मणिपुर में पिछले 24 घंटे में हिंसक घटनाएं बढ़ गई हैं। कोउट्रुक हारोथेई और सेनजाम चिरांग में सुरक्षाकर्मियों और भीड़ के बीच फायरिंग हुई। जिसमें एक सुरक्षाकर्मी सहित 2 लोग घायल हो गए। बाद में एक की मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, भीड़ ने बिष्णुपुर के कीरेनफाबी और थंगलावई में पुलिस चौकी पर हमला किया और हथियारों, गोला-बारूद का जखीरा लूट लिया। भीड़ द्वारा मणिपुर राइफल्स की एक बटालियन से हथियार छीनने की भी कोशिश की गई। जिसे नाकाम कर दिया गया।
पुलिस ने बाद में कौट्रुक हिल रेंज में ऑपरेशन चलाकर सात अवैध बंकरों को नष्ट कर दिया है। हालांकि, ये बंकर किस समुदाय के हैं। इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है।
600 लोगों की भीड़ जमा, पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे
3 अगस्त को बिष्णुपुर और चुराचांदपुर जिलों के बीच की सीमा पर फौगाकचाओ इखाई में 500-600 लोगों की भीड़ इकठ्ठा हो गई। बिष्णुपुर के कांगवेई और फुगकचाओ में उपद्रवियों को संभालने के लिए आर्मी और RAF ने आंसूगैस का इस्तेमाल किया। भीड़ में महिला और पुरुष दोनों शामिल थे। यहां कर्फ्यू में दी गई ढील अब बंद कर दी गई है। पिछले 24 घंटे में पूरे मणिपुर से 347 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस ने 129 चौकियां बनाईं, 1000 से ज्यादा हिरासत में
मणिपुर के पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों में कुल 129 चौकियाँ स्थापित की गईं। पुलिस ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में उल्लंघन के सिलसिले में लगभग 1,047 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
मणिपुर में 3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा जारी है। हिंसा को 91 दिन बीत चुके हैं मगर हालात अभी भी सामान्य नहीं है। हिंसा में अब तक 160 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं एक हजार से ज्यादा लोग घायल हैं।
4 पॉइंट्स में जानिए क्या है मणिपुर हिंसा की वजह…
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इम्फाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।
मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।
नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इम्फाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।
सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।







