भाजपा के संस्थापक सदस्य और बिहार भाजपा के ‘भीष्म पितामह’ स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र की १००वीं जयंती को बिहार भाजपा जन्मशताब्दी वर्षगांठ के रूप में मनाएगी। इसके तहत लगातार एक महीने तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। पूरे प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले इन सभी कार्यक्रमों की शुरुआत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ड़ा द्वारा पटना में स्व. मिश्र की जन्म–जयंती के मौके पर पांच अक्टूबर को होगी।
पटना के बापू सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी शक्ति केंद्र प्रमुख‚ मंड़ल अध्यक्ष और कमेटी सदस्य तथा प्रदेश के अधिकारी हिस्सा लेंगे। सभी जिलों में समारोह आयोजित कर जनसंघ और भाजपा के पुराने साथियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी‚ जिसके तहत स्वर्गीय मिश्र द्वारा भाजपा और जनसंघ के सींचने के कायोंर् के विषय को प्रदर्शित किया जाएगा‚ लोग इस प्रदर्शनी के जरिए उनके किए गए कायोंर् को जान सकेंगे। स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र देश की प्रथम पंक्ति और प्रथम पीढ़ी के नेता थे‚ जिन्होंने पार्टी व संगठन के विस्तार और विचारधारा की लड़ाई के लिए अपने आप को पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया। उस समय उनके पास पाने के लिए कुछ नहीं था‚ लेकिन खोने के लिए सब कुछ था। सत्ता के बारे में सोचना उस समय तो सपने में भी नहीं था‚ बस उनका एकमात्र उद्ेश्य मां भारती की सेवा करना था। पार्टी को शून्य से खड़ा करने और इसे राज्य में एक प्रमुख राजनीतिक ताकत में बदलने के लिए कैलाशपति जी को बिहार भाजपा का भीष्म पितामह कहा जाता है। कैलाशपति जी गठबंधन के विरोधी थे। जब भाजपा ने १९९५ में समता पार्टी के साथ गठबंधन किया‚ तो कैलाशपति जी इतने नाराज हुए कि वह कुछ समय के लिए असम में जाकर रहने लगे। हालांकि‚ वह लौट आए और बाद में नेतृत्व के फैसले को स्वीकार कर लिया। बिहार में भाजपा की सरकार बनाना उनका सपना था। आज समय आ गया है हम सब उनके सपने को पूरा करने का संकल्प ले। आज भारतीय जनता पार्टी एक वटवृक्ष के रूप में इतनी बड़े स्वरूप तक पहुंची है और विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी बनी है तो इसकी नींव में कैलाशपति मिश्र जी जैसे दधीचियों की त्याग और तपस्या ही है। वे न केवल एक समर्पित पार्टी कार्यकर्ता थे बल्कि एक कुशल संगठक‚ अच्छे प्रशासक और विचारक भी थे।
भारतीय जनता पार्टी के यशस्वी मनीषियों ड़ॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी‚ पंडि़त दीनदयाल उपाध्याय‚ सुंदर सिंह भंड़ारी‚ जगन्नाथ राव जोशी‚ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ‚ लालकृष्ण आड़वाणी‚ यज्ञदत्त शर्मा‚ कुशाभाऊ ठाकरे‚ बलराम दास टंड़न‚ मंगल सेन‚ नानाजी देशमुख‚ विष्णुकांत शास्त्री‚ राजगोपाल जैसे अनेक नेताओं ने अपने त्याग‚ तपस्या और बलिदान से पार्टी को सींचा और नींव को मजबूत किया। उन्होंने देश के घर–घर में जनसंघ का दीया और बाद में कमल घर–घर पहुंचाने का संकल्प लिया। कैलाश जी ने कहा था कि वह परिवार‚ वह समाज‚ वह राज्य और वह देश कभी भी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकता जो अपने इतिहास को भूल जाए। अच्छे वे होते हैं जो आगे का सपना जरूर देखते हैं‚ लेकिन पीछे को भी नहीं भूलते हैं। हमें भी आगे बढ़ना है तो स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र द्वारा दिखाए गए रास्ते को नहीं भूलना चाहिए। कैलाशपति मिश्र जी ने कहा था‚ चुनाव जीतने से बड़ा उद्ेश्य है दीये को घर–घर पहुंचाना। आगे चल कर बिहार में संयुक्त सरकार बनी और कैलाशपति मिश्र वित्त मंत्री बने तो उनसे पूछा गया कि अब तो पार्टी मजबूत हो रही है। सरकार में भी हम आ गए हैं तो उन्होंने फिर कहा कि ये विचारधारा की लड़ाई है। यह एक पड़ाव हो सकता है‚ लेकिन पूर्णविराम नहीं। अभी हमें विचारधारा की लड़ाई आगे और लड़नी है। स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र न केवल एक समर्पित पार्टी कार्यकर्ता थे बल्कि एक कुशल संगठक‚ अच्छे प्रशासक और विचारक भी थे। उन्होंने काफी कम समय में ही बिहार में कई महत्वपूर्ण काम करके दिखाए और विपरीत परिस्थितियों में भी सामाजिक समरसता के लिए काम करते रहे।







