पाकिस्तान की आवाम को लग रहा था कि नई सरकार बनने के बाद देश के हालात ठीक हो जाएंगे. 8 फरवरी 2024 को आम चुनाव हुए और जब नतीजों की घोषणा हुई तो पाकिस्तान के लिए नई मुसीबत सामने आ गई है. किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला. नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन और बिलावल की पार्टी पीपीपी के बीच गठबंधन की बात हो रही है लेकिन कोई फैसला नहीं हो पा रहा है.
इस बीच पाकिस्तान में नया विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल एक पूर्व अधिकारी ने आरोप लगाया है कि इमरान खान की पार्टी पीटीआई को धांधली करके हराया गया है. इस खेल में मुख्य चुनाव आयुक्त और प्रधान न्यायाधीश भी शामिल हैं. इस खुलासे के बाद पीटीआई के कार्यकर्ता दोनों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
दरअसल रावलपिंडी के पूर्व कमिश्नर लियाकत अली छित्ता ने दावा किया है कि उनके ही इलाके में करीब 13 सीटों पर हारे हुए प्रत्याशियों को जिता दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान रजा और प्रधान न्यायाधीश काजी फैज ईसा भी शामिल हैं.
लियाकत अली छित्ता ने कहा कि उन्होंने अंतरात्मा की आवाज सुनकर इस पूरी धांधली का खुलासा किया है. छित्ता ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि वो इस पूरे कांड की जिम्मेदारी लेते हैं. उनके ही इलाके में रावलपिंडी इलाके की 13 सीटों के परिणाम बदले गए हैं.
द डॉन में छपी खबर के मुताबिक, लियाकत अली छित्ताने कहा कि इस तरह की धांधली कई ऑफिस में चल रही है. एक प्रत्याशी 70 हजार वोटों से आगे चल रहा था, लेकिन जब नतीजा आया तो उसे हारा हुआ घोषित कर दिया गया. निर्दलीय प्रत्याशियों को भी फेक स्टांप्स का इस्तेमाल करके हरवा दिया गया. बता दें कि निर्दलीय प्रत्याशी पीटीआई समर्थित हैं.
पूर्व कमिश्नर ने कहा- देश की पीठ पर छुरा भोंक दिए जाने के बाद मैं रात भर सो नहीं सका था. एक बार मेरे मन में आत्महत्या का भी ख्याल आया था, लेकिन फिर सोचा कि इसका खुलासा देश की जनता के साथ किया जाना चाहिए.
पाकिस्तान में इस खुलासे के बाद से हड़कंप मच गया है. आर्थिक बदहाली झेल रहे पाकिस्तान को एक स्थिर सरकार की जरूरत है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि ये देश एक बार फिर चुनाव के दरवाजे पर खड़ा है.
छित्ता गिरफ्तार, ऑफिस सील
रावलपिंडी के पूर्व कमिश्नर ने चुनाव में हुई गड़बड़ी की पोल खोलने के बाद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है. उनके इस्तीफे के बाद ऑफिस सील कर दिया गया है. पाकिस्तान के अखबार द डॉन से बातचीत में एक स्थानीय अधिकारी ने बताया है कि ऑफिस को इसलिए सील किया गया है ताकि रिकॉर्ड से कोई छेड़छाड़ न कर पाए.
वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि कमिश्नर को गिरफ्तार नहीं किया गया है क्योंकि उनके खिलाफ कोई केस नहीं है, लेकिन कस्टडी में जरूर लिया गया है. फिलहाल छित्ता को किसी अज्ञात जगह पर रखा गया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त और सीजेआई ने आरोपों को नकारा
पाकिस्तान की राजनीति को पूरी तरह से हिलाकर रख देने वाले इस खुलासे पर प्रधान न्यायाधीश और मुख्य चुनाव आयुक्त ने आरोपों को नकार दिया है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव से जुड़ी याचिकाओं को निपटाता है, उसका चुनाव से कोई मतलब नहीं है.
चुनाव आयोग ने बनाई जांच कमेटी
छित्ता के आरोपों को चुनाव आयोग ने नकार दिया है, लेकिन पूरे मामले की जांच के लिए एक जांच समिति बैठा दी है. चुनाव आयोग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि न तो कमिश्नर और न ही कोई अधिकारी चुनाव कराने में सीधा रोल निभाते हैं. फिलहाल पूछताछ के लिए एक समिति बना दी गई है.
किसकी बन रही सरकार?
पाकिस्तान की मीडिया के हवाले से खबर है कि नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन और बिलावल भुट्टो की पार्टी पीपीपी के बीच आखिरी दौर की बातचीत चल रही है. अगर इस बार कोई नतीजा नहीं निकला तो आगे कोई बातचीत नहीं होगी. नतीजों को देखें इमरान खान की पार्टी पीटीआई के समर्थित 73 निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं. कुल 93 निर्दलीय सांसद बने हैं. इसके बाद नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के 75 और बिलावल की पार्टी पीपीपी के 54 प्रत्याशी जीते हैं. इसके अलावा एमक्यूएम-पी ने भी 17 सीटें जीती हैं. सरकार बनाने के लिए बहुमत 133 सीटें होनी चाहिए.
अब तक क्या-क्या हुआ, 3 प्वाइंट में समझिए
1. पीएमएल-एन की ओर से शहबाज शरीफ को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद के लिए आगे किया है. शहबाज पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई हैं. इमरान के सत्ता से हटने के बाद शहबाज शरीफ ही प्रधानमंत्री बनाए गए थे. इससे पहले वो पंजाब प्रांत के गवर्नर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
2. नवाज शरीफ की बेटी मरयम नवाज का नाम पंजाब के सीएम के तौर पर पार्टी ने आगे किया है. अगर गठबंधन हो जाता है तो मरयम नवाज पंजाब प्रांत की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी.
3. आसिफ अली जरदारी को राष्ट्रपति बनाने का भी प्लान है. पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भु्ट्टो के पति और बिलावल भुट्टो के पिता आसिफ अली जरदारी पहले भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं. हालांकि, जरदारी और नवाज शरीफ के बीच अच्छे रिश्ते कभी नहीं रहे हैं. जरदारी कई बार नवाज शरीफ पर खुद की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगा चुके हैं.
कब तक बन चाहिए सरकार
पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक सरकार बनाने की प्रक्रिया 29 फरवरी के पहले खत्म हो चाहिए.अगर ऐसा नहीं होता है तो दोबारा चुनाव कराने की भी नौबत आ सकती है.
कहां फंसा है पेच?
पाकिस्तान की मीडिया में आ रही खबरों को मानें तो पीपीपी और नवाज की पार्टी के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. पीपीपी ने सरकार से अभी तक किसी मंत्रालय के बारे में नहीं पूछा है जैसा कि उसका शुरू से ही रुख है. वो पंजाब प्रांत में हिस्सेदारी मांग रही है, लेकिन पीएमएल-एन इस पर बात मानने से इनकार कर दिया है. इसके अलावा पीपीपी ने नेशनल असेंबली स्पीकर के पोस्ट की भी मांग की है.







