अमेरिका और ब्रिटेन ने गुरुवार (11 जनवरी) की रात ईरान समर्थित हूती समूह के लगभग 28 ठिकानों पर हमला किया है. इसके बाद अगले दिन शुक्रवार (12 जनवरी) को अमेरिका ने हूती के छोटे दायरे वाले क्षेत्र में हमला किया. इस दौरान अमेरिका ने हूती के रडार सुविधा को निशाना बनाया. ये सारे हमले लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हूती के हमलों की प्रतिक्रिया में किए गए थे. इस हमले के दौरान बेहद खतरनाक मंजर हो गया था. हर तरफ धुआं, आग और तबाही साफ दिख रही थी.
अमेरिका और यूके के हमले के बाद ईरान समर्थित हूती ने उग्रवादियों ने चेतावनी दी कि अमेरिका और ब्रिटेन की तरफ से यमन में समूह के खिलाफ हमले शुरू करने के बाद वे जवाबी कार्रवाई करेंगे. हूती अधिकारियों ने जवाबी प्रतिक्रिया में ब्रिटेन और अमेरिका को चेतावनी दी है कि उन्हें ‘भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
हूती ने लाल सागर में जहाजों पर किया हमला
इजरायल और गाजा के बीच जारी युद्ध के दौरान हूती ने लाल सागर में जहाजों पर हमला शुरू कर दिया है. इस दौरान उन्होंने भारत के जहाज पर भी हमला किया था और लोगों को पकड़ लिया था. इसके बाद भारत की ओर से मर्कोस कंमाडों ने जा कर सभी लोगों को छुड़ा लिया. वहीं इजरायल-हमास युद्ध की वजह से लेबनान में मौजूद हूती और हिजबुल्लाह भी जंग में शामिल हो गए और इजरायल के सहयोगी देशों के जहाजों को निशाना बनाने लगे.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की चेतावनी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने शुक्रवार को कहा कि यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों के खिलाफ अमेरिका के साथ मिलकर किया गया संयुक्त हवाई हमला आत्मरक्षा के लिए आवश्यक था. नवंबर 2023 से लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय नौवहन को निशाना बना रहे हूती के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाला यह पहला हमला है. सुनक ने ईरान समर्थित समूह पर ब्रिटेन के जहाजों को धमकी देने का आरोप लगाया.
अमेरिकी वायुसेना ने कहा कि यमन में हूती की तरफ से इस्तेमाल किए गए 16 स्थानों पर 60 से अधिक ठिकानों पर हमला किया गया. सुनक ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बार-बार चेतावनियों के बावजूद, हूती ने लाल सागर में हमले जारी रखा है, जिसमें इस सप्ताह ब्रिटेन और अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले भी शामिल हैं.’’
अमेरिकी सेना ने दो दर्जन से ज्यादा स्थानों को बनाया निशाना
इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका ने ब्रिटेन के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया और हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर बम गिराए. इस दौरान दोनों देशों के सेनाओं ने 28 स्थानों पर हूती विद्रोहियों के 60 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद अमेरिका ने अपने व्यापारिक जहाजों को अहवे कुछ दिनों तक लाल सागर में न जाने की सलाह दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने हूतियों पर किए गए हवाई हमले की पुष्टि की.
हूती विद्रोहियों ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिका के हमलों के बाद हूती विद्रोहियों ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. हूती सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याहया सारी ने एक बयान जारी किया. जिसमें सारी ने कहा कि अमेरिका को इन हमलों की सजा मिलेगी. उधर अमेरिका ने कहा कि उसने हवाई हमलों में हूती विद्रोहियों के उन ठिकानों को ही निशाना बनाया जहां जनसंख्या ज्यादा नहीं थी. इस एयरस्ट्राइक के दौरान अमेरिका ने हूतियों के हथियारों, रडार और अहम ठिकानों को निशाना बनाया. हालांकि इन हवाई हमलों में ज्यादा लोगों के मारे जाने की संभावना कम है.
लाल सागर में जहाजों को निशाना बना रहे हैं हूती विद्रोही
बता दें कि हूती विद्रोही ईरान समर्थित हैं. जो इजरायल हमास युद्ध के बाद से लगातार लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को अपना निशाना बना रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी नौसेना ने कई बार हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने में कामयाबी पाई है. बावजूद इसके हूती विद्रोही व्यापारिक जहारों को अपना निशाना बना रहे हैं. जिसके चलते इंटरनेशन शिपिंट रूट पर मालवाहक जहाजों की आवाजाही में कमी आई है. इसी के चलते अमेरिका हूती विद्रोहियों के ठिकानों को निशाना बना रहा है.







