पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन कभी भी नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हो सकते हैं। खबर है कि आनंद मोहन के साथ-साथ उनकी पत्नी लवली आनंद और छोटे बेटे की भी जेडीयू में एंट्री हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आनंद मोहन और उनका परिवार दुर्गापूजा के बाद जेडीयू में शामिल हो सकता है। हालांकि अभी तक अधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं हुई है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही आनंद मोहन नीतीश कुमार से सीएम आवास में मुलाकात की थी। तब ही से कयास लगाया जा रहा है कि आनंद मोहन की जेडीयू में एंट्री हो सकती है।
‘ठाकुर’ विवाद के बाद आनंद मोहन परिवार और आरजेडी के बीच दूरियों की अटकलें तेज होती जा रही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आनंद मोहन और उनका परिवार आरजेडी से अलगाव के प्लान में जुट गया है। इसे लेकर राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया। ऐसा माना जा रहा है कि पूर्व सांसद और बिहार में ठाकुरों के नेता माने जाने वाले आनंद मोहन आरजेडी से किनारा कर जेडीयू में जाने की रणनीति बना रहे। अपने छोटे बेटे के साथ वो जेडीयू में शामिल हो सकते हैं। ये चर्चा आनंद मोहन की नीतीश कुमार संग हुई मुलाकात के बाद और जोर पकड़ने लगी है। हालांकि अभी तक जेडीयू और आनंद मोहन का परिवार भी इस मामले में चुप है।
सम्मान से समझौता नहीं’
जेडीयू या बीजेपी के साथ जाने के सवाल को आनंद मोहन पहले ही नकार चुके हैं। मगर उन्होंने सम्मान से समझौता नहीं करने की बात जरूर कही है। इससे पहले भी आनंद मोहन यह कह चुके हैं कि वह राष्ट्रीय जनता दल के साथ हैं। मगर उन्होंने यह बात भी जरूर कही कि वह किसी भी कीमत पर अपने सम्मान से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि नीतिगत तरीके से पार्टी के भीतर भी वो विरोध करेंगे। आनंद मोहन ने बीते दिनों यह बात कही थी कि वह भले ही आरजेडी के साथ हैं लेकिन ‘वह कोई भीखमंगे नहीं हैं। उनका अपना जन आधार है।’ पूर्व सांसद आनंद मोहन यह भी कह चुके हैं कि आरजेडी के साथ रहने पर हमें एक-दो सीटें आरजेडी से मिल रही हैं। इसके बदले में आरजेडी को बिहार की 38 सीटों पर उनका समर्थन भी मिल रहा है।
‘ठाकुर’ विवाद के बाद आनंद मोहन हुए मजबूत
आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा में सांसद मनोज झा के महिला विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान ‘ठाकुर का कुआं’ कविता के जरिए अपनी बात रखी थी। जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। उस समय आनंद मोहन ने मनोज झा के बयान का विरोध किया। इसके उनकी अपनी जाति में प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी हुई। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिहार में सभी पार्टी के राजपूत नेताओं ने आनंद मोहन का समर्थन किया। यहां गौर करने वाली बात यह है कि न केवल बिहार बल्कि अन्य राज्यों की राजपूत बिरादरी उनके पक्ष में उतरती नजर आई।
हालांकि, लालू प्रसाद यादव के मनोज झा के समर्थन की वजह से बिहार की राजपूत जाति का भरोसा का आरजेडी से कम हुआ। माना जा रहा कि इस नाराजगी का फायदा अन्य पार्टियां उठाने की फिराक में है। बिहार की राजनीति में चर्चा यह भी है कि वह बीजेपी के साथ भी जा सकते हैं। राजनीतिक अटकल यह भी लगाई जा रही कि आनंद मोहन की बात बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से भी हुई है। मगर आनंद मोहन का परिवार ऐसी चर्चाओं को सिरे से नकार रहा है।
सम्मान के सवाल पर आरजेडी से बढ़ी दूरियां
चेतन आनंद इन दिनों उत्तराखंड में हैं। उन्होंने बिहार में चल रही तमाम राजनीतिक अटकलों पर अनभिज्ञता जाहिर करते हुए विराम लगाया है। हालांकि उन्होंने यह बात स्पष्ट तौर पर कही कि वह राष्ट्रीय जनता दल के साथ हैं। मगर आनंद मोहन ये कह चुके हैं कि वो सम्मान से समझौता नहीं करेंगे। चेतन आनंद ने भी उनकी बात को दोहराया है। उन्होंने कहा कि हम लोग सम्मान से रहने वाले लोग हैं। जिस भी पार्टी के साथ हैं, उससे सम्मान की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि आनंद मोहन को अगर उचित सम्मान नहीं मिला तो वह कोई और कदम उठा सकते हैं।







