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पहले सीमांचल अब मिथिलांचल फतह की तैयारी में कल अपने छठे दौरे पर बिहार आ रहे है अमित शाह

UB India News by UB India News
September 16, 2023
in दरभंगा, ब्लॉग, लोजपा
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पहले सीमांचल अब मिथिलांचल फतह की तैयारी में कल अपने छठे दौरे पर बिहार आ रहे है अमित शाह
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विपक्षी एकता का केंद्र बना बिहार देश के गृह मंत्री अमित शाह के निशाने पर है। यह इसलिए भी कि जिस तरह राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए के मैंडेट को ठुकरा कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थामा है उस प्रतिघात का जवाब अमित शाह बिहार से ही देने का एक तरह से संकल्प लिया है। सो, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इन दिनों बिहार पर फोकस रणनीति के ख्याल से जायज भी है। जैसे-जैसे 2024 लोकसभा नजदीक आ रहा है। वैसे-वैसे बिहार में उनके दौरे बढ़ रहे हैं। यही वजह भी है कि झंझारपुर का दौरा अमित शाह का छठा दौरा है।

अमित शाह कहां-कहां से किया हुंकार

अमित शाह का यह छठा दौरा है। सत्ता से बाहर होने के बाद अमित शाह का पहला दौरा 23 और 24 सितंबर 2022 को सीमांचल का हुआ। यहां से पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार साधने की कोशिश की। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 11 अक्टूबर 2022 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती सिताब दियारा गांव पहुंचे। अमित शाह ने यहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मिशन बिहार को धार दी बिहार में एनडीए की सरकार गिरने के बाद अमित शाह का यह दूसरा दौरा था।

अपने तीसरे दौर में 25 फरवरी 2023 को अमित शाह पहले वाल्मीकि नगर में जनसभा की। इसके बाद पटना में सहजानंद सरस्वती की जयंती सह किसान समागम में भाग लिया। वाल्मीकि नगर की जनसभा में उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी चंपारण को साधा। अमित शाह ने वाल्मीकि नगर और पटना की दोनों सभाओं में यह साफ कर दिया कि अब एनडीए में नीतीश कुमार की एंट्री बंद हो गई है।

इस दौरे में एक तरफ उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी चंपारण को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। वहीं, सहजानंद सरस्वती जयंती में भाग लेकर भूमिहार समाज को साधने का प्रयास किया। स्वामी सहजानन्द सरस्वती में भूमिहार समाज की बड़ी आस्था है। इसी को आधार बनाकर उन्होंने पटना में जनसभा की। अपने चौथे दौरे में अमित शाह 2 अप्रैल 2023 को आए तो थे बिहार के सासाराम और नवादा के लिए। पर धार्मिक विवाद का कारण सासाराम नहीं जा सके। लेकिन नवादा से हुंकार कर अमित शाह ने नवादा, जमुई, मुंगेर और खासकर गया लोकसभा सीट पर निशाना साधा। 29 जून को अमित शाह मुंगेर आए और यहां से मुंगेर, बेगुसराय, जमुई लोकसभा को साधा। लखीसराय इसलिए भी कि यहां से जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने बतौर एनडीए उम्मीदवार जीत दर्ज की थी।और अब यह अमित शाह की छठी यात्रा झंझारपुर की।

झंझारपुर लोकसभा का यथार्थ

बिहार को निशाने पर लिए अमित शाह का झंझारपुर का दौरा कई कारणों से महत्वपूर्ण है। दरअसल, अमित शाह ने पूरे भारत में कुल 160 सीट चिन्हित की है, जहां बीजेपी कमजोर है। उन 160 लोकसभा सीटों में बिहार के 10 लोकसभा सीटें हैं। इनमें एक झंझारपुर लोकसभा भी है। हालांकि झंझारपुर लोकसभा सीट गत लोकसभा चुनाव 2019 में जेडीयू के खाते में थी। और यहां से वर्तमान सांसद जेडीयू के रामप्रीत मंडल हैं। पर भाजपा यहां से साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत भी चुकी है। तब भाजपा के वीरेंद्र कुमार चौधरी ने जीत हासिल की थी। इसलिए झंझारपुर को जागृत करने आ रहे अमित शाह के निशाने पर पारंपरिक वोट के अलावा विशेष तौर से अतिपिछड़ा वोट बन गया है। खासकर उत्तरप्रदेश के घोसी सीट हारने के बाद भाजपा अतिपिछड़ा वोट बैंक के प्रति काफी सेंसिटिव हुई है।

दरभंगा और मधुबनी भी है निशाना

बिहार को लेकर जो रणनीति बनी है वह यह कि जो सीटें जीती गई है और जिस पर जेडीयू की जीत हुई है या वह सीट जिस पर बीजेपी पहले कभी जीती है, वह उनकी प्राथमिकता में है। गत लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी के जीत का प्रतिशत 100 फीसदी रहा था। बीजेपी 17 पर लड़ी और 17 जीती। इनमें दरभंगा और मधुबनी भी शामिल है।

दरभंगा से साल 2019 में बीजेपी के गोपाल जी ठाकुर ने जीत हासिल की थी। दरभंगा सीट पर बीजेपी का 1999, 2009, 2014 में कब्जा था। तब वहां से कीर्ति आजाद संसद थे। इस सीट पर आरजेडी और बीजेपी के बीच काफी कठिन संघर्ष चलता है। इसलिए बीजेपी झंझारपुर से दरभंगा के वोटरों को भी प्रभावित करेंगे।

मधुबनी लोकसभा पर भी 2019 में बीजेपी का का कब्जा था। यहां से हुकुमदेव यादव के पुत्र अशोक यादव ने जीत दर्ज की थी। इसके पहले भी बीजेपी उम्मीदवार हुकुमदेव यादव 1999, 2009, 2014 में जीत दर्ज की थी। 2004 लोकसभा में कांग्रेस के शकील अहमद ने जीत दर्ज की थी। इस जीत को बरकरार रखने के लिए भी झंझारपुर से

वैसे प्रदेश स्तर पर झंझारपुर सभा को लेकर तैयारी पूरी है। मिली जानकारी के अनुसार, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और प्रभारी विनोद तावड़े ने उनके आगमन के पहले कोर कमिटी की बैठक बुलाकर जमीनी रिपोर्ट ली है। साथ ही लोकसभा चुनाव और राज्य सरकार की राजनीतिक घेराबंदी को लेकर रणनीति को भी अमली जामा पहनाया है। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगमन से पहले इस बैठक में यह रिपोर्ट लिया जाएगा कि पार्टी की हर जिले और इलाके में क्या राजनीतिक फीडबैक है और वहां के नेता को लेकर जनता के बीच क्या कुछ चल रहा है। साथ ही केंद्रीय योजनाओं को लेकर भी फीडबैक लिया गया है। यह सब जानकारी अमित शाह को उपलब्ध कराई जायेगी। इसके बाद उम्मीदवारी से लेकर नीतिगत फैसले भी लिए जायेंगे।

विपक्षी एकता का केंद्र बना बिहार देश के गृह मंत्री अमित शाह के निशाने पर है। यह इसलिए भी कि जिस तरह राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए के मैंडेट को ठुकरा कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थामा है उस प्रतिघात का जवाब अमित शाह बिहार से ही देने का एक तरह से संकल्प लिया है। सो, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इन दिनों बिहार पर फोकस रणनीति के ख्याल से जायज भी है। जैसे-जैसे 2024 लोकसभा नजदीक आ रहा है। वैसे-वैसे बिहार में उनके दौरे बढ़ रहे हैं। यही वजह भी है कि झंझारपुर का दौरा अमित शाह का छठा दौरा है।

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अमित शाह कहां-कहां से किया हुंकार

अमित शाह का यह छठा दौरा है। सत्ता से बाहर होने के बाद अमित शाह का पहला दौरा 23 और 24 सितंबर 2022 को सीमांचल का हुआ। यहां से पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार साधने की कोशिश की। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 11 अक्टूबर 2022 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती सिताब दियारा गांव पहुंचे। अमित शाह ने यहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मिशन बिहार को धार दी बिहार में एनडीए की सरकार गिरने के बाद अमित शाह का यह दूसरा दौरा था।

अपने तीसरे दौर में 25 फरवरी 2023 को अमित शाह पहले वाल्मीकि नगर में जनसभा की। इसके बाद पटना में सहजानंद सरस्वती की जयंती सह किसान समागम में भाग लिया। वाल्मीकि नगर की जनसभा में उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी चंपारण को साधा। अमित शाह ने वाल्मीकि नगर और पटना की दोनों सभाओं में यह साफ कर दिया कि अब एनडीए में नीतीश कुमार की एंट्री बंद हो गई है।

इस दौरे में एक तरफ उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी चंपारण को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। वहीं, सहजानंद सरस्वती जयंती में भाग लेकर भूमिहार समाज को साधने का प्रयास किया। स्वामी सहजानन्द सरस्वती में भूमिहार समाज की बड़ी आस्था है। इसी को आधार बनाकर उन्होंने पटना में जनसभा की। अपने चौथे दौरे में अमित शाह 2 अप्रैल 2023 को आए तो थे बिहार के सासाराम और नवादा के लिए। पर धार्मिक विवाद का कारण सासाराम नहीं जा सके। लेकिन नवादा से हुंकार कर अमित शाह ने नवादा, जमुई, मुंगेर और खासकर गया लोकसभा सीट पर निशाना साधा। 29 जून को अमित शाह मुंगेर आए और यहां से मुंगेर, बेगुसराय, जमुई लोकसभा को साधा। लखीसराय इसलिए भी कि यहां से जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने बतौर एनडीए उम्मीदवार जीत दर्ज की थी।और अब यह अमित शाह की छठी यात्रा झंझारपुर की।

झंझारपुर लोकसभा का यथार्थ

बिहार को निशाने पर लिए अमित शाह का झंझारपुर का दौरा कई कारणों से महत्वपूर्ण है। दरअसल, अमित शाह ने पूरे भारत में कुल 160 सीट चिन्हित की है, जहां बीजेपी कमजोर है। उन 160 लोकसभा सीटों में बिहार के 10 लोकसभा सीटें हैं। इनमें एक झंझारपुर लोकसभा भी है। हालांकि झंझारपुर लोकसभा सीट गत लोकसभा चुनाव 2019 में जेडीयू के खाते में थी। और यहां से वर्तमान सांसद जेडीयू के रामप्रीत मंडल हैं। पर भाजपा यहां से साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत भी चुकी है। तब भाजपा के वीरेंद्र कुमार चौधरी ने जीत हासिल की थी। इसलिए झंझारपुर को जागृत करने आ रहे अमित शाह के निशाने पर पारंपरिक वोट के अलावा विशेष तौर से अतिपिछड़ा वोट बन गया है। खासकर उत्तरप्रदेश के घोसी सीट हारने के बाद भाजपा अतिपिछड़ा वोट बैंक के प्रति काफी सेंसिटिव हुई है।

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