मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में जेडीयू और कांग्रेस में गठबंधन नहीं हो पाया और जदयू ने प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है. जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, दो सीटों पर जेडीयू -कांग्रेस में बात चल रही थी. जेडीयू को उम्मीद थी कि कांग्रेस दो सीट जेडीयू के लिए छोड़ेगी, लेकिन कांग्रेस ने दो सीट नहीं छोड़ी जिसके बाद जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतारे. बताया जा रहा है कि जदयू कुल 15 उम्मीदवार तक उतार सकती है.
बता दें कि जदयू ने मध्य प्रदेश में पांच उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी और इसके लिए मध्य प्रदेश के प्रदेश जदयू अध्यक्ष को अधिकृत किया गया था. उनको यह तय करना था कि जदयू तय करे कि कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन कांग्रेस ने जदयू को कोई भाव ही नहीं दिया. सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू मध्य प्रदेश में 10 से 12 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है और इसके लिए एक और सूची जल्द ही जारी होगी.
दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार की जेडीयू का मध्य प्रदेश कभी कोई विधायक नहीं चुना गया है. यहां तक कि कभी कोई वार्ड काउंसलर नहीं जीता है.ये बात वाकई दिलचस्प है. नीतीश की पार्टी जेडीयू का जिस राज्य में जेडीयू का कभी कोई विधायक तो छोड़िये, वार्ड काउंसलर नहीं जीता है. ऐसे में एमपी में जदयू की दावेदारी ने इंडिया अलायंस के घटक दलों को भी आश्चर्य में डाल दिया है.
इससे भी बड़ी बात यह कि जेडीयू ने मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से पांच सीट देने की मांग की थी. कांग्रेस ने जब कोई नोटिस नहीं लिया तो जनता दल यूनाइटेड ने अपने दम पर मध्य प्रदेश का विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. बता दें कि जेडीयू के महासचिव अफाक अहमद खान ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पांच उम्मीदवारों की सूची जारी की है.
जदयू से जारी सूची के अनुसार, पिछौर से चंद्रपाल यादव, राजनगर से रामकुंवर रेकवार, विजयराघव से शिवनारायण सोनी, थांडला से टोल सिंह भूरिया और पेटलावाड़ से रामेश्वर सिंहवार का नाम शामिल हैं. इसके अतिरिक्त अभी और भी सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जा सकते हैं. यह संख्या 10 या 12 हो सकती है. जेडीयू महासचिव ने बताया कि कांग्रेस से सीटों का तालमेल नहीं होने पर पार्टी ने अपने बूते चुनाव लड़ने का फैसला लिया है.
यहां यह भी बता दें कि इससे पहले मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी का तालमेल कांग्रेस से नहीं हो पाया था. हालांकि, मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी का एक विधायक है. सपा वहां कांग्रेस से 6 सीटें मांग रही थी. लेकिन, कांग्रेस ने शुरूआती बातचीत के बाद सपा के लिए सीट छोड़ने से इंकार कर दिया. इससे नाराज सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सबक सिखाने की घोषणा भी कर दी थी. अब जदयू के चुनाव लड़ने के फैसले से इंडिया अलायंस के विरोधाभास सामने आ रहे हैं.







