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इजराइल पर अटैक भारत के लिए सबक

UB India News by UB India News
October 11, 2023
in Lokshbha2024, विशेष रिपोर्ट
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हमास ने तेल अवीव पर दागे 5000 रॉकेट, रिहायशी इमारतों को बनाया निशाना, इजराइल ने भी किया ऐलान-ए-जंग
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‘ये पहली बार है कि फिलिस्तीन ने ऐसा अटैक किया है। इससे पहले वे मिसाइल दागते थे, बंदी बनाते, कैजुएलिटी करते और भाग जाते थे। इस बार आसमान, पानी और जमीन तीनों से हमला बोला। पैराग्लाइडर्स रडार की पकड़ से बाहर होते हैं, इसलिए उससे आए। बाइक और नावों से आकर इजराइल के छोटे शहरों पर कब्जा किया। म्यूजिक फेस्ट में आम लोगों की हत्या की, अगवा किया। इजराइल में ऐसे हमले की उम्मीद किसी को नहीं थी।’

इजराइल पर हमास के हमले का तरीका देखकर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जितना हैरान हैं, उतना ही बाकी दुनिया भी है। इजराइल के सबसे करीबी दोस्त अमेरिका, दुनिया की बेस्ट इंटेलिजेंस एजेंसियों में शामिल मोसाद और इजराइली सेना को पता ही नहीं चला कि इतना बड़ा हमला होने वाला है। सभी ने माना कि हमास ने बहुत तैयारी के साथ हमला किया है।

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7 अक्टूबर को हमास ने इजराइल पर 20 मिनट में 5 हजार रॉकेट दागे थे। इसके बाद शुरू हुई जंग में 1600 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। हमास के कामयाब हमले और मोसाद की नाकामी में भारत के लिए क्या सबक छिपे हैं और भारत को ऐसे हमलों से निपटने के लिए क्या तैयारी रखनी चाहिए, डिफेंस एक्सपर्ट रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी ।

इन सवालों की दो वजह हैं-

पहली: भारत सात देशों के साथ जमीनी सीमा साझा करता है। इनमें बांग्लादेश से 4,096 किमी, चीन से 3,488 किमी, पाकिस्तान से 3,323 किमी, नेपाल से 1,751 किमी, म्यांमार से 1,643 किमी, भूटान से 699 किमी और अफगानिस्तान (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) से 106 किमी सीमा सटी है। श्रीलंका और मालदीव वाटर बॉर्डर वाले देश हैं।

दूसरी: पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भारत में आतंकी घुसपैठ करते रहे हैं। कई इलाकों में ओपन बॉर्डर हैं, जहां निगरानी न के बराबर रहती है।

अब रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ की बात

सवालः हमास ने जैसे अटैक किया, उससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों को क्या सीख लेनी चाहिए?
सतीश दुआः 2006 में फिलिस्तीन इंतिफादा यानी इजराइल के खिलाफ विद्रोह हुआ था। उसी में पहली बार पत्थरबाजी की गई थी। पत्थर को वेपन नहीं माना जाता, इसलिए ये तरीका बहुत कामयाब रहा। पाकिस्तान और कश्मीरी अलगाववादियों ने इसी से सीख ली और 2009 में भारत में पत्थरबाजी की शुरुआत हुई।

2018 तक कश्मीर में ये बड़ी समस्या बन गई थी। आतंकियों को छुड़ाने के लिए पत्थरबाजी को हथियार बना लिया गया था। पाकिस्तान अभी अपने अंदरूनी मसलों में फंसा है, दूसरी तरफ कश्मीर में हालात बेहतर हो रहे हैं। इसलिए हमें इजराइल जैसे हमलों से निपटने के लिए अलर्ट रहने की जरूरत है।

सवालः इन हालात में भारत को आप कहां देखते हैं?
सतीश दुआः भारत हमेशा से अपना रास्ता अपनाता आया है। रूस और यूक्रेन की लड़ाई में हमारे दोनों से अच्छे रिश्ते हैं। हमने अपने राष्ट्रीय हित देखते हुए ही कदम उठाए हैं। भारत अपना इंडिपेंडेंट स्टैंड लेगा। टेररिज्म से भारत भी पीड़ित है। 75 साल से हम कई स्टेट में इससे जूझ रहे हैं। 26/11 का हमला हुआ, पार्लियामेंट पर अटैक हुआ, कश्मीर और मणिपुर में ऑपरेशन चल रहे हैं।

सवालः इजराइल के पास बेस्ट इंटेलिजेंस एजेंसी, सर्विलांस सिस्टम और सैटेलाइट हैं। फिर कैसे हमास ने इतना बड़ा हमला कर दिया?
सतीश दुआः ये साफ तौर पर इजराइल का इंटेलिजेंस फेलियर है। मोसाद दुनिया की बेहतरीन इंटेलिजेंस एजेंसियों में से एक है। कई साल से इजराइल और फिलिस्तीन में विवाद चल रहा है, फिर भी मोसाद को इतने बड़े हमले की भनक नहीं लगी।

सवालः इजराइली आर्मी इस अटैक का कैसे जवाब देगी, उसकी रणनीति क्या हो सकती है?
सतीश दुआः इजराइल के प्रधानमंत्री ने रणनीति का खुलासा कर दिया है। उन्होंने शनिवार को ही कह दिया था कि युद्ध शुरू हो गया है। मैंने इजराइल के चेकपॉइंट से गाजा को देखा है। वो बहुत घनी आबादी वाला इलाका है। ऐसी जगह एक बम गिरेगा तो 100 से ज्यादा लोग हताहत हो सकते हैं। इसीलिए गाजा से भारी कैजुएलिटी की खबरें आ रही हैं।

सवालः इजराइली फोर्स की क्षमता और ताकत कैसी है, इजराइल किस हद तक कार्रवाई करने में सक्षम है?
सतीश दुआः इजराइल की फोर्स बहुत ताकतवर है। उनके यहां सिटीजन फोर्सेज कॉन्सेप्ट बहुत पावरफुल है। हर इजराइली 2 साल मिलिट्री सर्विस में देता है। उनमें से कुछ तो रेगुलर सोल्जर हो जाते हैं, कुछ जरूरत पड़ने पर सेना में आते हैं।

इजराइल वेपन्स और टेक्नोलॉजी में तो अव्वल है ही, दुनियाभर को इसे एक्सपोर्ट भी करता है। म्यूनिख ओलिंपिक में हमने उसकी इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद की काबिलियत देखी थी। इसमें शामिल आतंकियों को उन्होंने दुनियाभर में खोजकर मारा था।

सवालः मिडिल ईस्ट पर इस हमले का कितना असर पड़ने वाला है?
सतीश दुआः हमास के हमले की टाइमिंग इंट्रेस्टिंग है। इसका असर मिडिल ईस्ट पर दिखेगा। इस्लामिक देशों से इजराइल के रिश्ते अच्छे हो रहे थे। हमास को आशंका थी कि इस्लामिक देशों से इजराइल के अच्छे रिश्ते हुए तो दुनिया उनके बारे में भूल जाएगी या उनका महत्व कम हो जाएगा, इसीलिए हमास ने ऐसा अटैक किया कि इजराइल कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर हो जाए।

सवालः ईरान का फिलिस्तीन को सपोर्ट है, अमेरिका ने इजराइल की मदद के लिए एयरक्राफ्ट भेज दिया, इन देशों के मिलिट्री टकराव को कैसे देख रहे हैं?
सतीश दुआः अब क्लैश ऑफ सिविलाइजेशन शुरू होगा। ईरान हिजबुल्ला को सपोर्ट करता है, अब हमास को भी सपोर्ट करने की बात आ रही है। कतर ने भी ऐसे ही कुछ स्टेटमेंट दिए हैं। आने वाले समय में जो रिश्ते ठीक हो रहे थे, उसका प्रोसेस रुक जाएगा।

सवालः बतौर फौजी इजराइली फौज की तरफ से लड़ रहे होते तो मन में क्या चल रहा होता?
सतीश दुआः फौजी जब युद्ध में होता है, तो उसको सिर्फ अपना ऑपरेशन ही नजर आता है। आतंकियों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाईं, लोगों को उनके परिवार के सामने कत्ल किया, कुछ लोगों को बंधक बनाकर ले गए, इन सबकी वजह से इजराइली फौज के दिल में गुस्सा है। उनके दिल में छटपटाहट है कि इतनी अच्छी फोर्स होने के बावजूद कैसे मार खा गए।

हमास को हम आर्मी तो नहीं कहेंगे। फिलिस्तीन समझता है कि इजराइल को पूरी दुनिया की शह हासिल है, इसलिए वो ज्यादतियां कर रहा है। फिलिस्तीन सोचता है कि इजराइल के मिडिल ईस्ट के देशों से संबंध अच्छे हुए तो उनका इलाका और कम हो जाएगा। इसी गुस्से में हमास ऐसे कदम उठाता है।

सेना की लड़ाई सेना से होती है, कभी-कभार सिविल कैजुएलिटी होती है, लेकिन हमास की तरह म्यूजिकल फेस्ट, शहरों और घरों में घुसकर आम लोगों को आर्मी नहीं मारती। सेना और आतंकी में सिर्फ यही अंतर है।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी

सवालः इजराइल पर हमास के हमले से भारत को क्या सीखने की जरूरत है?
संजय कुलकर्णीः गाजा पट्टी के अंदर कोई आए या जाए, तो इजराइल को पता चल जाता है। इजराइल सोते हुए पकड़ा गया। उसे पता ही नहीं चला कि इतने रॉकेट गाजा में हैं। मिस्र ने खबर दी थी कि हमास के इलाके में जिप्सम के कई कैंटर जा रहे हैं। इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इजराइल सोचता था कि बॉर्डर पर उसकी फेंसिंग कोई नहीं तोड़ सकता, उसे बुलडोजर से तोड़ दिया। अब इजराइल हिसाब से चल रहा है।

आपके आसपास दुश्मन हैं, तो हमेशा सतर्क रहना होगा। दुश्मन मीठी बातों में फंसाकर हमला कर देगा। ऐसा हमने 2020 में देखा कि चीन ने क्या किया? हम सोच रहे थे कि कोविड का दौर है, चीन कुछ नहीं कर सकता, लेकिन हुआ न…’

‘वैसे ही हमास को लगा कि इजराइल के अंदर प्रधानमंत्री और ज्यूडिशियरी के बीच जो चल रहा है, उसका फायदा उठाया जाए। भारत को भी हमेशा सतर्क रहना जरूरी है। डिफेंस के लिए हमेशा तैयारी जरूरी है। देश के अंदर के दुश्मनों पर भी नजर रखना जरूरी है। जिन पर शक हो, उन पर निगरानी रखनी चाहिए।

सवालः इजराइल में जैसे हमास शहर के अंदर घुस आया और हिंसा की, वैसी घटना भारत में न हो, इसके लिए सुरक्षाबलों को क्या सीखने की जरूरत है?
संजय कुलकर्णीः कारगिल युद्ध के बाद सुब्रमण्यम कमेटी ने कहा कि एक बॉर्डर एक ही फोर्स को दी जाए। एक बॉर्डर पर अगर BSF, ITBP, आर्मी होगी तो रिस्पॉन्सिबिलिटी और अकाउंटबिलिटी की दिक्कत हो जाती है।

इजराइल ने सोचा कि एक तरफ फेंसिंग है, दूसरी तरफ समुद्र है और एक तरफ मिस्र है, जिससे संधि है, ऐसे में हम सुरक्षित है। अपने यहां चीन और म्यांमार में फेंसिंग नहीं है, बांग्लादेश में अब फेंसिंग हो रही है। ऐसे में हमारे लिए भी खतरा है।

सवालः हमारी सेना के पास इजराइल जैसे हालात में जवाबी कार्रवाई के लिए कौन से तरीके हैं?
संजय कुलकर्णीः हम भी दुश्मनों से घिरे हुए हैं। हमारे दोनों दुश्मनों के यहां लोकतंत्र नहीं है। पाकिस्तान में लोकतंत्र तो बहाना है, सरकार की चाबी फौज के पास है। चीन कम्युनिस्ट कंट्री है, राष्ट्रपति ही वहां सब कुछ है। हम लोकतंत्र हैं, जिसके अच्छे पहलू और बंदिशें भी हैं।

इतनी बड़ी आबादी है कि सभी को नौकरी नहीं मिल पा रही। ऐसे में लोगों को बहकाना या घूस देना बहुत आसान है। लोगों को पता भी नहीं चल सकेगा कि वे दुश्मन के लिए काम कर रहे हैं या अपने लिए।

ऐसे में हम सैटेलाइट, AI या ऐसे दूसरे तरीकों से सर्विलांस को मजबूत कर सकते हैं। अपने देश की फौज ऐसे हर हमले से निपटने के लिए तैयार है। इजराइल ने जैसे हमास पर हमला किया, उसी तरीके की काबिलियत हमारे पास भी है। चीन ने 2020 में जैसे ईस्टर्न लद्दाख में किया, हमने 60 हजार जवानों को हवाई जहाज से वहां पहुंचाया था।

​​​​​​सवालः इजराइल और हमास की लड़ाई से भारत के आसपास जियो पॉलिटिक्स में काफी कुछ बदलने वाला है। इसे आप कैसे देखते हैं?
संजय कुलकर्णीः भारत ही ऐसा देश है, जो लंबे समय से आतंक झेल रहा है। इजराइल आतंकी संगठनों से लड़ रहा है, यही कारण है कि भारत ने इजराइल के साथ खड़े होने की बात कही है। आतंक से हमारा काफी नुकसान हुआ। फिलिस्तीनियों का मानना सही है कि जमीन उनकी है, लेकिन आतंकी कार्रवाई करना ठीक नहीं है।

गाजा पट्टी या वेस्ट लैंड दे देंगे, तब भी हमास खुश नहीं होगा। यरुशलम तो जितना मुस्लिमों और ईसाइयो के लिए पवित्र है, उतनी ही यहूदियों के लिए भी है। ऐसे में इजराइल कभी यरुशलम नहीं देगा और ये लड़ाई भी कभी खत्म नहीं होगी।

ये मसला लड़ाई से नहीं, बातचीत से हल होगा। 90 लाख इजराइलियों में मुस्लिम और ईसाई भी हैं, इसलिए सिर्फ यहूदियों के बारे में सोचना गलत है। इजराइल और हमास की लड़ाई के बाद साफ हो गया है कि इस्लामिक देश हमास के साथ खड़े हैं। जो इस्लामिक देश नहीं हैं, वे इजराइल के साथ हैं।

क्या हमास भारत के लिए भी खतरा हो सकता है?
हमास को इजराइल, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन आतंकी संगठन मानते हैं। भारत में एक्टिव आतंकी संगठनों के हमास से सीधे कनेक्शन के अब तक सबूत नहीं हैं। हमास और मिस्र के सबसे बड़े इस्लामिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के अच्छे संबंध रहे हैं। मुस्लिम ब्रदरहुड 2021 में बायकॉट इंडिया कैम्पेन चला चुका है।

23 जून 2011 को पाकिस्तानी संगठन जमात-ए-इस्लामी के चीफ सैयद मुनव्वर हसन मिस्र गए थे। इस दौरान मुस्लिम ब्रदरहुड चीफ इकवानूल मुस्लीमून से उनकी मुलाकात की फोटो सामने आई थी। भारत में वांटेड जाकिर नाइक के भी मुस्लिम ब्रदरहुड के लीडर्स से कनेक्शन रहे हैं।

जमात-ए-इस्लामी कश्मीर पर पाकिस्तान के दावे का सपोर्ट करता है। कश्मीर के अलगाववादी गुट हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पीछे भी जमात-ए-इस्लामी ही था। कश्मीर में एक्टिव आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन को जमात-ए-इस्लामी ने ही बनाया था।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में पब्लिश आर्टिकल में प्रोफेसर हर्ष वी. पंत लिखते हैं कि भारत के लिए चिंता की बात है कि कुछ आतंकी संगठन दूसरे देशों की मदद से किसी देश पर इतना बड़ा हमला कर सकते हैं। भारत में या इसके आसपास एक्टिव आतंकी संगठन क्या कर सकते हैं, ये तो बस सोचा जा सकता है।

गाजा बॉर्डर पर इजराइल का कंट्रोल
इससे पहले इजराइल की सेना ने घोषणा की- हमने गाजा के बॉर्डर पर कब्जा कर उसे पूरी तरह से सील कर दिया है। सेना ने रातभर गाजा में 200 जगहों पर स्ट्राइक की। अब तक हमास के 1500 लड़ाके मारे जा चुके हैं। वहीं, जंग में इजराइल के 123 सैनिकों की मौत हो चुकी है।

7 अक्टूबर से शुरू हुई इस जंग में अब तक कुल 1,665 लोगों की मौत हो चुकी है। इजराइल में 900 लोग मारे गए हैं, जबकि 2300 लोग घायल हैं। वहीं गाजा पट्टी में 140 बच्चों, 120 महिलाओं समेत 830 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। 3,726 लोग घायल भी हुए हैं।

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