देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज जयंती है. इस मौके पर पीएम मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत तमाम राजनेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. अटल बिहारी वाजपेयी की 99वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल स्मारक’ पहुंचे. जहां उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी. पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर बीजेपी देशभर में पार्टी मुख्यालयों पर श्रद्धांजलि सभा और कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है. इस मौके पर राजधानी दिल्ली के सदैव अटल स्मारक पर भी तमाम राजनेता पूर्व पीएम को श्रद्धांजलि देने पहुंचे.
पीएम मोदी ने X पर लिखा- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी जयंती पर देश के सभी परिवारजनों की ओर से मेरा नमन। वे जीवनपर्यंत राष्ट्र निर्माण को गति देने में जुटे रहे। मां भारती के लिए उनका समर्पण और सेवा भाव अमृतकाल में भी प्रेरणास्रोत बना रहेगा। इसके साथ ही मोदी ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उनकी पुरानी तस्वीरें लगाई गई थीं।
बीजेपी अध्यक्ष ने भी दी श्रद्धांजली
अटल बिहारी बाजपेयी की 99वीं जयंती के अवसर पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी सदैव अटल स्मारक पहुंचे और पूर्व पीएम बाजपेयी को श्रद्धांजलि दी. इनके अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सदैव अटल पर पूर्व पीएम को श्रद्धांजलि दी.
अमित शाह ने अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर उनका स्मरण कर उन्हें नमन करता हूं। अटल जी ने निःस्वार्थ भाव से देश व समाज की सेवा की और भाजपा की स्थापना के माध्यम से देश में राष्ट्रवादी राजनीति को नई दिशा दी। जहां एक ओर उन्होंने परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध में विश्व को उभरते भारत की शक्ति का एहसास करवाया, तो वहीं दूसरी ओर देश में सुशासन की परिकल्पना को चरितार्थ किया। उनके विराट योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।
वाजपेयी ने 3 बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी
जवाहर लाल नेहरू के बाद अटलजी पहले नेता थे, जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 25 दिसंबर 1924 में जन्मे अटलजी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान राजनीति में आए। 1951 में भारतीय जनसंघ के गठन में भी उनकी अहम भूमिका रही।
उन्होंने 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में लखनऊ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे चुनाव हार गए। अटलजी को अपने राजनीतिक करियर की पहली सफलता 1957 में मिली। इस साल वे लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से लोकसभा चुनाव में उतरे। इन तीन में से दो सीट पर वे चुनाव हार गए, लेकिन बलरामपुर से उन्हें जीत मिली। इस तरह वाजपेयी का संसदीय सफर शुरू हुआ।
इमरजेंसी के बाद जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी तब वाजपेयी ने विदेश मंत्री का पद संभाला। विदेश मंत्री बनने के बाद वाजपेयी पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को हिंदी में संबोधित किया।

अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे। पहली बार 1996 में वह 13 दिन के लिए PM बने। दूसरी बार वह 1998 में PM बने और 13 महीने तक पद पर रहे। 13 अक्टूबर 1999 को उन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और कार्यकाल पूरा करने वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।
अटल जी के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए, जिनका फायदा देश को आज भी मिल रहा है। उनकी सरकार के फैसले की वजह से कभी 17 रुपए प्रति मिनट कॉलिंग वाले मोबाइल से फ्री कॉलिंग तक का दौर आना संभव हो पाया। उनकी सरकार ने टेलीकॉम फर्म्स के लिए फिक्स्ड लाइसेंस फीस को खत्म कर दिया और उसकी जगह रेवेन्यू शेयरिंग की व्यवस्था शुरू की। 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका निधन हो गया।

अटल सरकार में ही 15 सितंबर 2000 को भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) का गठन किया। इसके अलावा टेलीकॉम सेक्टर में होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए 29 मई 2000 को टेलीकॉम डिस्प्यूट सेटलमेंट अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) का भी गठन किया। देश के चारों महानगरों को जोड़ने के लिए उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज योजना शुरू की।
अटल जी को 1992 में पद्म विभूषण और 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। अटल जी का 93 साल की उम्र में 16 अगस्त 2018 को निधन हुआ था।
मोदी सरकार ने दिया भारत रत्न, घर जाकर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब ने दिया था सम्मान
अटल बिहारी वाजपेयी देश के उन नेताओं में से एक रहे जिन्हें पार्टी के दायरे के बाहर सभी से सम्मान मिला था. बावजूद इसके 2014 के दिसंबर में अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने का ऐलान किया गया. मार्च 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रोटोकॉल तोड़ा और अटल जी को उनके घर जाकर भारत रत्न से सम्मानित किया था.







