नरेंद्र मोदी 9 जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ से पहले एनडीए के सभी सहयोगी दलों के बीच कैबिनेट की सीटों को लेकर माथपच्ची जारी है। गठबंधन की सभी पार्टियां इसके लिए अपने-अपने फॉर्मूले तैयार कर रही है।
कहीं 4 सांसद पर एक मंत्री पद की डिमांड हो रही है तो कहीं 5 सांसद पर एक मंत्री बनाए जाने की मांग की चर्चा है। इस बीच सूत्रों के हवाले से पार्टियों के पसंद के विभागों के बंटवारे की चर्चा भी तेज है। हालांकि अभी तक किसी भी सहयोगी दलों की तरफ से औपचारिक रूप से किसी प्रकार की कोई घोषणा नहीं की गई है।
इन सब के बीच सभी की निगाहें बिहार पर टिकीं हैं। नीतीश कुमार इस गठबंधन के अहम किरदार हैं। वे 2019 में गठबंधन के साथ होने के बाद भी सांकेतिक रूप से 1 मंत्री पद मिलने से नाराज हो गए थे। इस बार उनकी अहमियत बढ़ी है, लेकिन सांसदों की संख्या 5 घट गई है। ऐसे में वे कितने सीट पर मानते हैं।
नीतीश के अलावा चिराग पासवान ने एक बार फिर से 100% स्ट्राइक रेट के साथ वापसी की है, तो मंत्रालय में उनकी एंट्री भी तय मानी जा रही है। वहीं जीतन राम मांझी भी इस रेस में हैं।
ऐसे में पिछले दो बार से सहयोगियों को सांकेतिक पद देते आ रही बीजेपी क्या बिहार में अपने कोटे की सीटें कम करेगी? क्या बिहार में मंत्री के पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी? इस पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है, लेकिन मंत्री पद के संभावित चेहरों के नाम की चर्चा तेज होने लगी है।
इस बार सांकेतिक भागीदारी नहीं होगी
वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय कहते हैं कि इस बार कैबिनेट के बंटवारे में सांकेतिक प्रतिनिधित्व की जगह भागीदारी होगी। 7 सांसद पर एक मंत्री पद का फॉर्मूला बनता हुआ दिख रहा है। बिहार में अगले एक साल में विधानसभा का चुनाव भी होना है। ऐसे में भाजपा बिहार की अनदेखी नहीं कर सकती है। यहां 6-7 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
अरुण पांडेय कहते हैं कि बिहार में जाति और राजनीति दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। ऐसे में कैबिनेट के चयन में भी जातियों का सामंजस्य बिठाया जाएगा। सवर्ण और ओबीसी के अलावा यहां 36 प्रतिशत आबादी अतिपिछड़ी जाति की है। ऐसे में कैबिनेट में इन्हें भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है। हालांकि, यहां एनडीए की सीटें कम हुई हैं तो पिछले बार की तुलना में इस बार मंत्री पद की सीटें भी कम की जा सकती हैं।
बीजेपी नए चेहरों को दे सकती है मौका
पॉलिटिकल एक्सपर्ट की माने तो बीजेपी गिरिराज सिंह, रवि शंकर प्रसाद, राधा मोहन सिंह जैसे दिग्गजों को कैबिनेट की जगह संगठन में भेज सकती है। वहीं, इनकी जगह ऐसे चेहरे को मौका मिल सकता है, जो लगातार चुनाव तो जीतते आ रहे हैं, लेकिन कैबिनेट में शामिल नहीं हो पाए हैं।
राजीव प्रताप रूडी ने लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य को चुनाव में हराया है। वे एक बार मोदी कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं। इसके कारण उनके नाम की चर्चा जरूर है, लेकिन उन्हें मोदी कैबिनेट से ड्रॉप किया गया था। ऐसे में इस बात की कम ही संभावना है कि उन्हें एक बार फिर से कैबिनेट में शामिल किया जाए।
संजय जायसवाल की हो सकती है एंट्री
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल लगातार चौथी बार पश्चिम चंपारण से चुनाव जीते हैं। अभी तक वे संगठन में रहकर उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। सीनियर लीडर होने के बाद भी उन्हें सरकार में अब तक कोई भूमिका नहीं मिली है।
बिहार में वैश्य का टिकट कटने से पहले इस कम्युनिटी में बड़ी नाराजगी है। ऐसे में इन सभी समीकरणों को साधने के लिए संजय जायसवाल को मंत्री बनाया जा सकता है।
भूमिहार कोटे से विवेक ठाकुर को मिल सकता है मौका
भूमिहार कोटे से अभी तक पार्टी अपने फायर ब्रांड लीडर गिरिराज सिंह को मौका देते आ रही है, लेकिन इस बार विवेक ठाकुर के एंट्री की चर्चा तेज है। ठाकुर नावादा से चुनाव जीते हैं। राज्यसभा सांसद रहते हुए उन्हें पार्टी की तरफ से चुनाव लड़वाया गया है। यूपी विधानसभा चुनाव में भी विवेक ठाकुर को अहम जिम्मेदारी दी गई थी। अमित शाह के करीबी नेता के रूप में इनकी गिनती होती है ऐसे में उनकी एंट्री भी हो सकती है।
राजपूत और ब्राह्मण में भी नए चेहरे हो सकते हैं शामिल
आरके सिंह और अश्विनी चौबे बिहार से दो राजपूत और ब्राह्मण चेहरे थे। जिन्हें लगातार मोदी कैबिनेट में जगह मिल रही थी। इस बार एक चुनाव से पहले बाहर हो गए दूसरे चुनाव हार गए। ऐसे में अब पार्टी नेतृत्व नए चेहरे पर दांव लगाया जा सकती है। ब्राह्मण चेहरे के रूप में दरभंगा से सांसद गोपाल जी ठाकुर के नाम की चर्चा तेज है। वहीं जनार्दन सिंह सिग्रिवाल को राजपूत चेहरे के रूप में जगह मिल सकती है।







