ल्ली में उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का झगड़ा एक बार फिर सामने आ गया। गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के ईस्ट दिल्ली कैंपस का उद्घाटन होना था। सक्सेना और केजरीवाल दोनों उद्घाटन के लिए पहुंच गए। दोनों ने मिलकर उद्घाटन तो कर दिया लेकिन इस दौरान जमकर हंगामा हुआ। बीजेपी और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद जब ऑडिटोरियम में भाषण शुरू हुआ तो वहां भी नारेबाजी शुरू हो गई। केजरीवाल ने माइक संभाला तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हूटिंग की। जबाव में आम आदमी पार्टी के लोगों ने भी नारे लगाए। कैंपस को लेकर दोनों पक्षों के अपने अपने दावे हैं। इस कैंपस को बनाने का फैसला 2013 में हुआ था, तब केजरीवाल दिल्ली के सीएम नहीं थे। दिसंबर 2014 में इसका शिलान्यास तब की मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने किया था। कैंपस बनाने में 387 करोड़ रुपये लगे। दिल्ली सरकार की तरफ से 41 करोड़ रुपये दिए गए। आम आदमी पार्टी का दावा है कि भले ही इसका शिलान्यास केंद्र ने करवाया हो लेकिन इसे बनवाया दिल्ली सरकार ने है। मुझे लगता है विश्व विद्यालय के कैंपस के उद्घाटन के अवसर को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए था। दोनों पार्टियों के समर्थकों को इस समारोह में नारे लगाने की जरूरत नहीं थी। उपराज्यपाल ने उद्घाटन किया, मुख्यमंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया, तो इतनी हाय तौबा किस बात की? कैंपस का उद्घाटन कौन करता है, इससे वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को क्या फर्क पड़ता है? ध्यान तो इस बात पर देना चाहिए था कि कैंपस में पढ़ने वालों को और पढ़ाने वालों को अच्छी सुविधाएं मिल पाती हैं या नहीं।
नीट-यूजी पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को जड़ से बदलने का अवसर……………
भारत की परीक्षा व्यवस्था इन दिनों अपने सबसे बड़े मंथन के दौर से गुजर रही है। गत दिनों नीट-यूजी 2026...







