बिहार में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन का इंतजार खत्म नहीं होता दिख रहा है। यह स्थिति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश के बाद की है। अधिकारियों को तेजी से प्रमोशन मिला है, लेकिन ग्रुप डी, क्लर्क, स्टेनोग्राफर की प्रोन्नति पर पेंच फंसा है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रमोशन के आदेश की अवहेलना की जा रही है। सरकारी बाबू ने छोटे कर्मियों की प्रमोशन के लिए निर्धारित की गई अवधि का हवाला देकर पेंच फंसा दिया है। इस पेंच की वजह से रिक्त पद 80 हजार में 70% पद खाली रह जाएंगे।
दरअसल, बिहार में सात साल बाद त्योहारी सीजन के पहले सरकारी कर्मियों को प्रमोशन का तोहफा देने का सिलसिला शुरू हुआ। कैबिनेट ने एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण की संख्या दोगुनी करने का निर्णय लिया, लेकिन प्रमोशन के लिए फिक्स समय सीमा (सेवा कालावधि) की पेंच से ज्यादातर पोस्ट खाली रह जाने की संभावना है। वे कहते हैं कि फिक्स समय सीमा में छूट कुछ पदों पर ही दी गई।

बिना पीए के चल रहा सचिवालय
बिहार सरकार का सचिवालय बिना पीए (प्राइवेट असिस्टेंट) का हो गया है। सरकार के आदेश के बाद सचिवालय के सभी आशुलिपिक कैडर के सभी पीए को पीएस (प्राइवेट सेक्रेटरी) में प्रमोशन दे दिया गया। वहीं, पीए स्तर पर प्रमोशन नहीं मिल पाया।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 20 अक्टूबर को आशुलिपिक संवर्ग को प्रमोशन दिया है। इसमें आशुलिपिक संवर्ग के चार पीए प्रमोट कर दिए गए। इसके बाद पीए के 247 पद खाली है। आशुलिपिक सेवा (Stenographer Service) में कुल 62 पद पर प्रमोशन होना था। फिक्स समय सीमा के कारण यह प्रमोशन नहीं दिया गया।
सूत्र बताते हैं कि आशुलिपिक को लेवल-4 से लेवल-9 में प्रमोशन दिया जाना था। इसके लिए कुल 16 साल की फिक्स समय सीमा चाहिए थी, जो नहीं मिल सकी। हालांकि, रिलैक्सेशन का फॉर्मूला अपनाया जाता तो पीए स्तर का कैडर रिक्त नहीं रहता।
ग्रुप डी से लेकर उप सचिव स्तर तक के प्रमोशन पर असर
विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रमोशन के इस स्थिति में नीचले स्तर के कर्मी काफी प्रभावित हैं। ग्रुप डी के कर्मी को एलडीसी और यूडीसी में प्रमोशन देने में उनकी सेवा का कैडर चेंज हो जाता है। ऐसे में उन्हें फिक्स समय सीमा में रिलैक्सेशन मान्य नहीं है। इसलिए प्रमोशन में पेंच फंस गया है।
सीएम के विभाग में 20 अक्टूबर को मिली थी प्रोन्नति
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विभाग सामान्य प्रशासन में दशहरा की छुट्टी से ठीक पहले प्रमोशन दी गई। इसमें 967 कर्मियों को प्रोन्नति दी गई, लेकिन पीए में एक कर्मी को प्रमोट नहीं किया जा सका। सचिवालय सहायक सेवा और आशुलिपिक सेवा के कर्मियों को पदोन्नति दी गई थी। 11 प्रशाखा पदाधिकारी को संयुक्त सचिव, 576 सहायक को प्रशाखा पदाधिकारी, 62 पीएस को पीपीएस, 242 प्रशाखा पदाधिकारी को अवर सचिव, 74 सेक्शन ऑफिसर को उप सचिव स्तर में पदोन्नति दी गई थी।
क्या होती है फिक्स समय सीमा
सरकारी कर्मियों को प्रोमोशन देने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की जाती है। हर वर्ग के कर्मियों को एक पद से दूसरे पद पर प्रमोट किए जाने के लिए समय सीमा तय है। हर लेवल के लिए अलग-अलग समय सीमा है। फिक्स समय सीमा में कुल 13 लेवल का प्रावधान है। हालांकि, बिहार सरकार के कैबिनेट फैसले में यह भी साफ है कि रिक्त पद रहने पर इस फिक्स समय सीमा को 50 फीसदी तक कम की जा सकती है।







