लोकसभा चुनाव 2024 के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में जेल में बंद अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने इसके साथ ही एक और बड़ा निर्देश दिया है। आइए जानते हैं कि कोर्ट ने क्या कहा है।
2जून को करना होगा सरेंडर- कोर्ट
अरविंद केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से 5 जून तक की जमानत की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा- “हमें कोई समान लाइन नहीं खींचनी चाहिए। केजरीवाल को मार्च में गिरफ़्तार किया गया था और गिरफ़्तारी पहले या बाद में भी हो सकती थी। अब 21 दिन इधर-उधर से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 2 जून को अरविंद केजरीवाल सरेंडर करेंगे।”
देश की राजधानी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल बीते एक माह से तिहाड़ जेल में बंद हैं. लंबी पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया था. इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने ED की ओर की गई गिरफ्तारी की वैधता को लेकर कोर्ट में चुनौती दी है. सीएम को ट्रायल कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने लोकसभा चुनाव को लेकर प्रचार के लिए फौरी राहत देने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट में आज उनकी अंतरिम जमानत पर फैसला आ सकता है. आपको बता दें कि दिल्ली में भी लोकसभा की सात सीटों पर वोटिंग होनी है. दिल्ली में आप और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रही हैं.
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था. ED ने गुरुवार को हलफनाम दाखिल कर अंतिरम राहत देने का विरोध किया था. इस पर CM अरविंद केजरीवाल की लीगल टीम ने सुनवाई पूरी होने के बाद हलफनामा दाखिल करने को गलत करार दिया. ED ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिल्ली CM को अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देना ठीक नहीं है. यह न तो संवैधानिक है और न ही मौलिक अधिकार है. वहीं न ही कानूनी अधिकार है. जांच एजेंसी ने हलफनामे में कहा कि सीएम केजरीवाल तो चुनाव भी नहीं लड़ रहे हैं.
ED ने क्या दिए तर्क?
ED ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत को लेकर कहा कि चुनाव लड़ने को लेकर इसे नहीं दिया जा सकता है. ED के अनुसार, किसी राजनेता को आम आदमी से अधिक अधिकार नहीं मिल सकते हैं. इस समय PMLA (मनी लॉड्रिंग रोकथाम कानून) के तहत कई नेता जेल में बंद हैं. अगर अरविंद केजरीवाल को इस तरह से जमानत दी जाती है तो वे सब भी इस तरह की मांग करने लगेंगे. अब तक चुनाव प्रचार के लिए किसी भी राजनेता को अंतरिम जमानत नहीं दी गई है. चुनाव प्रचार को लेकर अंतरिम जमानत देना एक ऐसा उदाहरण पेश करेगा, जिससे नेता गुनाह करके चुनाव की आड़ में जांच से बचने का प्रयास करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक नये हलफनामे में ED ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां राजनीतिज्ञों ने न्यायिक हिरासत में रहते हुए चुनाव लड़ा और कुछ जीते भी, लेकिन चुनाव प्रचार के लिए कभी अंतरिम जमानत नहीं दी गई. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नौ अप्रैल को केजरीवाल की गिरफ्तारी को वैध ठहराया था और कहा था कि बार-बार समन जारी करने और केजरीवाल के जांच में शामिल होने से इनकार करने के बाद ED के पास ‘बहुत ही मामूली विकल्प’ बचा था.







