पिछले दो हफ्तों में ईरान के ऊपर से उड़ान भर रहे कम से कम 20 एयरलाइन और कॉरपोरेट जेट को फेक जीपीएस सिग्नल के शिकार बन गए। इस नकली सिग्नल की वजह से ये सभी 20 विमान रूट से ही भटक गए। ये सिग्नल जमीन से भेजे गए थे और इतने मजबूत थे कि वे विमान के नेविगेशन सिस्टम से भी छेड़छाड़ कर सकते थे। यही नहीं ये सैटेलाइट जीपीएस सिग्नल को भी ओवरराइड कर सकते थे और फ्लाइट्स को उनके रास्ते से हटा सकते थे। इसने नेविगेशन सिस्टम को इस तरह से विफल किया कि पायलटों को विमान की स्थिति जानने के लिए एटीसी से मदद मांगनी पड़ी। इसे जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग कहा जाता है। हालांकि जीपीएस सिग्नल इंटरफेरेंस का यह रूप एक दशक से अधिक समय से है, यह पहली बार था जब नागरिक यात्री उड़ानों को इस तरह निशाना बनाया गया था। स्पूफिंग के इस खेल को विस्तार से जानते हैं।
क्या है जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग?
पहले जानते हैं कि आखिर यह जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग है क्या? स्पूफिंग का मतलब है नकल करना। जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग का मतलब हुआ रिसीवर को सही जानकारी न भेजकर फेक जानकारी भेजी जाती है। असल सैटेलाइट सिग्नल के साथ हेरफेर कर फेक सिग्नल रिसीवर के पास आते हैं। इसके कारण विमान असल जगह न जाकर रास्ता भटक जाते हैं। विमान का जीपीएस रिसीवर नहीं जानता कि वह झूठे जीपीएस सिग्नल पढ़ रहा है। विमान का फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम नकली जीपीएस संकेतों को ही सही मान लेता है।
Ops Group नामक एक फ्लाइट डेटा इंटेलिजेंस क्राउडसोर्सिंग वेबसाइट के अनुसार, हाल ही में हुई ज्यादातर जीपीएस स्पूफिंग ईरान के हवाई क्षेत्र में एयरवे UM688 में हुई। इसके जवाब में, पिछले बुधवार को, अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एयरलाइंस को एक मेमो जारी किया। अमेरिकी नागरिक उड्डयन नियामक(FAA) ने चेतावनी दी कि इराक और अजरबैजान में विभिन्न नागरिक हवाई ऑपरेटरों की ओर से रिपोर्ट की गई संभावित स्पूफिंग गतिविधियां बगदाद और बाकू उड़ान सूचना क्षेत्रों (FIR) में नागरिक उड्डयन संचालन के लिए उड़ान जोखिम पैदा करती हैं। एक इंडिन कैरियर के एक वरिष्ठ कमांडर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘हम एयरवे UM688 पर उड़ान नहीं भरते हैं, लेकिन हम ईरानी हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरते हैं। हमने स्पूफिंग का अनुभव नहीं किया है, लेकिन पिछले हफ्ते एक उड़ान पर, हमने जीपीएस जैमिंग का अनुभव किया है।
जीपीएस जैमिंग क्या है? क्या यह स्पूफिंग से अलग है?
जीपीएस जैमिंग स्पूफिंग से अलग है। जैमिंग को आसान भाषा में समझते हैं। जब कोई अपराधी सिग्नल को पूरी तरह से जाम कर देता है तब इसे जैमिंग कहा जाता है। दूसरी ओर जीपीएस स्पूफिंग हैकर्स के लिए दो धारी तलवार की तरह काम करता है। हैकर्स ऑपरेटरों के बिना नेविगेशन सिस्टम से छेड़छाड़ कर स्पूफिंग का उपयोग कर सकते हैं। इसके बाद विमानों को मिलते हैं गलत सिग्नल जो उन्हें वास्विक मार्ग से भटका सकते हैं। जीपीएस जैमिंग से निपटने का तरीका पायलट जानते हैं। जैमिंग का पता पायलटों को तुरंत लग जाता है। एक टिमटिमाती हुई रीडिंग तुरंत बता देती है कि जीपीएस सिग्नल जाम किए जा रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि लंबी उड़ानों पर जीपीएस जैमिंग काफी नियमित है। साउथ पोल से रूस की ओर प्रवेश करने या कहें कि एस्टोनियाई सीमा के पास, सिम्फ़रोपोल के आसपास के क्षेत्रों (क्रीमिया में) यह आम है। उन्होंने कहा कि जैमिंग को संभालने के लिए कई चेकलिस्ट हैं। हम विमान के नेविगेशन सिस्टम पर भरोसा करते हैं जो जीपीएस से इनपुट नहीं लेता है।
दूसरी ओर, स्पूफिंग की बात करें तो इसके बारे में तुरंत पता नहीं चलता। जिस वजह से इसपर तुरंत एक्शन नहीं लिया जा सकता। विमान का जीपीएस रिसीवर नहीं जानता कि वह फेक जीपीएस सिग्नल पढ़ रहा है, विमान का फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम नकली जीपीएस संकेतों को स्वीकार कर लेता है। इसके बाद विमान अपने पहले से तय रूट से हटकर किसी और रूट की ओर मुड़ जाता है। हवाई सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अमित सिंह ने कहा, ‘ज्यादातर जेट विमानों में, विमान नेविगेशन सिस्टम दिखाएगा कि विमान का इनर्शियल रेफरेंस सिस्टम (आईआरएस) स्थिति और जीपीएस स्थिति असहमत हैं। पायलटों को जीपीएस इनपुट को डिसेबल कर देना चाहिए। यदि वे असफल होते हैं और अपने रास्ते से हटते रहते हैं, तो एटीसी उन्हें सतर्क कर देगा। सिंह ने कहा कि UM688 एक व्यस्त मार्ग है। यह ईरानी और इराकी हवाई क्षेत्र के माध्यम से चलता है। यदि एक विमान को इस मार्ग पर स्पूफ किया जाता है, तो इससे अन्य विमानों के साथ टकराने का खतरा बढ़ सकता है
पश्चिम एशिया से यूरोप से अमेरिका के लिए यहां से अधिकांश मार्ग हैं। सक्रिय संघर्ष क्षेत्र हैं जिनमें सैन्य गतिविधि चल रही है और इसलिए उड़ान योजना से भटकना सुरक्षित नहीं है। निशाना बनाए गए पायलटों को आश्चर्यचकित करने वाली बात यह थी कि कैसे नकली जीपीएस सिग्नल आईआरएस को हेरफेर करने में सफल रहे। यह एक स्वतंत्र, स्टैंडअलोन सिस्टम है जो जीपीएस सिग्नलों की मदद के बिना स्थिति की गणना कर सकता है। इसका आधुनिक एयरलाइनर जेट विमानों में आईआरएस सिस्टम के काम करने के तरीके से बहुत कुछ लेना-देना है।
प्रत्येक विमान में 2-3 स्वतंत्र आईआरएस और दो स्वतंत्र जीपीएस रिसीवर होते हैं, जो विमान की स्थिति की गणना करते हैं। कई आधुनिक एयरलाइनर जेट विमानों में, आईआरएस और जीपीएस इनपुट का उपयोग ‘जीपीआईआरएस स्थिति’ की गणना के लिए किया जाता है। जब विमान की ओर से नकली जीपीएस सिग्नल प्राप्त होते हैं, तो एक गलत जीपीआईआरएस स्थिति की गणना की जाती है। कैप्टन सिंह ने कहा, ‘ फ्लाइट सिस्टम आईआरएस और जीपीएस सिग्नल के बीच असहमति दिखाएगी और यदि इस प्वाइंट पर चालक दल जीपीएस सिग्नल को निष्क्रय नहीं करता है, तो विमान को उसके वास्तविक रास्ते से हटा दिया जाएगा’
इराक ने फर्जी GPS सिग्नल से 20 विमानों को भटकाया, नैविगेशन सिस्टम भी फेल तो पायलट को लेनी पड़ी बगदाद ATC से मदद
एयरलाइंस से जुड़ी बहुत ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इरान एयरस्पेस ने बीते 15 दिनों में 20 एयरक्राफ्ट को फर्जी जीपीएस सिग्नल दिया। इन फर्जी जीपीएस सिग्नल से फ्लाइट्स भटकीं और आखिरकार एटीसी का सहारा लेकर फ्लाइट्स अपने गंतव्य तक पहुंच सकीं। इरान के ऊपर से गुजरने वाली ऐसी 20 एयरलाइन और कॉरपोरेट जेटों को फर्जी जीपीएस सिग्नल भेजकर निशाना बनाया गया। फर्जी जीपीएस संकेतों ने जिन विमानों को रोका, उनमें बोइंग 777,737 और 747 शामिल हैं। ओप्स ग्रुप एक फ्लाइट डेटा इंटेल क्राउडसोर्सिंग वेबसाइट चलाता है। उन्होंने पिछले सोमवार को कहा बोइंग 777 को टारगेट करके इतना आगे ले जाया गया कि चालक दल को बगदाद एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोलर) से पूछने के लिए मजबूर होना पड़ा, ‘समय क्या है, और हम कहां हैं।’ भारतीय वाहक एआई, इंडिगो और विस्तारा सैन फ्रांसिस्को, इस्तांबुल, बाकू और लंदन जैसे गंतव्यों के रास्ते में इस हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरते हैं। एआई और इंडिगो इन मार्गों पर 777 विमान संचालित करते हैं, जिसमें इंडिगो के 777 विमान तुर्की एयरलाइंस संचालित हैं।
जांच में खुलासा
फ्लाइट डेटा इंटेलिजेंस क्राउडसोर्सिंग वेबसाइट चलाने वाले ऑप्स ग्रुप के अनुसार, हाल ही में अधिकांश जीपीएस स्पूफिंग ईरान के हवाई क्षेत्र में वायुमार्ग यूएम688 में हुई। जवाब में, पिछले बुधवार को, यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने एयरलाइंस को ‘इराक/अजरबैजान-जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग पोज सेफ्टी रिस्क’ शीर्षक से एक ज्ञापन जारी किया। अमेरिकी नागरिक उड्डयन नियामक ने चेतावनी दी है कि इराक और अजरबैजान में विभिन्न नागरिक हवाई ऑपरेटरों की रिपोर्ट की गई संभावित स्पूफिंग गतिविधियों से बगदाद और बाकू उड़ान सूचना क्षेत्रों (एफआईआर) में नागरिक उड्डयन संचालन के लिए उड़ान जोखिम पैदा होता है। एक भारतीय वाहक के एक वरिष्ठ कमांडर ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि हम हवाई मार्ग यूएम688 पर उड़ान नहीं भरते हैं, लेकिन हम ईरानी हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरते हैं। हमने स्पूफिंग का अनुभव नहीं किया है, लेकिन पिछले हफ्ते एक उड़ान में, हमने जीपीएस जाम का अनुभव किया।
विमान नेविगेशन पर भरोसा
जीपीएस जैमिंग स्पूफिंग की तरह कपटी नहीं है, और एयरलाइंस और पायलट जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है। एक के लिए, फ्लिक एरिंग रीडिंग से तुरंत पता चलता है कि जीपीएस सिग्नल जाम हो रहे हैं। लंबी दूरी की उड़ानों में जी. पी. एस. जाम काफी नियमित है। हम उत्तरी ध्रुव से रूस में प्रवेश करते समय इसका सामना करते हैं या कह सकते हैं कि एस्टोनियाई सीमा के पास, सिम्फेरोपोल के आसपास इलाके में। जामिंग को संभालने के लिए कई चेकलिस्ट हैं। हम विमान के नेविगेशन सिस्टम पर भरोसा करते हैं जो जीपीएस से इनपुट नहीं लेता है।
बिजी रूट पर खतरनाक हरकत’
दूसरी ओर, स्पूफिंग तुरंत स्पष्ट नहीं है। विमान के जी. पी. एस. रिसीवर को यह नहीं पता है कि वह गलत जी. पी. एस. संकेत पढ़ रहा है, विमान की उड़ान प्रबंधन प्रणाली नकली जी. पी. एस. संकेतों को स्वीकार करती है और विमान को अपने इच्छित मार्ग से हटने के लिए पुनर्निर्देशित किया जाता है। वायु सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अमित सिंह ने कहा, ‘अधिकांश वाणिज्यिक विमानों में, विमान नेविगेशन प्रणाली दिखाएगी कि विमान की जड़त्वीय संदर्भ प्रणाली (आईआरएस) की स्थिति और जीपीएस की स्थिति असहमत है। पायलटों को जीपीएस इनपुट को अक्षम करना चाहिए। अगर वे ऐसा करने में विफल रहे और अपने रास्ते से हटते रहे, तो एटीसी उन्हें सचेत करेगा। यह कितना खतरनाक है? यूएम688 एक व्यस्त मार्ग है।’
‘एयरलाइंस को कर रहे टारगेट’
पश्चिम एशिया से यूरोप तक का अधिकांश यातायात यहां से यूएस मार्ग तक जाता है। सैन्य गतिविधि के साथ सक्रिय संघर्ष क्षेत्र चल रहे हैं और इसलिए उड़ान योजना से भटकना सुरक्षित नहीं है। जिस बात ने लक्षित पायलटों को आश्चर्यचकित कर दिया वह यह था कि कैसे नकली जीपीएस सिग्नल आईआरएस में हेरफेर करने में सफल रहे, जो एक स्वतंत्र, स्टैंडअलोन सिस्टम है जो जीपीएस सिग्नल की मदद के बिना स्थिति की गणना कर सकता है। इसका आधुनिक विमानों में आई. आर. एस. प्रणाली के काम करने के तरीके से बहुत कुछ लेना-देना है। प्रत्येक विमान में 2-3 स्वतंत्र आईआरएस और दो स्वतंत्र जीपीएस रिसीवर होते हैं, जो विमान की स्थिति की गणना करते हैं।
पिछले दो हफ्तों में ईरान के ऊपर से उड़ान भर रहे कम से कम 20 एयरलाइन और कॉरपोरेट जेट को फेक जीपीएस सिग्नल के शिकार बन गए। इस नकली सिग्नल की वजह से ये सभी 20 विमान रूट से ही भटक गए। ये सिग्नल जमीन से भेजे गए थे और इतने मजबूत थे कि वे विमान के नेविगेशन सिस्टम से भी छेड़छाड़ कर सकते थे। यही नहीं ये सैटेलाइट जीपीएस सिग्नल को भी ओवरराइड कर सकते थे और फ्लाइट्स को उनके रास्ते से हटा सकते थे। इसने नेविगेशन सिस्टम को इस तरह से विफल किया कि पायलटों को विमान की स्थिति जानने के लिए एटीसी से मदद मांगनी पड़ी। इसे जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग कहा जाता है। हालांकि जीपीएस सिग्नल इंटरफेरेंस का यह रूप एक दशक से अधिक समय से है, यह पहली बार था जब नागरिक यात्री उड़ानों को इस तरह निशाना बनाया गया था। स्पूफिंग के इस खेल को विस्तार से जानते हैं।
क्या है जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग?
पहले जानते हैं कि आखिर यह जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग है क्या? स्पूफिंग का मतलब है नकल करना। जीपीएस सिग्नल स्पूफिंग का मतलब हुआ रिसीवर को सही जानकारी न भेजकर फेक जानकारी भेजी जाती है। असल सैटेलाइट सिग्नल के साथ हेरफेर कर फेक सिग्नल रिसीवर के पास आते हैं। इसके कारण विमान असल जगह न जाकर रास्ता भटक जाते हैं। विमान का जीपीएस रिसीवर नहीं जानता कि वह झूठे जीपीएस सिग्नल पढ़ रहा है। विमान का फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम नकली जीपीएस संकेतों को ही सही मान लेता है।
Ops Group नामक एक फ्लाइट डेटा इंटेलिजेंस क्राउडसोर्सिंग वेबसाइट के अनुसार, हाल ही में हुई ज्यादातर जीपीएस स्पूफिंग ईरान के हवाई क्षेत्र में एयरवे UM688 में हुई। इसके जवाब में, पिछले बुधवार को, अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एयरलाइंस को एक मेमो जारी किया। अमेरिकी नागरिक उड्डयन नियामक(FAA) ने चेतावनी दी कि इराक और अजरबैजान में विभिन्न नागरिक हवाई ऑपरेटरों की ओर से रिपोर्ट की गई संभावित स्पूफिंग गतिविधियां बगदाद और बाकू उड़ान सूचना क्षेत्रों (FIR) में नागरिक उड्डयन संचालन के लिए उड़ान जोखिम पैदा करती हैं। एक इंडिन कैरियर के एक वरिष्ठ कमांडर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘हम एयरवे UM688 पर उड़ान नहीं भरते हैं, लेकिन हम ईरानी हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरते हैं। हमने स्पूफिंग का अनुभव नहीं किया है, लेकिन पिछले हफ्ते एक उड़ान पर, हमने जीपीएस जैमिंग का अनुभव किया है।
जीपीएस जैमिंग क्या है? क्या यह स्पूफिंग से अलग है?
जीपीएस जैमिंग स्पूफिंग से अलग है। जैमिंग को आसान भाषा में समझते हैं। जब कोई अपराधी सिग्नल को पूरी तरह से जाम कर देता है तब इसे जैमिंग कहा जाता है। दूसरी ओर जीपीएस स्पूफिंग हैकर्स के लिए दो धारी तलवार की तरह काम करता है। हैकर्स ऑपरेटरों के बिना नेविगेशन सिस्टम से छेड़छाड़ कर स्पूफिंग का उपयोग कर सकते हैं। इसके बाद विमानों को मिलते हैं गलत सिग्नल जो उन्हें वास्विक मार्ग से भटका सकते हैं। जीपीएस जैमिंग से निपटने का तरीका पायलट जानते हैं। जैमिंग का पता पायलटों को तुरंत लग जाता है। एक टिमटिमाती हुई रीडिंग तुरंत बता देती है कि जीपीएस सिग्नल जाम किए जा रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि लंबी उड़ानों पर जीपीएस जैमिंग काफी नियमित है। साउथ पोल से रूस की ओर प्रवेश करने या कहें कि एस्टोनियाई सीमा के पास, सिम्फ़रोपोल के आसपास के क्षेत्रों (क्रीमिया में) यह आम है। उन्होंने कहा कि जैमिंग को संभालने के लिए कई चेकलिस्ट हैं। हम विमान के नेविगेशन सिस्टम पर भरोसा करते हैं जो जीपीएस से इनपुट नहीं लेता है।
दूसरी ओर, स्पूफिंग की बात करें तो इसके बारे में तुरंत पता नहीं चलता। जिस वजह से इसपर तुरंत एक्शन नहीं लिया जा सकता। विमान का जीपीएस रिसीवर नहीं जानता कि वह फेक जीपीएस सिग्नल पढ़ रहा है, विमान का फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम नकली जीपीएस संकेतों को स्वीकार कर लेता है। इसके बाद विमान अपने पहले से तय रूट से हटकर किसी और रूट की ओर मुड़ जाता है। हवाई सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अमित सिंह ने कहा, ‘ज्यादातर जेट विमानों में, विमान नेविगेशन सिस्टम दिखाएगा कि विमान का इनर्शियल रेफरेंस सिस्टम (आईआरएस) स्थिति और जीपीएस स्थिति असहमत हैं। पायलटों को जीपीएस इनपुट को डिसेबल कर देना चाहिए। यदि वे असफल होते हैं और अपने रास्ते से हटते रहते हैं, तो एटीसी उन्हें सतर्क कर देगा। सिंह ने कहा कि UM688 एक व्यस्त मार्ग है। यह ईरानी और इराकी हवाई क्षेत्र के माध्यम से चलता है। यदि एक विमान को इस मार्ग पर स्पूफ किया जाता है, तो इससे अन्य विमानों के साथ टकराने का खतरा बढ़ सकता है
पश्चिम एशिया से यूरोप से अमेरिका के लिए यहां से अधिकांश मार्ग हैं। सक्रिय संघर्ष क्षेत्र हैं जिनमें सैन्य गतिविधि चल रही है और इसलिए उड़ान योजना से भटकना सुरक्षित नहीं है। निशाना बनाए गए पायलटों को आश्चर्यचकित करने वाली बात यह थी कि कैसे नकली जीपीएस सिग्नल आईआरएस को हेरफेर करने में सफल रहे। यह एक स्वतंत्र, स्टैंडअलोन सिस्टम है जो जीपीएस सिग्नलों की मदद के बिना स्थिति की गणना कर सकता है। इसका आधुनिक एयरलाइनर जेट विमानों में आईआरएस सिस्टम के काम करने के तरीके से बहुत कुछ लेना-देना है।
प्रत्येक विमान में 2-3 स्वतंत्र आईआरएस और दो स्वतंत्र जीपीएस रिसीवर होते हैं, जो विमान की स्थिति की गणना करते हैं। कई आधुनिक एयरलाइनर जेट विमानों में, आईआरएस और जीपीएस इनपुट का उपयोग ‘जीपीआईआरएस स्थिति’ की गणना के लिए किया जाता है। जब विमान की ओर से नकली जीपीएस सिग्नल प्राप्त होते हैं, तो एक गलत जीपीआईआरएस स्थिति की गणना की जाती है। कैप्टन सिंह ने कहा, ‘ फ्लाइट सिस्टम आईआरएस और जीपीएस सिग्नल के बीच असहमति दिखाएगी और यदि इस प्वाइंट पर चालक दल जीपीएस सिग्नल को निष्क्रय नहीं करता है, तो विमान को उसके वास्तविक रास्ते से हटा दिया जाएगा’
इराक ने फर्जी GPS सिग्नल से 20 विमानों को भटकाया, नैविगेशन सिस्टम भी फेल तो पायलट को लेनी पड़ी बगदाद ATC से मदद
एयरलाइंस से जुड़ी बहुत ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इरान एयरस्पेस ने बीते 15 दिनों में 20 एयरक्राफ्ट को फर्जी जीपीएस सिग्नल दिया। इन फर्जी जीपीएस सिग्नल से फ्लाइट्स भटकीं और आखिरकार एटीसी का सहारा लेकर फ्लाइट्स अपने गंतव्य तक पहुंच सकीं। इरान के ऊपर से गुजरने वाली ऐसी 20 एयरलाइन और कॉरपोरेट जेटों को फर्जी जीपीएस सिग्नल भेजकर निशाना बनाया गया। फर्जी जीपीएस संकेतों ने जिन विमानों को रोका, उनमें बोइंग 777,737 और 747 शामिल हैं। ओप्स ग्रुप एक फ्लाइट डेटा इंटेल क्राउडसोर्सिंग वेबसाइट चलाता है। उन्होंने पिछले सोमवार को कहा बोइंग 777 को टारगेट करके इतना आगे ले जाया गया कि चालक दल को बगदाद एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोलर) से पूछने के लिए मजबूर होना पड़ा, ‘समय क्या है, और हम कहां हैं।’ भारतीय वाहक एआई, इंडिगो और विस्तारा सैन फ्रांसिस्को, इस्तांबुल, बाकू और लंदन जैसे गंतव्यों के रास्ते में इस हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरते हैं। एआई और इंडिगो इन मार्गों पर 777 विमान संचालित करते हैं, जिसमें इंडिगो के 777 विमान तुर्की एयरलाइंस संचालित हैं।
जांच में खुलासा
फ्लाइट डेटा इंटेलिजेंस क्राउडसोर्सिंग वेबसाइट चलाने वाले ऑप्स ग्रुप के अनुसार, हाल ही में अधिकांश जीपीएस स्पूफिंग ईरान के हवाई क्षेत्र में वायुमार्ग यूएम688 में हुई। जवाब में, पिछले बुधवार को, यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने एयरलाइंस को ‘इराक/अजरबैजान-जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग पोज सेफ्टी रिस्क’ शीर्षक से एक ज्ञापन जारी किया। अमेरिकी नागरिक उड्डयन नियामक ने चेतावनी दी है कि इराक और अजरबैजान में विभिन्न नागरिक हवाई ऑपरेटरों की रिपोर्ट की गई संभावित स्पूफिंग गतिविधियों से बगदाद और बाकू उड़ान सूचना क्षेत्रों (एफआईआर) में नागरिक उड्डयन संचालन के लिए उड़ान जोखिम पैदा होता है। एक भारतीय वाहक के एक वरिष्ठ कमांडर ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि हम हवाई मार्ग यूएम688 पर उड़ान नहीं भरते हैं, लेकिन हम ईरानी हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरते हैं। हमने स्पूफिंग का अनुभव नहीं किया है, लेकिन पिछले हफ्ते एक उड़ान में, हमने जीपीएस जाम का अनुभव किया।
विमान नेविगेशन पर भरोसा
जीपीएस जैमिंग स्पूफिंग की तरह कपटी नहीं है, और एयरलाइंस और पायलट जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है। एक के लिए, फ्लिक एरिंग रीडिंग से तुरंत पता चलता है कि जीपीएस सिग्नल जाम हो रहे हैं। लंबी दूरी की उड़ानों में जी. पी. एस. जाम काफी नियमित है। हम उत्तरी ध्रुव से रूस में प्रवेश करते समय इसका सामना करते हैं या कह सकते हैं कि एस्टोनियाई सीमा के पास, सिम्फेरोपोल के आसपास इलाके में। जामिंग को संभालने के लिए कई चेकलिस्ट हैं। हम विमान के नेविगेशन सिस्टम पर भरोसा करते हैं जो जीपीएस से इनपुट नहीं लेता है।
बिजी रूट पर खतरनाक हरकत’
दूसरी ओर, स्पूफिंग तुरंत स्पष्ट नहीं है। विमान के जी. पी. एस. रिसीवर को यह नहीं पता है कि वह गलत जी. पी. एस. संकेत पढ़ रहा है, विमान की उड़ान प्रबंधन प्रणाली नकली जी. पी. एस. संकेतों को स्वीकार करती है और विमान को अपने इच्छित मार्ग से हटने के लिए पुनर्निर्देशित किया जाता है। वायु सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अमित सिंह ने कहा, ‘अधिकांश वाणिज्यिक विमानों में, विमान नेविगेशन प्रणाली दिखाएगी कि विमान की जड़त्वीय संदर्भ प्रणाली (आईआरएस) की स्थिति और जीपीएस की स्थिति असहमत है। पायलटों को जीपीएस इनपुट को अक्षम करना चाहिए। अगर वे ऐसा करने में विफल रहे और अपने रास्ते से हटते रहे, तो एटीसी उन्हें सचेत करेगा। यह कितना खतरनाक है? यूएम688 एक व्यस्त मार्ग है।’
‘एयरलाइंस को कर रहे टारगेट’
पश्चिम एशिया से यूरोप तक का अधिकांश यातायात यहां से यूएस मार्ग तक जाता है। सैन्य गतिविधि के साथ सक्रिय संघर्ष क्षेत्र चल रहे हैं और इसलिए उड़ान योजना से भटकना सुरक्षित नहीं है। जिस बात ने लक्षित पायलटों को आश्चर्यचकित कर दिया वह यह था कि कैसे नकली जीपीएस सिग्नल आईआरएस में हेरफेर करने में सफल रहे, जो एक स्वतंत्र, स्टैंडअलोन सिस्टम है जो जीपीएस सिग्नल की मदद के बिना स्थिति की गणना कर सकता है। इसका आधुनिक विमानों में आई. आर. एस. प्रणाली के काम करने के तरीके से बहुत कुछ लेना-देना है। प्रत्येक विमान में 2-3 स्वतंत्र आईआरएस और दो स्वतंत्र जीपीएस रिसीवर होते हैं, जो विमान की स्थिति की गणना करते हैं।







