एनसीपी चीफ शरद पवार ने अपने भजीते अजीत पवार को एक ही झटके में चित कर दिया है। मराठा छत्रप ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले और पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। सुले को पार्टी ने पंजाब और हरियाणा की भी जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, प्रफुल्ल पटेल को मध्यप्रदेश गुजरात समेत 5 राज्यों का प्रभारी भी बनाया गया गया है। कुछ समय पहले ही शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, पार्टी नेताओं के दबाव में उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया था।
किसे कौन सी मिली जिम्मेदारी
अपने निर्णय की घोषणा करते हुए शरद पवार ने कहा कि हम प्रफुल्ल पटेल के कंधे पर कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे रहे हैं। इसके साथ ही उनके पास मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, गोवा की जिम्मेदारी दे रहे हैं। पटेल पार्टी के राज्यसभा का भी काम देखेंगे। पवार ने कहा कि दूसरी जिम्मेदारी सांसद सुप्रिया सुले को दी जा रही है। उनको भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की जाती है। उनके पास हरियाणा, पंजाब, यूपी और लोकसभा का कोऑर्डिनेशन का काम रहेगा।
पार्टी को लेकर साफ है रणनीति
शरद पवार राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। वह हर कदम बेहद सोच समझ कर उठाते हैं। पवार अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अभी से पार्टी में टिकट बंटवारों के लेकर स्थिति साफ कर चुके हैं। पवार ने इस महीने के शुरू में साफ कर दिया था कि अगले लोकसभा चुनाव में टिकटों के बंटवारे के दौरान ‘जीत की संभावना’ के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। पवार ने इस महीने पार्टी की एक समीक्षा बैठक भी की थी। बैठक में पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को फटकारते हुए कहा था कि कि अगर इकाई में अंतर कलह जारी रहा तो वह कार्रवाई करेंगे।
अब अजित पवार क्या करेंगे? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि उनके चाचा शरद पवार ने अपनी पार्टी एनसीपी को चलाने के लिए दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए हैं और अजित पवार को ये पद नहीं दिया है। एनसीपी का कार्यकारी अध्यक्ष पद शरद पवार ने अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले और पुराने वफादार प्रफुल्ल पटेल को दिया है। आखिरकार, शरद पवार ने अध्यक्ष पद छोड़ने का अपना फैसला वापस तो लिया, लेकिन अब दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।
इस खबर के लिखे जाने तक शरद पवार के ताजा फैसले के बारे में अजित पवार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, बीते दिनों खबर ये भी फैली थी कि अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से दाम छुड़ाकर बीजेपी के साथ जा सकते हैं। अटकलें लग रही थीं कि अजित के साथ एनसीपी के काफी विधायक भी हैं और बीजेपी उनको महाराष्ट्र का सीएम पद सौंप सकती है। इस खबर का अजित ने कभी खंडन तो नहीं किया, लेकिन बीच-बीच में उनका मोबाइल आउट ऑफ रीच होता रहा। वैसे अजित ने बीजेपी के साथ जाने की अटकलों को उस वक्त खारिज कर दिया था, लेकिन अब सबकी नजर इस पर है कि एनसीपी में कार्यकारी अध्यक्ष न बनाए जाने पर अजित क्या करते हैं।
अजित पवार को महाराष्ट्र के कद्दावर नेताओं में गिना जाता है। हालांकि, उनकी ये पहचान अपने चाचा शरद पवार की वजह से है। आमतौर पर अजित पवार को शरद पवार और अपनी बहन सुप्रिया सुले के साथ अच्छे मूड में ही देखा जाता रहा है। तीनों के बीच करीबी सार्वजनिक तौर पर नजर आती रही है। फिर भी शरद पवार ने अजित को एनसीपी का कार्यकारी अध्यक्ष नहीं बनाया। क्या ये माना जाए कि शरद पवार अपने भतीजे पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं? या अजित के लिए उन्होंने कुछ और बड़ा काम सोच रखा है?







