दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करने वाला है. इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) आज सुप्रीम कोर्ट से गुड न्यूज मिलने को लेकर काफी आशांवित है. दिल्ली के कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि आप को यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार करने की इजाजत देगा.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच सीएम केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कर सकती है. इसे लेकर सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘हमें यकीन है कि इस देश में लोकतंत्र को बचाने और चुनाव प्रणाली की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट निश्चित रूप से अरविंद केजरीवाल को प्रचार करने की अनुमति देगा.’
बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले शीर्ष अदालत से कहा था कि इस मामले में उनकी ‘अवैध गिरफ्तारी’ ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव’ और ‘संघवाद’ पर आधारित लोकतंत्र के सिद्धांतों पर एक अभूतपूर्व हमला है. सीएम केजरीवाल ने कहा कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उनकी गिरफ्तारी का तरीका और समय एजेंसी की ‘मनमानी’ के बारे में बहुत कुछ कहता है. उन्होंने कहा है कि उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई जब चुनाव से संबंधित आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी.
केजरीवाल ने दावा किया कि यह एक ‘प्रमुख मामला’ है कि कैसे केंद्र ने आम आदमी पार्टी (आप) और उसके नेताओं को ‘कुचलने’ के लिए धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी और इसकी व्यापक शक्तियों का दुरुपयोग किया है. इसमें दावा किया गया है कि आम चुनाव की घोषणा होने और आदर्श आचार संहिता लागू होने के पांच दिन बाद ईडी ने एक मौजूदा मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय विपक्षी दलों में से एक के राष्ट्रीय संयोजक को अवैध रूप से ‘पकड़’ लिया. केजरीवाल ने कहा कि समान अवसर ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव’ की एक पूर्ववर्ती जरूरत है, लेकिन उनकी अवैध गिरफ्तारी से इसका स्पष्ट उल्लंघन हुआ है.
बता दें कि ईडी ने 21 मार्च को केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया था, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने से इनकार कर दिया था. वह फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद हैं.
हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल को धनशोधन मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखा था और कहा था कि इसमें कुछ भी अवैध नहीं है. हाईकोर्ट ने कहा कि बार-बार समन जारी करने और जांच में शामिल होने से इनकार करने के बाद ईडी के पास ‘कम विकल्प’ बचे थे. यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्यन में कथित भ्रष्टाचार और धनशोधन से संबंधित है, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था.







