बिहार सरकार और राजभवन में तनातनी दिखने लगी है! शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के तेवर तल्ख हैं। सबसे बड़ा तनाव नई शिक्षा नीति को लेकर राजभवन और सरकार के बीच है। पहले तो बिहार सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने की बात कही थी लेकिन अब बिहार सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। वजह यह हो सकता है कि पहले सरकार के साथ भाजपा थी और अब भाजपा अलग है। राज्यपाल राजेन्द्र आर्लेकर बीजेपी कोटे से आए हैं।
शिक्षा मंत्री कह चुके हैं इस कारण से नई शिक्षा नीति अभी लागू नहीं हो सकती
हाल के दिनों में राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति लागू करने पर फोकस किया। जिसके अंतर्गत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है। लेकिन बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री ने साफ कह दिया है कि शिक्षकों, इंफ्रास्ट्रक्चर और धन की कमी है। इसलिए नई शिक्षा नीति बिहार में अभी लागू करना संभव नहीं है। चूंकि राज्यपाल ही कुलाधिपति यानी विश्वविद्यालयों के प्रधान होते हैं, इस नाते उनका जोर नई शिक्षा नीति को लागू करने पर है। लेकिन जब नीतीश कुमार ही इसे लागू करवाने के लिए तैयार नहीं हैं तो लागू करना कैसे संभव है।
दोंनों की अपनी-अपनी ताकत
तनातनी का दूसरा कारण यह है कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं! यह पहले भी दिख चुका है कि जब भी कोई कड़क अफसर शिक्षा विभाग के बड़े पद पर आ जाते हैं तो राजभवन के साथ तनातनी बढ़ जाती है। जब नीतीश सरकार ने के.के. पाठक को शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया तभी यह चर्चा तेज हो गई थी कि राजभवन के साथ तनातनी बढ़ना तय है! राजभवन का जोर इस पर रहता है कि विश्वविद्यालय को संचालित करने का अधिकार उसके पास है जबकि शिक्षा विभाग का मानना होता है कि सरकार वेतन देती है तो कई चीजों को मॉनिटर करने का अधिकार विभाग के पास है।
‘नई शिक्षा नीति और व्यवस्था सुधार को लेकर तनातनी’
वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार कहते हैं कि बिहार में गठबंधन और सरकार बदलने के साथ ही नीतीश सरकार और राजभवन के बीच नई शिक्षा नीति को लेकर तनातनी दिख रही है। राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षकों और बाकी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, इसलिए नई शिक्षा नीति को अभी लागू नहीं कर सकते। राजभवन इसे जल्द से जल्द लागू करवाना चाहता हैं। रजिस्ट्रारों की नियुक्ति को लेकर भी तनातनी शुरू है। जब भी शिक्षा विभाग में ईमानदार और अच्छे अधिकारी आते हैं तो राजभवन और सरकार के बीच तनातनी तेज हो जाती है। शिक्षा विभाग रजिस्ट्रार को बुलाकर शिक्षा व्यवस्था मेंं सुधार की बात कर रहा है, रिजल्ट जल्द देने की बात कर रहा है, नियिमित रूप से क्लास लेने को कह रहा है। पहले भी जब के.के. पाठक शिक्षा विभाग में आए थे तनातनी बढ़ी थी।







