रिलायंस इंड़स्ट्रीज के बोर्ड़ में बड़े़ बदलावों द्वारा नई पीढी के मुख्यधारा में आने का मार्ग बना दिया। नीता अंबानी बोर्ड़ ऑफ ड़ायरेक्टर्स से बाहर हो गइ। हालांकि वह रिलायंस फाउंडे़शन की चेयरपर्सन बनी रहेंगी। बोर्ड़ में अब ६६ साल के मुकेश अंबानी के तीनों बच्चों आकाश‚ अनंत व ईशा को नई जिम्मेदारी दी गई। वैसे इस फैसले के बाद कंपनी के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई। रिलायंस इंड़स्ट्रीज लिमिटेड़ के चेयरमैन व मैनेजिंग ड़ायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कंपनी की सालाना बैठक में बताया कि बीते दस साल में डे़ढ सौ अरब ड़ॉलर का निवेश किया। तीनों उत्तराधिकारी गैर कार्यकारी निदेशक नियुक्त किए गए हैं। खुद अंबानी जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन हैं। पिछले दिनों उन्होंने देश की सबसे बड़़ी मोबाइल कंपनी बन चुकी जियो इंफोकाम लिमिटेड़ का चेयरमैन सबसे बड़े़ बेटे आकाश को बनाने का रास्ता साफ किया था। अनंत को नए ऊर्जा कारोबार की जिम्मेदारी दी‚ जबकि ईशा को रिलायंस की खुदरा इकाई के लिए चुना। एशिया के सबसे बड़े़ उद्योगपति मुकेश असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्यों को तय करते हैं और उन पर सफलता हासिल करने के प्रति दृढतापूर्वक जुटे रहते हैं। अपने पिता धीरूभाई अंबानी के सपनों को सिर्फ साकार ही नहीं किया‚ बल्कि विश्व पटल पर शीर्ष दस धनाढों में मुकेश का नाम भी कई बार शामिल होता रहता है। पिछले दिनोें एयर फाइबर लांच करके दूर–दराज के इलाकों तक हाई स्पीड़ इंटरनेट पहुंचाने व ५जी कनेक्टिविटी की सुविधा की भी उन्होंने घोषणा भी। अंबानी अपनी अगली पीढी का मार्गदर्शन ही नहीं कर रहे‚ बल्कि लंबे समय से उन्हें लीड़र्स की तरह तैयार करने का काम भी कर रहे हैं। अपनी कंपनी की संस्कृति व विरासत को वे लगातार समृद्ध होते देखना चाहते हैं। इसीलिए नई पीढी को रोजाना मेंटर किया जाता रहा है। मुकेश कभी बड़़बोले नहीं रहे। बेहद शांतचित्त अपनी कंपनी को मुनाफे की तरफ ले जाते हुए‚ नए वेंचरों को आजमाते हैं। माना जा रहा है कि अपने पिता की गलती से उन्होंने गहरी सीख ली है। भाई अनिल के साथ हुए बंटवारे की तल्खियों को निश्चित ही वे भूले नहीं हैं। अपनी अगली पीढी को इस झंझट से बचाने की तैयारियां उन्होंने काफी समय से करना चालू कर दी थीं। आने वाला वक्त शीघ्र ही इस बदलाव की झलकियां पेश कर सकता है‚ जिसके आधार पर कंपनी ही नहीं‚ मुकेश उत्तराधिकारियों को उचित रूप से परख सकेंगे।
कैसे बिहार में बर्बाद हुए उद्योग, सरकार का नया प्लान क्या बदल पाएगा प्रदेश की तस्वीर?
कभी बिहार की पहचान उसकी चीनी और पेपर मिलों से होती थी. इन फैक्ट्रियों की चिमनियों से उठता धुआं सिर्फ...







