घमासान मचा है। विपक्ष इसे हिटलरशाही बता रहा है और नाजी जर्मनी से इसकी तुलना कर रहा है। हालांकि, यूपी के सीएम योगी ने साफ कर दिया है कि वो विपक्ष के दबाव में झुकने वाले नहीं है। सीएम योगी ने आदेश वापस लेने के बजाय नया निर्देश जारी कर दिया है। इस नए निर्देश में कहा गया है कि पूरे राज्य में कांवड़ रूट पर दुकानदारों को खाने की दुकान पर नेमप्लेट लगाना होगा। आइए जानते हैं पूरा मामला।
फैसले का कारण भी सामने आया
यूपी के सभी कांवड़ रूट पर खानपान की दुकानों के सामने दुकानदारों को अपना नाम और अपनी पहचान बतानी होगी। ऐसा कांवड़ यात्रियों की आस्था और शुचिता को बरकरार रखने के लिए किया गया है। इसके साथ ही यूपी सरकार ने चेतावनी दी है कि हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचनेवालों पर कार्रवाई भी होगी।
यूपी की सियासत गरम हुई
इससे पहले मुजफ्फरनगर पुलिस प्रशासन की ओर से इस तरह के आदेश जारी किए गए थे जिसमें सभी दुकानदारों से दुकान के मालिक का नाम और पहचान लिखने के निर्देश दिए गए थे. जिसके बाद कई दुकानों पर उनके नाम भी लिखे दिखाई दिए. इस मामले पर सियासत भी तेज हो गई है. सपा और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने पहचान लिखे जाने पर सवाल उठाए हैं.
सपा-कांग्रेस ने उठाए फैसले पर सवाल
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस आदेश का सामाजिक अपराध बताते हुए आपसी सौहार्द को खत्म करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने की मांग की थी. वहीं यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इस फैसले को पूरी तरह अव्यवहारिक कार्य बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की. उन्होंने कहा कि वो समाज में भाईचारे की भावना को खराब करने का कार्य कर रहे हैं.
अजय राय ने कहा- इससे हमारे देश में भाई चारे की भावनाओं को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. आपस में तनाव पैदा कर रहे हैं. इस फैसले को तत्काल निरस्त करना चाहिए और जिस अधिकारी ने इस तरह का आदेश दिया है उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर बर्खास्त किया जाना चाहिए. ये सरकार गलत काम कर रही है. लखनऊ में लोगों के घर तोड़े गए. जो इस तरह के क्रू काम करते है वो आदमी बेहद निष्ठुर और समाज के तोड़ने का काम कर रहे हैं.
UP के बाद अब उत्तराखंड में भी कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों को लिखना होगा नाम
उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के मार्गों पर दुकान और ठेले लगाने वाले लोगों से कहा गया है कि वे दुकान-ठेले के बाहर अपनी नेमप्लेट लगाएं. अब ऐसा ही फरमान उत्तराखंड में भी जारी होता हुआ नजर आ रहा है. हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर बात की और कहा कि हम कांवड़ मार्ग पर रेस्तरां, दुकानों और सड़क किनारे स्टॉल लगाने वाले लोगों के नाम नेमप्लेट पर लगवाने का प्रयास कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने कहा, “कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों में मालिकों के नाम प्रदर्शित करने को लेकर अक्सर विवाद हो जाता है. कांवड़ यात्री इस बात को लेकर आपत्ति भी जताते रहे हैं. इस संबंध में हरिद्वार पुलिस जितने भी कांवड़ मार्ग हैं, वहां मौजूद रेस्तरां, दुकान, रेहड़ी-पटरी वालों का सत्यापन करके उनके मालिकों के नाम को शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं. उनके पेमेंट के जो क्यूआर कोड हैं, उनको भी शामिल करने का प्रयास हो रहा है.”
उत्तराखंड बीजेपी प्रभारी ने बताया क्यों लिया गया नेमप्लेट लगाने का फैसला?
वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम ने बताया है कि कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों की नेमप्लेट लगाने के फैसले को लागू करने का मकसद क्या है. उन्होंने कहा कि फैसला देश भर के लिए नहीं है बल्कि सिर्फ उस रूट के लिए है जहां पर से कांवड़ यात्रा निकलती हैं. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद यह फैसला लिया गया. मुझे नहीं लगता इस पर किसी को आपत्ति होनी चाहिए
बीजेपी नेता ने कहा कि विपक्षी पार्टियां सिर्फ राजनीति कर रही हैं और माहौल खराब करने की कोशिश कर रही हैं. उत्तराखंड में भी यह फैसला लागू होगा, लेकिन सिर्फ उस रुट पर जहां से कावड़ यात्रा निकलती हैं.
कांवड़ यात्रियों के लिए उठाया कदम: नेमप्लेट विवाद पर बोली यूपी सरकार
दूसरी ओर, यूपी सरकार के नेमप्लेट लगवाने के फैसले को लेकर उसकी जमकर आलोचना की जा रही है. इस बीच यूपी सरकार ने अपने फैसले को लेकर सफाई पेश की है. उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है, “यूपी के मुख्यमंत्री योगी ने कांवड़ यात्रियों के लिए बड़ा कदम उठाया है. पूरे उत्तर प्रदेश में कांवड़ मार्गों पर खाद्य पदार्थों की दुकानों पर ‘नेमप्लेट’ लगानी होगी. कांवड़ यात्रियों की आस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है. हलाल सर्टिफिकेशन वाले उत्पाद बेचने वालों पर भी कार्रवाई होगी.







