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Wednesday, July 29, 2026

मानसून सत्र से पहले सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, विपक्ष के साथ गतिरोध खत्म करने की होगी कोशिश

संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। बीते संसद सत्रों की तरह इस सत्र में भी हंगामा न हो इसके लिए सरकार ने 21 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बीते सत्र में नीट विवाद के चलते संसद में खूब हंगामा हुआ था। वहीं 24 जून से 3 जुलाई तक चले इस सत्र की शुरुआत में नए सांसदों ने शपथ भी ली।

 मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट कुछ ही दिनों में पेश होने वाला है। 22 जुलाई को संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। बीते संसद सत्रों की तरह इस सत्र में भी हंगामा न हो इसके लिए सरकार ने 21 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें कि बीते सत्र में नीट विवाद के चलते संसद में खूब हंगामा हुआ था। वहीं, 24 जून से 3 जुलाई तक चले इस सत्र की शुरुआत में नए सांसदों ने शपथ भी ली।

इसी सत्र में बजट होगा पेश

मानसून सत्र के दौरान ही बजट पेश किया जाना है। ये सत्र 22 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलने वाला है। इसी दौरान केंद्र सरकार अपना पूर्ण बजट पेश करेगी। 23 जुलाई को केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने वाली हैं।

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इससे पहले मोदी सरकार ने विपक्ष के साथ गतिरोध खत्म करने की कोशिश की है और 21 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. संसदीय कार्य मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में इस बारे में जानकारी दी. जिसमें कहा गया कि, संसद के बजट सत्र से पहले, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक करेंगे. सर्वदलीय बैठक 21 जुलाई को सुबह 11:00 बजे मुख्य समिति कक्ष, संसदीय सौध में होगी.

22 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा बजट सत्र

बता दें कि संसद का बजट सत्र 22 जुलाई को शुरू होगा. 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. इस बजट सत्र की समाप्ति 12 अगस्त को होगी. इससे पहले मंगलवार को हलवा समारोह हुआ. जिसमें वित्त मंत्री ने सभी अधिकारियों को अपने हाथ से हलवा बांटा. बता दें कि हलवा सेरेमनी बजट तैयारी प्रक्रिया के अंतिम चरण का प्रतीक है. नॉर्थ ब्लॉक में हुई इस हलवा सेरेमनी में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा राज्य मंत्री पंकज चौधरी समेत कई मंत्रालयों के सचिव शामिल हुए. इस अवसर पर बजट तैयारी और संकलन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे.

कब होती है हलवा सेरेमनी

बता दें कि बजट तैयारी की “लॉक-इन” प्रक्रिया शुरू होने से पहले हर साल एक पारंपरिक हलवा समारोह आयोजित किया जाता है. हलवा समारोह नॉर्थ ब्लॉक में होता है और एक बड़ी ‘कढ़ाई’ में हलवा बनाया जाता है. वित्त मंत्री औपचारिक रूप से ‘कढ़ाई’ चलाते हैं और आम तौर पर बजट बनाने की प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को हलवा परोसते हैं. यह परंपरा वित्त मंत्रालय के सभी अधिकारियों की कड़ी मेहनत को स्वीकार करने का भी एक तरीका है. हलवा समारोह संसद में प्रस्तुति से पहले सभी बजट दस्तावेजों को मुद्रित करने की प्रक्रिया की शुरुआत करता है.

हलवा सेरेमनी एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है क्योंकि यह वित्त मंत्रालय में लॉकडाउन की शुरुआत का भी प्रतीक है. इसका मतलब है कि इसके बाद किसी भी अधिकारी को मंत्रालय परिसर छोड़ने की अनुमति नहीं है. संसद में वित्तीय दस्तावेज़ पेश होने के बाद ही बजट टीम के प्रत्येक सदस्य को घर जाने की अनुमति होती है. बता दें कि केंद्रीय बजट को छापने की प्रक्रिया साल 1980 से नॉर्थ ब्लॉक में होती आ रही है.

पहली बार नेता प्रतिपक्ष के रूप में हिस्सा लेंगे राहुल
खबर है कि इस पारंपरिक बैठक में पहली बार नेता प्रतिपक्ष के रूप कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शामिल होंगे. वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का कोई भी प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं होगा. क्योंकि पार्टी 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाती है. टीएमसी संसदीय दल के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने रीजीजू को पत्र लिखकर सूचित किया, कि उनकी पार्टी इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएगी.

बैठक में इस वजह से शामिल नहीं होगी टीएमसी
नेता ने अपने पत्र में लिखा, 30 वर्षों से 21 जुलाई को बंगाल में हमारे 13 साथियों के सम्मान में ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. जो 1993 में पुलिस की गोलीबारी में गैरकानूनी रूप से मारे गए थे. उन्होंने कहा, इस परिप्रेक्ष्य में मेरे सहित अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सभी सांसद पार्टी के अन्य सहयोगियों के साथ इस दिवस को मनाने के लिए अपने गृह राज्य में होंगे. इसलिए कोई भी सांसद बैठक में शामिल नहीं हो सकेगा.

23 जुलाई को पेश किया जाएगा बजट
बता दें कि संसद का मानसून सत्र 22 जुलाई से शुरू होने वाला है और यह 12 अगस्त तक प्रस्तावित है. मानसून सत्र शुरू होने के एक दिन बाद यानि 23 जुलाई को बजट पेश किया जाएगा. 18वीं लोकसभा के गठन के बाद पहले संसद सत्र में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने हाल ही में नीट विवाद, मणिपुर की स्थिति और महंगाई जैसे मुद्दों को उठाया था. सत्र के दौरान नारेबाजी व शोरगुल के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित हुई थी.

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जवाब के दौरान दोनों सदनों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. लोकसभा में प्रधानमंत्री के जवाब के दौरान विपक्षी सांसदों ने मणिपुर पर बयान देने की मांग करते हुए नारेबाजी की जबकि राज्यसभा में विपक्ष ने बहिर्गमन किया था.

इसी सत्र में बजट होगा पेश

मानसून सत्र के दौरान ही बजट पेश किया जाना है। ये सत्र 22 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलने वाला है। इसी दौरान केंद्र सरकार अपना पूर्ण बजट पेश करेगी। 23 जुलाई को केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने वाली हैं।

बजट से लोगों को काफी उम्मीद

मोदी सरकार 3.0 के पहले बजट से आम लोगों को काफी उम्मीदें है। इस बजट में सरकार मिडल क्लास लोगों के लिए कई बड़े एलान भी कर सकती है। वहीं, हमेशा की तरह सैलरी क्लास लोगों को इनकम टैक्स में छूट की उम्मीद है।

बजट सत्र को मंजूरी

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सरकार की सिफारिश पर बजट सत्र 2024 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय बजट 23 जुलाई को पेश किया जाना है

बजट सत्र में पेश हो सकता है बीमा कानून संशोधन विधेयक

सरकार ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगामी बजट सत्र के दौरान बीमा अधिनियम, 1938 में संशोधन करने वाला विधेयक पेश कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि संशोधन विधेयक में शामिल किए जा सकने वाले कुछ प्रावधानों में समग्र लाइसेंस, पूंजी, सॉल्वेंसी मानदंडों में राहत, कैप्टिव लाइसेंस जारी करना, निवेश नियमों में बदलाव, मध्यवर्तियों के लिए एकमुश्त पंजीकरण और बीमा कंपनियों को अन्य वित्तीय उत्पाद वितरित करने की अनुमति देना शामिल हैं। इस कदम से बैंकिंग क्षेत्र की तरह विभेदित बीमा कंपनियों के प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। जानकारों का कहना है कि नई बीमा कंपनियों से इंश्योरेंस मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लोगों को सस्ते में बीमा मिलेगा।

कंपनियों को बिजनेस बढ़ाने में मदद मिलेगी

बैंकिंग क्षेत्र को इस समय सार्वभौमिक बैंक, लघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक के रूप में वर्गीकृत किया गया है। समग्र लाइसेंस के प्रावधान से जीवन बीमा कंपनियों को स्वास्थ्य बीमा या सामान्य बीमा पॉलिसियों को ‘अंडरराइट’ करने की अनुमति मिलेगी। बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों के अनुसार, जीवन बीमा कंपनियां केवल जीवन बीमा कवर ही दे सकती हैं, जबकि साधारण बीमा कंपनियां स्वास्थ्य, मोटर, आग लगने जैसे गैर-बीमा उत्पाद दे सकती हैं। इरडा बीमा कंपनियों के लिए समग्र लाइसेंसिंग की अनुमति नहीं देता है। ऐसे में एक बीमा कंपनी एक इकाई के रूप में जीवन और गैर-जीवन, दोनों उत्पाद नहीं दे सकती है।

विधेयक का मसौदा तैयार

सूत्रों ने बताया कि विधेयक का मसौदा तैयार है और इसे मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजा जाना है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय को उम्मीद है कि इसे आगामी सत्र में पेश किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित संशोधन मुख्य रूप से पॉलिसीधारकों के हितों को बढ़ावा देने, पॉलिसीधारकों को मिलने वाले प्रतिफल में सुधार करने, अधिक प्रतिभागियों के प्रवेश को सुगम बनाने, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने, बीमा उद्योग की परिचालन और वित्तीय दक्षता बढ़ाने और कारोबारी सुगमता पर केंद्रित हैं। वित्त मंत्रालय ने दिसंबर, 2022 में बीमा अधिनियम, 1938 और बीमा विनियामक विकास अधिनियम, 1999 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित कीं थीं।

 

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