भारत ने सैफ फुटबाल में नवीं बार खिताब जीतकर अपनी बादशाहत को बरकरार रखा है। भारत ने फाइनल में कुवैत को सड़न डे़थ शूटआउट तक खिंचे मुकाबले में ५–४ से हराया। भारत की इस जीत के हीरो गोलकीपर गुरप्रीत संधू रहे। उन्होंने पेनल्टी शूटआउट में ४–४ की बराबरी रहने के बाद सड़न डे़थ में शानदार बचाव से भारत को जीत दिलाई। संधू की तरह ही सुनील क्षेत्री ने भी भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। वह इस चैंपियनशिप में सबसे ज्यादा छह गोल जमाने वाले खिलाड़़ी रहे। इस टूर्नामेंट में वह पाकिस्तान के खिलाफ हैट्रिक जमाने में भी सफल हुए थे। हर उपलब्धि अच्छी होती है‚ इसलिए यह भी खास है। पर सवाल यह है कि भारत को अपने से कम रैंकिंग वाली टीमों को हराने के बाद क्या इतराने की जरूरत है। सही है कि लेबनान और कुवैत जैसी टीमों को हराने से खिलाडि़़यों का मनोबल जरूर बढ़ता है। इस प्रदर्शन से यह भी साबित होता है कि कोच इगोर स्टिमेक की देखरेख में हम सही राह पर बढ़ø रहे हैं। पर भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश को इन सफलताओं से आगे देखने की जरूरत है। भारतीय टीम सितम्बर में चीन के हांगजू में होने वाले एशियाई खेलों में पोडि़यम पर चढ़ने में सफलता प्राप्त करती है तो समझा जाएगा‚ १९५० और १९६० के दशक में हासिल की प्रतिष्ठा को फिर से पाने के लिए जूझ रही है। भारत इस खेल में पिछले कुछ सालों में प्रदर्शन को बेहतर करके अपनी विश्व फुटबाल की रैंकिंग को सुधारने में सफल रही है। भारतीय टीम लंबे समय बाद टॉप सौ में शामिल करने में सफल रही है। भारत फुटबाल स्तर में सुधार के लिए आईएसएल का लंबे समय से आयोजन कर रहा है। भारत यदि एशियाई स्तर पर कुछ खास करना चाहता है‚ तो उसे अपनी सप्लाई लाइन को और मजबूत करना होगा। वैसे भी किस देश की सफलता युवाओं के आगे आने की रफ्तार पर बहुत कुछ निर्भर करती है। भारत ने पिछले कुछ समय से खिलाडि़़यों की फिटनेस पर खास ध्यान दिया है‚ यही वजह है कि हमारी टीम सैफ फुटबाल चैंपियनशिप के अपने आखिरी दो मैचों में २४० मिनट तक बिना किसी थकान के खेलने में सफल रही। इसके अलावा‚ युवाओं को आगे लाने की रफ्तार में थोड़़ा और सुधार किया जाए तो भारतीय प्रदर्शन को और सुधारा जा सकता है।
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ग्लास्गो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 खत्म हो गया है. इसी के साथ इस बात का आधिकारिक ऐलान हो गया...







