पटना में आयोजित दो दिवसीय लेबर२० शिखर सम्मेलन में सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टबिलिटी पर जी२० सदस्य देशों और अन्य आमंत्रित देशों के बीच एक बहुपक्षीय तंत्र विकसित करने का संकल्प लिया गया।
लेबर२० शिखर सम्मेलन के संपन्न होने के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एल–२० के अध्यक्ष एवं भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष हिरण्मय पंड¬ा ने संयुक्त वक्तवय जारी करते हुए कहा कि शिखर सम्मेलन में श्रम के अंतर्राष्ट्रीय प्रवास –सामाजिक सुरक्षा निधि की अंतर्राष्ट्रीय पोर्टबिलिटी पर टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा गया कि वर्तमान में अधिकांश देश भेजने और प्राप्त करने वाले देशों के बीच द्विपक्षीय समझौतों के तहत पोर्टबिलिटी की अनुमति देते हैं। १८‚ १९ और २० मार्च २०२३ को अमृतसर में आयोजित लेबर२० की आरंभिक बैठक में श्रम जगत के ज्वलंत मुद्ों से संबंधित ५ टास्क फोर्स का गठन किया गया था जिसमें सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा‚ महिलाएं और श्रम का भविष्य‚ अंतर्राष्ट्रीय श्रम का प्रवासन‚ सामाजिक सुरक्षा निधि की अंतर्राष्ट्रीय पोर्टबिलिटी‚ श्रम की बदलती दुनियाः जी२० देशों में रोजगार के नए अवसर और चुनौतियां‚ और कौशल विकासःहिस्सेदारों की भूमिका और जिम्मेदारियां।
उन्होंने विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सामाजिक सुरक्षा निधियों की अंतर्राष्ट्रीय पोर्टबिलिटी पर टास्क फोर्स ने सिफारिश की कि सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों की दक्षता के लिए प्रवासियों की संवेदनशीलता और जरूरतों पर डेटा एकत्र किया जाना चाहिए और उसका विश्लेषण किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित राष्ट्रीय डेटा का पृथक्करण‚ नागरिकता और निवास की स्थिति को प्रवासी स्थिति के विश्वसनीय संकेतक के रूप में विकसित करने की भी आवश्यकता है। इससे हस्तांतरणीय लाभों के संभावित वित्तीय प्रभावों की गणना और श्रमिक प्रवासियों के प्रभावी या वास्तविक सामाजिक सुरक्षा कवरेज के अनुमान में सुविधा मिलेगी। शिखर सम्मेलन ने व्यापक विचार–विमर्श के बाद महत्वपूर्ण प्रवासी प्राप्त करने वाले और प्रवासी भेजने वाले देशों के बीच एक बहुपक्षीय समझौते का प्रस्ताव रखा‚ जो समग्रीकरण के साथ–साथ निर्यात क्षमता को भी सुनिश्चित करेगा जिससे प्रवासी श्रमिकों को लाभ मिलेगा। साथ ही इस बात पर भी चर्चा की गई कि ट्रेड यूनियनों को नए प्रकार के काम में लगे श्रमिकों के सामने आने वाले मुद्ों को प्राथमिकता देनी चाहिए। रोजगार में पुनः प्रवेश को बढावा देने के लिए श्रम बाजार नीतियों को डिजाइन करने की आवश्यकता है। श्रमिकों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए‚ राज्य को उन कार्यों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है जो केयर एक्टिविटीज का समर्थन करते हैं और केयर इकनॉमी के अंतर्गत श्रमिक सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम स्थापित करते हैं। इसके अतिरिक्त‚ व्यक्तियों को इस क्षेत्र में उभरते अवसरों का प्रचुर लाभ उठाने में सक्षम बनाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शिखर सम्मेलन में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि किसी भी संकट की स्थिति में महिलाएं हमेशा सबसे अधिक प्रभावित होती हैं।
सामाजिक सुरक्षा के लिए मानव–केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया है। अखिल भारतीय अध्यक्ष हिरण्मय पंड¬ा ने कहा कि आगामी श्रम और रोजगार मंत्री की बैठक के साथ–साथ सितम्बर में होने वाले जी २० नेताओं के शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया। प्रेस वार्ता में प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो के अपर महानिदेशक एसके मालवीय‚ भारतीय मजदूर संघ के मीडिया समन्वयक सह भारतीय मजदूर संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार उपस्थित थे।







