भारत में पांच अक्टूबर से 19 नवम्बर तक खेले जाने वाले आईसीसी विश्व कप में परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों यानी भारत–पाकिस्तान का मुकाबला 15 अक्टूबर को नरेन्द्र मोदी स्टेडि़यम में होगा। क्रिकेट जगत का यह सबसे लोकप्रिय मुकाबला माना जाता है। यह मुकाबला देश के सबसे विशाल स्टेडि़यम में होगा‚ जहां सवा लाख से ज्यादा दर्शक मैदान में इसका लुत्फ उठा पाएंगे। इस बार विश्व कप के ४८ मुकाबले १० शहरों में होंगे। भारत में अभी तक क्रिकेट की राजधानी का दर्जा मुंबई और कोलकाता को हासिल था। पर लगता है कि अब यह दर्जा अहमदाबाद को हासिल हो गया है। यही वजह है कि वहां उद्घाटन और फाइनल के अलावा विश्व कप के सबसे लोकप्रिय भारत– पाक मुकाबले का आयोजन होगा। यही नहीं‚ इंग्लैंड़ और ऑस्ट्रेलिया की प्रतिद्वंद्विता को भी यही केंद्र भुनाएगा। आयोजक शहरों की सूची में से मोहाली नदारद नजर आ रहा है। यहां २०११ के विश्व कप का सेमीफाइनल हुआ था। पर इसका चयन नहीं करने के बारे में एक बीसीसीआई अधिकारी का कहना है कि वह आईसीसी के मापदंड़ों पर खरा नहीं उतर सका। पर इस बात में दम नहीं है। असल में मौजूदा समय में बीसीसीआई में जिस राज्य के पदाधिकारी होते हैं‚ उन्हें अहमियत मिल जाती है। मोहाली की तरह ही नागपुर भी इस दौड़़ में पिछड़़ गया है। इस बार लखनऊ और धर्मशाला नए केंद्र के रूप में जुड़े़ हैं। भारतीय टीम दस आयोजन केंद्रों में से नौ शहरों में जाकर अपने मैच खेलेगी। यह इस लिहाज से तो अच्छा है कि भारत के खेलने से उस केंद्र की कमाई अच्छी हो जाएगी पर टीम को हर मैच के लिए एक अलग विकेट पर खेलना नुकसानदायक भी हो सकता है। सबसे कम पांच केंद्रों पर पाकिस्तान के मैच रखे गए हैं। वहीं सेमीफाइनल मुंबई और कोलकाता में खेले जाने हैं। भारत यदि सेमीफाइनल में पहुंचता है तो वह मुंबई में खेलेगा। पाकिस्तान सेमीफाइनल में पहुंचता है तो वह कोलकाता में खेलेगा। यदि दोनों सेमीफाइनल में पहुंचते हैं तो मैच कोलकाता में होगा। भारतीय टीम घर में खेलकर लंबे समय से आईसीसी ट्रॉफी से दूरी को खत्म करने का प्रयास करेगी। भारत की टीम ने आखिरी बार २०१३ में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी‚ इसके बाद से आईसीसी ट्रॉफी से उसकी दूरी बनी हुई है।
क्या यूजीसी के नाम पर सवर्णों को क्या डर?
1990 का साल था. देश में राम लहर चल रही थी. इस राम लहर के बीच केंद्र की वीपी सिंह...







