पहले चरण में लोकसभा चुनाव को लेकर औरंगाबाद में वोटरों में उत्साह देखा जा रहा है। मतदाता कतारों में लग कर मतदान कर रहे हैं। यहां दोपरहर 1 बजे तक 29.6% वोटिंग हुआ है।
औरंगाबाद सूर्य का प्रसिद्ध मंदिर देव में है। यहां बूथ नंबर 281 और 282 पर वोट देने पहुंचे लोगों ने कहा कि दुनिया में प्रसिद्ध सूर्य का मंदिर यहां है। लेकिन पर्यटन का विकास जिस तरह से यहां होना चाहिए आज तक सरकार ने नहीं किया। छठ के समय यहां कई तरह की समस्याओं से लोगों को गुजरना पड़ता है। पेयजल नहीं मिल पाता। शौचालय की समस्या रहती है। सड़क चौड़ी नहीं है। लोग चाहते हैं कि इन तमाम समस्याओं का निपटारा सरकार करें।

सुबह से कतार में दिखे मतदाता
शहर के रामलखन सिंह यादव काॅलेज बूथ नंबर 283 पर सुबह से महिलाएं और पुरुष कतार में वोटिंग के लिए खड़े दिखे। औरंगाबाद के ज्यादातर विधान सभा क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहे हैं। इसलिए इस पर चुनाव आयोग सहित प्रशासन की कड़ी नजर है। जिले में सुबह 9 बजे तक 6.01% वोटिंग हुई।
मतदान करने बूथ पर पहुंची महिलाओं ने कहा कि हम चाहते हैं हमारे इलाके का विकास हो। मतदान केन्द्र पर वोटिंग को लेकर महिलाओं में उत्साह देखा जा रहा है। एक पोता अपनी दिव्यांग दादी को वोट दिलाने के लिए गोद में उठाकर पहुंचा।

औरंगाबाद में 2,039 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं
औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा हैं। इसमें औरंगाबाद में शाम 6 बजे तक वोटिंग होगी जबकि कुटुंबा,रफीगंज, गुरुआ, इमामगंज और टेकरी में शाम 4 बजे तक ही वोटिंग होगी। यानी ये इलाके नक्सल प्रभावित माने गए हैं। औरंगाबाद में कुल 2039 बूथ बनाए गए हैं।

राजपूत वोट बैंक निर्णायक
औरंगाबाद लोकसभा सीट सवर्ण जातियों में आने वाली राजपूत जाति के लिए प्रतिष्ठा की सीट बनी हुई है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने यहां कुशवाहा कार्ट खेलकर चक्रव्यूह तैयार करने की कोशिश की है। कुशवाहा कार्ड से वे गया लोकसभा को भी साधना में लगे हैं। औरंगाबाद में राजपूतों का कब्जा रहा है। इसलिए इसे मिनी चित्तौड़गढ़ भी माना जाता है। राजपूत वोट बैंक निर्णायक जीत-हार में यहां निर्णायक हैं।
तीन बार से सांसद रहे हैं सुशील सिंह
यहां से तीन बार से सांसद रहे बीजेपी कैंडिडेट सुशील कुमार सिंह के विरोध में एंटी इनकंबेंसी काफी है। दूसरी तरफ आरजेडी ने जेडीयू छोड़ कर आए अभय कुशवाहा को यहां से उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस के पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार यहां से चुनाव लड़ना चाह रहे थे लेकिन यह सीट राष्ट्रीय जनता दल के कोटे में चली गई। इसलिए निखिल कुमार की नाराजगी काफी रही। 2004 के लोकसभा चुनाव में निखिल कुमार ने जेडीयू के सुशील कुमार सिंह को 7460 वोटों से पराजित किया था। देव के सूर्य मंदिर से औरंगाबाद की बड़ी सांस्कृतिक पहचान है।







