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बिहार : चुनावी मौसम में नेताओ के आचरण, वाणी और लेखन में संयम समाप्त हो जाता!

UB India News by UB India News
August 14, 2023
in खास खबर, पटना, बिहार, ब्लॉग
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बिहार : चुनावी मौसम में नेताओ के आचरण, वाणी और लेखन में संयम समाप्त हो जाता!
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चुनाव का मौसम आते ही हर दल या गठबंधन सपने में भी सत्ता पर खुद को काबिज हुआ पाता है। पहले से ही सत्ता में बैठे दल या दलों को पुनर्वापसी के सपने आते हैं तो विपक्ष को सत्ताधारी को बेदखल करने के। इनको सपने सिर्फ रात में ही सोते समय नहीं आते। वे दिन में भी सपनों में ही खोए रहते हैं। सपनों में वे इतने मशगूल होते हैं कि कब किसे क्या कहना है, इसकी मर्यादा का ख्याल भी नहीं रहता। आचरण, वाणी और लेखन (सोशल मीडिया) में संयम समाप्त हो जाता है। इन दिनों सत्ता पक्ष और विपक्ष का यही हाल है। हालांकि हम बात करेंगे सिर्फ बिहार की।

कभी रामचरित मानस को गाली, अब चौपाई का उदाहरण
इसे राजनीति का अजब-गजब खेल कह सकते हैं। रामचरित मानस को नफरती ग्रंथ बता कर कोसने वाले बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बारे में तो सबको पता है। वे रामचरित मानस को नफरती ग्रंथ बताते रहे हैं। अपने विभाग के अधिकारी केके पाठक से उलझते रहे हैं। अब तो उनका मानस परिवर्तन हो गया लगता है। इसलिए कि अब वे रामचरित मानस की चौपाई से लोगों को समझा रहे हैं। प्रसंग तो उन्होंने अच्छा उठाया कि ईश्वर ने आदमी को जातियों के खांचे में बांट कर धऱती पर नहीं भेजा। ईश्वर ने तो सिर्फ शरीर बनाया। चंद्रशेखर तुलसी दास के रामचरित मानस की चौपाई का उदाहरण देते हुए कहते हैं- छिति जल पावक गगन समीरा, पंच रचित अति अधम सरीरा। चलिए, पहले भले वे रामचरित मानस पर भले ही अनाप-शनाप बोलते रहे हों, पर अब उन्हें भी लगने लगा है कि रामचरित मानस की चौपाइयां-दोहे काम के हैं और उनमें ज्ञान की बातें कही गई हैं।

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बिहार में बीजेपी नेताओं का माथा भी घूम गया लगता है
बीजेपी के बारे में माना जाता है कि संस्कार संपन्न पार्टी है। उसके नेताओं के बोली-आचरण में ईमानदारी और शालीनता कूट-कूट कर भरी है। हालांकि विपक्षी दल ऐसा नहीं मानते। वे तो बीजोपी को कोसने का मौका तलाशते रहते हैं। पर, इस बार बिहार में बीजेपी के नेता फंस गए हैं। बीजेपी ने बिहार में जो काम किया है, वह या तो अतिविश्वास का परिणाम है या घोर नादानी की हद पार करना। बिहार में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने लोकसभा चुनाव में बिहार की सभी 40 सीटें जीतने के लिए 38 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। शुक्रवार को पटना की सड़कों के किनारे, चौक-चौराहों पर और पार्टी दफ्तर के पास ही कमेटी में शामिल नेताओं की तस्वीर के साथ बीजेपी ने पोस्टर लगवाए। यह बीजेपी के प्रचार का हिस्सा था, लेकिन प्रचार के बजाय उसकी स्थिति हास्यास्पद हो गई। हास्यास्पद इसलिए कि पोस्टर में जो तस्वीरें लगी थीं, उनमें एक फोटो आरजेडी नेता की और एक फोटो जेडीयू कोटे के एक मंत्री की थी। अब तो इस मुद्दे पर भाजपा विरोधी दोनों नेताओं ने थाने में अपनी तस्वीर के दुरुपयोग की रपट तक लिखा दी है।

JDU-BJP में रार, दोनों का दावा- हमारी वजह से जीते
डेढ़ दशक से अधिक समय तक गलबहियां डाले बीजेपी और जेडीयू में इन दिनों इस बात की भी होड़ लगी है कि किसकी वजह से किसकी सरकार बनती रही। किसकी वजह से किसकी जीत हुई। बीजेपी के नेता कहते हैं कि उसकी वजह से नीतीश जीतते रहे हैं या उसकी मदद से ही नीतीश सीएम बनते रहे हैं। नीतीश भी उसी अंदाज में तर्क देते हैं। दोनों के दावे में दम भी दिखता है। बीजेपी कहती है कि अकेले लड़ कर नीतीश ने 2014 के लोकसभा चुनाव का परिणाम देख लिया है। उनकी पार्टी जेडीयू दो सीटों पर सिमट गई थी। बीजेपी का कहना वाजिब है। नीतीश के 2013 में एनडीए छोड़ने के बाद अकेले बीजेपी ने 2014 में बिहार में 22 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जेडीयू को सिर्फ दो सीटें मिली थीं। नीतीश कुमार भी पीछे कैसे रहते। उन्होंने साल 2009 का उदाहरण दे दिया। तब जेडीयू ने 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 20 पर जीत हासिल की थी। नीतीश तो अपना दर्द भी सार्वजनिक कर देते हैं कि 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उनके खिलाफ एजेंट लगा दिया, इसलिए उनकी पार्टी को कम सीटें आईं। वे खुल कर चिराग पासवान का नाम तो नहीं लेते, लेकिन इशारा उन्हीं की ओर था। चिराग को नीतीश बीजेपी का एलाई नहीं, एजेंट कहते हैं।

चिराग पासवान को भी इतराने का नीतीश ने दिया मौका
नीतीश ने चिराग का भले नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा सीधे चिराग पासवान की ओर था। चिराग भी इस पर खूब इतराए या इतरा रहे होंगे कि किसी ने उन्हें इस काबिल तो समझा कि वे बना नहीं सकते, पर बिगाड़ने की ताकत तो रखते ही हैं। चिराग ने नीतीश कुमार को उनकी औकात बताने का साल 2020 में जो प्रण ठाना था, वह अब भी बरकरार है। वे कहते भी हैं कि जब तक बिहार की गद्दी से नीतीश को उतार नहीं देंगे, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। जेडीयू का मानना है कि चिराग की वजह से उसे कम से कम तीन दर्जन सीटों का विधानसभा में नुकसान हुआ।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एक मंत्री तक नहीं बनवा सकते
बिहार में मंत्री पद के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह अपने सीएम नीतीश कुमार से से अनुनय-विनय, आग्रह-अनुरोध करते रहे। लड़ते-झगड़ते और चिल्लाते रहे। हड़काया-धमकाया भी। यहां तक कि बात शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दी। इतने सारे कर्मों के बावजूद वे अपनी नाक नहीं बचा सके। सीएम नीतीश अभी तक मशविरा ही करते रहे हैं। लालू यादव से इशारों में नीतीश ने सलाह भी मांगी और राहुल गांधी से वादा भी कर दिया। उनसे यह भी जान लिया कि कितने लोगों को मंत्री बनाना है। उसके बावजूद कांग्रेस के संभावित मंत्री अपने प्रदेश अध्यक्ष के साथ इंतजार करते रह गए। बिहार में कांग्रेस का यह हाल तब है, जब कांग्रेस सरकार में शामिल है।

आरजेडी के नेता की बोली ऐसी कि उल्लू भी शरमा जाए
अब तो निरीह जानवर या पशु-पक्षी भी बिहार की सिय़ासी फिजां में उतर गए हैं। आरजेडी के एक बड़े नेता हैं भाई वीरेंद्र। लालू परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं। उन्हें बीजेपी का यह कथन नागवार लगा कि बिहार में कानून व्यवस्था खत्म हो गई है। बिहार की राजधानी पटना में जुलाई के 31 दिनों में 30 हत्याएं हुईं। औरतों पर जुल्म हो रहा है। भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाने वाले बीजेपी के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा के बारे में कह दिया- उन्हें कुछ दिखता है क्या ? उल्लू को दिन में दिखाई नहीं देता है। उसे रात में ही दिखता है। कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो उल्लू हैं। उन्हें सिर्फ रात में ही दिखाई देता है।

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