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ED की कार्रवाई कितनी राजनीतिक? 5 राज्यों के विपक्षी नेता ED के रडार पर………….

UB India News by UB India News
January 5, 2024
in खास खबर
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ED की कार्रवाई कितनी राजनीतिक? 5 राज्यों के विपक्षी नेता ED के रडार पर………….

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देश में लोकसभा चुनाव के लिए कुछ ही महीनों का वक्त बचा है. इससे पहले दो मुख्यमंत्री और कई बड़े विपक्षी नेता केंद्रीय एजेंसी ED के निशाने पर हैं. ईडी लगातार इन नेताओं से पूछताछ के लिए समन भेज रही है.

चुनाव से पहले अगर किसी बड़े विपक्षी नेता की गिरफ्तारी हो जाए तो कितनी सीटों पर असर होगा, यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राजनीतिक स्थिति में बदलाव आ सकता है. जब किसी नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसके खिलाफ चुनावी प्रचार में बदलाव आता है और उसकी पार्टी को इससे नुकसान हो सकता है.

पांच राज्यों के बड़े विपक्षी नेताओं पर ईडी का शिकंजा कसा हुआ है. अगर किसी विपक्षी नेता की गिरफ्तारी होती है तो इसका लोकसभा की 151 सीटों पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है. इनमें दिल्ली की 7, झारखंड की 14, पश्चिम बंगाल की 42, महाराष्ट्र की 48 और  बिहार 40 सीटें शामिल हैं.

यही नहीं, 206 लोकसभा सीटों पर सीधे बीजेपी-कांग्रेस में टक्कर की संभावना है. आइए जानते हैं सेंट्रल एजेंसी तमाम विपक्षी नेताओं पर क्यों शिकंजा कस रही है, उन नेताओं पर क्या आरोप हैं, अगर गिरफ्तारी होती है तो कितनी सीटों पर पड़ेगा असर. 

दो मुख्यमंत्रियों पर गिरफ्तारी की तलवार
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. दोनों ही नेता अपनी गिरफ्तारी का दावा कर रहे हैं.

केंद्रीय एजेंसी ED कथित शराब घोटाला मामले में मुख्यमंत्री केजरीवाल को अबतक तीन बार और मनी लॉन्ड्रिंग के जुड़े मामले में हेमंत सोरेन को सात बार समन भेज चुकी है. मगर दोनों सीएम अभी तक ईडी के सामने पेश नहीं हुए.

दोनों ही नेता समन को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं और केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव की तैयारी से पहले गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है ताकि मुख्यमंत्री चुनाव प्रचार न कर सकें.

अरविंद केजरीवाल ने ईडी के समन को ‘गैरकानूनी’ बताते हुए एजेंसी की मंशा पर सवाल उठाया. समन पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में राज्यसभा चुनाव है पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के नाते वह बिजी हैं और मुख्यमंत्री होने के नाते 26 जनवरी की तैयारी में भी लगे हैं. लेकिन अगर जांच एजेंसी सवालों की कोई फेहरिस्त भेजना चाहे तो उनका जवाब देंगे.

दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों पर फंसेगा पेंच
अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के संयोजक और स्टार प्रचारक हैं. दिल्ली और पंजाब में उनकी पार्टी की सरकार है. कुछ महीने बाद देश में लोकसभा चुनाव होना है. दिल्ली में लोकसभा की 7 सीटें हैं मगर अभी सभी सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. केजरीवाल पूरी कोशिश में हैं कि इस बार लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकें.

बीजेपी के तमाम नेता केजरीवाल को कट्टर बेईमान बता रहे हैं. इसका असर लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है. आम आदमी पार्टी का अभी इंडिया गठबंधन के साथ सीट शेयरिंग पर बात फाइनल नहीं हुई है. ऐसे में पार्टी को मोलभाव करने में दिक्कत हो सकती है.

दूसरी ओर दिल्ली शराब घोटाला मामले में पार्टी के दो बड़े नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह पहले ही जेल में हैं.

झारखंड के सीएम निशाने पर, यहां लोकसभा की 14 सीटें
अब बात करते हैं ईडी के शिकंजे में फंसे दूसरे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की. कथित अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के जुड़े मामले में ईडी हमेंत सोरेन के करीबियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है. इस कारण झारखंड की राजनीति में इस वक्त काफी उठापठक चल रही है.

राज्य की 81 विधानसभा सीटों पर इसी साल के अंत में चुनाव होने हैं. वहीं लोकसभा की 14 सीटें हैं. इनमें 11 सीटों पर अभी बीजेपी का कब्जा है.

अगर सोरेन की गिरफ्तारी हो जाती है तो लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव में उनकी पार्टी भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. इससे सबसे बड़ा फायदा बीजेपी को होगा. बीजेपी सोरेन पर लगातार वंशवाद को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है. उधर अभी इंडिया गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर स्थिति साफ नहीं है.

विपक्षी पार्टियों के ये बड़े नेता भी ईडी की रडार पर
इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल के अनुसार, साल 2014 से मार्च 2023 तक नेताओं के खिलाफ ईडी का एक्शन पहले चार गुना बढ़ गया है. इन नौ सालों में 121 प्रमुख राजनेता जांच दायरे में आए. इनमें 95 फीसदी यानी कि 115 नेता विपक्षी हैं.

वहीं यूपीए शासन में 2004 से 2014 तक कुल 26 नेता जांच दायरे में आए, जिनमें 54 फीसदी यानी कि 14 विपक्ष के थे.

प्रमुख विपक्षी नेता जिन पर पिछले 9 सालों में ईडी शिकंजा कसा है उनमें राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव, संजय राउत, अभिषेक बनर्जी, जंयत पाटिल, राघव चड्ढा, पी चिदंबरम, डीके शिवकुमार शामिल हैं.

सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर धोखाधड़ी का आरोप
साल 1938 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और दूसरे कांग्रेसी नेताओं ने मिलकर एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (Associate Journal Limited) नाम से एक कंपनी बनाई थी. ये कंपनी नेशनल हेराल्ड नाम से एक अखबार छापती थी, इसलिए इसे सरकार की ओर से बड़े शहरों में सस्ते दाम पर जमीनें मिली थी.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेसी नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने ये सरकारी जमीन अपने नाम करने के लिए यंग इंडिया लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई. साल 2011  में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया लिमिटेड ने केवल 50 लाख रुपये चुकाकर एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड को टेकओवर कर लिया. इस तरह वह 2 हजार करोड़ रुपये की संपति के मालिक बन गए.

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सबसे पहले धनशोधन का यह मामला उठाया था. साल 2013 में स्वामी ने गांधी परिवार के खिलाफ एक अदालत में धोखाधड़ी और धन के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद से ईडी मामले की जांच कर रही है. मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी पूछताछ की जा चुकी है. कांग्रेस के करीब 20 नेता जांच एजेंसी के घेरे में हैं.

लोकसभा में बीजेपी-कांग्रेस में सीधे 206 सीटों पर टक्कर
चुनाव से पहले अगर राहुल गांधी पर ईडी अपना शिकंजा कसती है तो कांग्रेस पार्टी पर बहुत बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि राहुल ही पार्टी का मुख्य चेहरा हैं. मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी अध्यक्ष हैं. कांग्रेस अभी तीन राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश पर शासन कर रही है.

2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 206 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि 52 सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की थी. कांग्रेस के किसी भी नेता गिरफ्तारी पर 206 सीटों पर पार्टी को इस बार भी चुनाव में नुकसान झेलना पड़ सकता है.

जमीन के बदले नौकरी मामले में फंसे तेजस्वी
बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी पर जमीन के बदले रेलवे में सरकारी नौकरी देने का आरोप है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि यूपीए सरकार के दौरान साल 2004 से 2009 तक रेल मंत्री के रूप में लालू यादव के कार्यकाल के दौरान नियम-कानूनों का उल्लंघन करते हुए और बिना किसी पब्लिक सूचना के अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को नौकरी की गई.

रेलवे में नौकरी पाने के लिए उम्मीदवारों ने यादव परिवार के कुछ सदस्यों को काफी कम कीमत पर जमीन बेची. इस कथित भूमि घोटाला मामले में नई चार्जशीट दाखिल होने के बाद 4 अक्टूबर 2023 को अदालत ने तेजस्वी यादव, लालू यादव, राबड़ी देवी और अन्य को जमानत दे दी थी. ईडी तीनों नेताओं को कई बार समन भेजकर पूछताछ के लिए बुला चुकी है.

गिरफ्तारी से कितनी लोकसभा सीटों पर नुकसान? 
तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में विपक्ष के मुखर नेता और देश के सबसे युवा विपक्षी नेता हैं. महज 26 साल की उम्र में उन्हें बिहार का उप मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. हालांकि इस वक्त बिहार की राजनीति में जबरदस्त हलचल है.

बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है कि लालू यादव 14 जनवरी से पहले तेजस्वी यादव को राज्य का मुख्यमंत्री बनवा देंगे. नीतीश कुमार को ये समझाने की कोशिश की जा रही है कि वह मुख्यमंत्री बहुत रह लिए, अब उन्हें प्रधानमंत्री होना चाहिए.

बिहार में लोकसभा की 40 सीटे हैं. फिलहाल अभी आरजेडी के पास एक भी सीट नहीं है. पिछले चुनाव में जब सीएम नीतीश कुमार बीजेपी के साथ थे तो गठबंधन ने 40 में से 39 सीटें जीती थी. एक सीट कांग्रेस को मिली थी.

इंडिया गठबंधन में शामिल आरजेडी इस बार 8 से 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है लेकिन अगर ईडी का शिकंजा कसता है तो इन सीटों पर पार्टी को नुकसान झेलना पड़ सकता है.

पात्रा चॉल जमीन घोटाले में संजय राउत का कनेक्शन!
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत को अगस्त 2022 में पात्रा चॉल जमीन घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में 9 घंटे तक पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था. फिलहाल वह जमानत पर हैं. आरोप है कि चॉल जमीन घोटाला मामले में करीब 1034 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है.

महाराष्ट्र आवास विकास प्राधिकरण (MHADA) ने साल 2007 में संजय राउत के रिश्तेदार प्रवीण राउत की गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी को गोरेगांव के सिद्धार्थ नगर स्थित पात्रा चॉल के री-डेवलपमेंट का काम दिया था.

यहां 47 एकड़ जमीन पर पहले ही 672 घर बने थे. कंपनी को 3500 से ज्यादा फ्लैट बनाकर देने थे. फ्लैट्स बनाने के बाद बची हुई जमीन को प्राइवेट डेवलपर्स को बेचा जाना था. लेकिन 14 साल बीत जाने के बाद भी जब लोगों को फ्लैट बनाकर नहीं दिए गए तो पीड़ितों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

उद्धव ठाकरे की पार्टी के सेनापति हैं राउत!
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत राज्यसभा से सांसद हैं. उन्हें उद्धव ठाकरे का बेहद करीबी माना जाता है. शिवसेना यूबीटी संजय राउत को आगामी लोकसभा चुनाव में उतार सकती है.

वह मुंबई की नार्थ ईस्ट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. उद्धव ठाकरे की पार्टी में जून 2022 में बड़ी बगावत हुई थी. उनकी पार्टी के कई विधायक और सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए थे. उस सबसे मुश्किल में भी राउत उद्धव ठाकरे के खड़े रहे थे.

महाराष्ट्र में लोकसभा की कुल 48 सीटें हैं. इनमें अभी सबसे ज्यादा 23 सीटें बीजेपी के पास है. 18 सीटें शिवसेना ने जीती थीं. शिवसेना यूबीटी इंडिया गठबंधन में शामिल हैं. गठबंधन में सीटों का बंटवारा होने के बाद शिवसेना यूबीटी आगामी लोकसभा में 20-25 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है.

कार्ति चिदंबरम पर 250 चीनियों को वीजा देने का आरोप
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट से सांसद हैं. शिवगंगा सीट कार्ति के पिता पी. चिदंबरम की रही है. 1999 को छोड़कर 1984 से 2009 तक पी चिदंबरम का इस सीट पर कब्जा रहा है.

कार्ति साल 2012 में तब चर्चा में आए जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उन पर एयरसेल मैक्सिस डील में फायदा उठाने का आरोप लगाया था.

कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब में एक बिजली परियोजना पर काम करने के लिए 263 चीनी नागरिकों को वीजा दिलाया, जिसके लिए 50 लाख रुपये लिए गए. इस मामले पर सीबीआई भी पहले कार्यवाई कर चुकी है. अब ईडी ने मामले में शिकंजा कसना शुरू कर दिया है.

ये बात 2011 की है जब वेदांता ग्रुप की कंपनी पंजाब में चीनी कंपनी की मदद से 1980 मेगावॉट का थर्मल पॉवर प्लांट लगा रही थी. प्रोजेक्ट पहले ही काफी लेट था. प्लांट समय पर चालू करने के लिए एक्सपर्ट की जरूरत थी.

आरोप है कि इसके लिए कंपनी के एक अधिकारी ने कार्ति के करीबी से संपर्क किया. इसके बाद कंपनी ने गृह मंत्रालय को लेटर लिखा और एक महीने के भीतर कुल 263 प्रोजेक्ट वीजा जारी कर दिए गए.

इस काम में नियमों की अनदेखी हुई. ये भी आरोप है कि इस काम के लिए 50 लाख रुपये रिश्वत मांगी गई. जिसे कंपनी ने एक फर्जी बिल के जरिए चेन्नई भेजा गया.

अभिषेक बनर्जी पर शिक्षक भर्ती घोटाले का आरोप
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी ईडी के रडार पर हैं. पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले के सिलसिले में टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा से ईडी कई बार पूछताछ कर चुकी है.

सेंट्रल एजेंसी का दावा है कि जब लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कोलकाता दफ्तर पर छापेमारी की गई तो वहां से संदिग्ध लेन-देन वाले दस्तावेज हाथ लगे हैं.

अभिषेक बनर्जी इस कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (अप्रैल 2012 से जनवरी 2014) रह चुके हैं. इस कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) सुजय कृष्ण भद्र को एजेंसी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. मामले में अबतक 126 करोड़ से ज्यादा रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.

सेंट्रल एजेंसी ईडी का कहना है कि शिक्षक घोटाले से अर्जित किया गया अच्छा-खासा पैसा अपनी कंपनी में निवेश किया गया. ईडी के पास इसके तमाम सबूत हैं. हालांकि अभिषेक बनर्जी ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में ममता बनर्जी के बाद दूसरे नंबर पर अभिषेक बनर्जी आते हैं. पार्टी और बंगाल में उनका अच्छा खासा रुतबा है. आने वाले समय में अभिषेक पार्टी में ममता बनर्जी की जगह ले सकते हैं.

पार्टी की लोकसभा सीटों पर भी अच्छी पकड़ है. राज्य की 48 में से 22 सीटों पर टीएमसी का राज है. ऐसे में चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी से पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

केंद्र पर जांच एजेंसी के दुरुपयोग का आरोप
ये सभी विपक्षी नेता केंद्र सरकार पर जांच एजेंसी के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं. राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं. खुद पर लगे सभी आरोपों को झूठा बता रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि ये बदले की कार्रवाई है और ये सिर्फ विपक्षी नेताओं पर होती है, बीजेपी के किसी नेता पर कुछ एक्शन नहीं लिया जाता है.

चुनाव से पहले सिर्फ विपक्ष को बदनाम करने के लिए जांच एजेंसी एक्टिव हो जाती है.

वहीं बीजेपी नेता कहते हैं कि एजेंसी अपना काम कर रही है, इसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है. पीएम नरेंद्र मोदी भी अपने भाषणों में अक्सर विपक्ष खासकर कांग्रेस पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते रहे हैं. पीएम मोदी ने एक भाषण में कहा था कि वह न तो खाएंगे न और खाने देंगे.

ED की कार्रवाई कितनी राजनीतिक?
प्रवर्तन निदेशालय पर विपक्ष पक्षपात करने का आरोप लगाता रहता है. कुछ विपक्षी नेताओं ने सेंट्रल एजेंसी को बीजेपी की कठपुतली भी कहा है. इन आरोपों पर प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व संयुक्त सचिव सत्येंद्र सिंह कहते हैं कि अगर एजेंसी कार्रवाई करती है तो इसका मतलब शुरुआती जांच के आधार पर उनके पास कुछ न कुछ सबूत है. अगर उन्हें यह कार्रवाई गलत लगती है तो सभी नेताओं के पास अदालत जाकर अपनी बात रखने का विकल्प है. वहां अपना पक्ष रख सकते हैं.

सत्येंद्र सिंह ने ये भी कहा कि चुनाव से पहले ईडी की कार्रवाई कोई नई बात नहीं है, ऐसा पहले भी हुआ है. साल 2014 से पहले भी सेंट्रल एजेंसी ने विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई की थी. तब आंकड़े भले ही कम थे लेकिन क्या वो चुनावी एक्शन था?

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