ADVERTISEMENT
Sunday, July 26, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

अभी नहीं तो कभी नहीं … 12 जून को पटना में जुटेंगे बिपक्ष

UB India News by UB India News
May 30, 2023
in खास खबर, ब्लॉग, मुख्यमंत्री
0
अभी नहीं तो कभी नहीं … 12 जून को पटना में जुटेंगे बिपक्ष
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

2024 के लोकसभा चुनाव में अभी एक साल बचे हुए हैं, लेकिन बीजेपी को परास्त करने के लिए कांग्रेस सहित देश की सभी विपक्षी पार्टियां एक प्लेटफॉर्म पर आने का प्रयास कर रही हैं. 12 जून को पटना में देश की सभी विपक्षी पार्टियों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) बैठक करेंगे. बैठक को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं .

अभी नहीं तो कभी नहीं’. और विपक्ष यह जानता है. लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक साझा उम्मीदवार का विचार बिखरे विपक्ष में अपनी जगह तेजी से बना रहा है. इसके कारण क्षेत्रीय दल इस बात पर तेजी से एकजुट हो रहे हैं कि कांग्रेस को उनकी सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने से परहेज करना चाहिए. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से लेकर उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव तक, सभी क्षेत्रीय नेताओं को लगता है कि कांग्रेस को उन सीटों पर ही टिके रहना चाहिए जो वह निश्चित रूप से जीत सकती है.

RELATED POSTS

क्या पेपरलीक केवल कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नीतिगत विफलता का परिणाम है ……………….

पेपर लीक पर बढ़ते बवाल के आगे झुकी सरकार, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा………………….

इन दलों का मानना है कि कांग्रेस को सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करके माहौल को खराब नहीं करना चाहिए. बहरहाल जहां इस तरह का तर्क कांग्रेस आलाकमान को समझ में आ सकता है, मगर इसे राज्य की इकाइयों को समझाने और यहां तक कि इसके लिए राजी करने के लिए फुसलाने की भी जरूरत पड़ सकती है. 2024 के आम चुनावों में एक साझा विपक्षी उम्मीदवार का प्रस्ताव पटना में 12 जून को विपक्ष की बैठक से पहले बिहार के मुख्यमंत्री और जद (यू) नेता नीतीश कुमार ने रखा है. 22 मई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात में कुमार ने विपक्ष का एक उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर जोर दिया.

सीटों का बंटवारा होगी बड़ी चुनौती
विपक्ष के साझा उम्मीदवार के विचार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी समर्थन दिया और कांग्रेस को कर्नाटक चुनाव में जीत पर बधाई दी. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि ‘संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार का समय आ गया है.’ बहरहाल 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले इसी तरह के प्रस्ताव का कोई नतीजा नहीं निकला था. लेकिन इस बार इसके बारे में उन अधिकांश दलों के बीच सैद्धांतिक सहमति है, जो बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बड़ा आधार रखते हैं. ये राज्य लोकसभा में बड़े पैमाने पर सांसद भेजते हैं. मगर सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे की उस योजना की होगी, जो सभी को मंजूर हो.

कई राज्यों में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों में सीधा टकराव
पश्चिम बंगाल में टीएमसी नहीं चाहेगी कि कांग्रेस उन सीटों पर उम्मीदवारों को खड़ा करे, जिन्हें वह जीत सकती है. ममता के गढ़ मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी का मामला ऐसे ही पेचीदा मुद्दों में एक है. इसी तरह उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को लगता है कि कांग्रेस बस वोट बर्बाद करेगी और यह सबसे अच्छा है कि वह ज्यादातर सीटों पर चुनाव नहीं लड़े. कांग्रेस के लिए इस विचार को मानने की सीमित संभावना है. सपा ने अमेठी और रायबरेली में वर्षों से यही प्रस्ताव सामने रखा है, जो इन लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के जीत हासिल करने के कारणों में से एक है.

AAP को लेकर कांग्रेस में मतभेद
मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि ‘हम कम से कम 450 सीटों पर एक विपक्षी उम्मीदवार के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं. यह कार्य प्रगति पर है.’ इसमें सबसे बड़ी बाधा कांग्रेस की अपनी राज्य इकाइयां होंगी. केंद्र सरकार के दिल्ली पर हाल के अध्यादेश के उदाहरण से इसे देखा जा सकता है. भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ आम आदमी पार्टी के पक्ष में कांग्रेस सहित विपक्ष की एकता का विचार पंजाब और दिल्ली इकाइयों के लिए बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है. जिन्हें अरविंद केजरीवाल की 10 साल पुरानी पार्टी ने चुनावों में हरा दिया था.

इस विपक्षी एकता की बैठक को 10 प्वाइंट्स में समझिए.

1) अभी लोकसभा चुनाव में एक साल बचे हुए हैं और यह पहली बैठक है, इसलिए इस बैठक से कोई निर्णय निकलने की संभावना नहीं बन सकती है. यह बैठक एक औपचारिक मात्र है. इस बैठक से यह दिखाना है कि बीजेपी के खिलाफ देश के सभी विपक्ष एकजुट हो चुके हैं. इसके बाद अभी कई बैठकें होंगी.

2) बीजेपी के खिलाफ सभी को एकजुट होने के लिए तीन स्टेज हैं. अभी बैठक की शुरुआत होने जा रही है. इसके बाद सीटों के बंटवारा पर बात होगी. कॉमन मिनिमम प्रोग्राम और प्रधानमंत्री का चेहरा तय होना है. इन तीनों प्रमुख बातों पर अगर सबकी सहमति एक तरह बनी तो संभव हो सकता है, परंतु ऐसा होना असंभव दिख रहा है.

3) सबसे बड़ी समस्या सीटों के बंटवारे पर हो सकती है. लोकसभा की कुल 543 सीटों में लगभग ढाई सौ से ज्यादा सीटों पर क्षेत्रीय दलों का कब्जा है. बात बिहार की करें तो जेडीयू-आरजेडी का कब्जा है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ऐसे कई राज्य हैं. कांग्रेस चाहेगी कि 300 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े, लेकिन कांग्रेस जहां चाहेगी वहां संभव भी नहीं होगा कि उसे वह सीट मिल सकती है.

4) कई राज्य ऐसे भी हैं जहां क्षेत्रीय दलों का सीधे कांग्रेस से टक्कर है. आम आदमी पार्टी का दिल्ली और पंजाब में कब्जा है और कांग्रेस से लड़ाई होती है. ममता बनर्जी की सीपीआई और कांग्रेस से लड़ाई होती है, समाजवादी पार्टी कांग्रेस के लिए सीट छोड़ने को तैयार नहीं है. तो सीट बंटवारे के वक्त ही सबसे बड़ी समस्या पैदा हो सकती है.

5) दूसरी समस्या प्रधानमंत्री के चेहरे की है. बिहार के अलावा देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां क्षेत्रीय दल मजबूत है और बड़े नेता भी हैं. ऐसे में कई दल नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री का चेहरा स्वीकार नहीं कर सकते हैं. खुद कांग्रेसी भी नीतीश कुमार को या किसी को भी प्रधानमंत्री के चेहरे के रूप में स्वीकार नहीं कर सकती है.

6) बीजेपी को हराने के लिए सभी भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट होकर वन टू वन फाइट करना होगा जो इतना आसान नहीं है. हालांकि किसी भी सूरत में यूपीए चुनाव के पहले प्रधानमंत्री का चेहरा नहीं घोषित कर सकती है क्योंकि इससे परेशानी और बढ़ेगी और यह बीजेपी के लिए फायदेमंद भी होगा.

7) नीतीश कुमार ने सभी को एकजुट करने के लिए अगुवाई की है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि यह कांग्रेस के कन्वेनर के रूप में काम कर रहे हैं क्योंकि अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव कांग्रेस से सीधे बात नहीं कर सकते थे. इसलिए नीतीश कुमार को आगे किया गया है, लेकिन यह कितना सफल होगा वह वक्त बताएगा.

8) 12 जून को पटना में होने वाली बैठक में प्रधानमंत्री के चेहरे के रूप में नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगेगी? तेजस्वी बिहार की कमान संभालेंगे? इसका सीधा जवाब है नहीं. राजनीतिक जानकार अरुण पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री का चेहरा नीतीश कुमार को बनाया भी जाता है तो मुख्यमंत्री के पद को छोड़ना कोई जरूरी नहीं है.

9) बीजेपी से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाया गया था उस समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे. प्रधानमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री के पद से उन्होंने इस्तीफा दिया था. यह कहीं से कानून नहीं है कि चेहरा बनने पर पद छोड़ना पड़ सकता है. नीतीश कुमार ने यह कहा है कि 2025 में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा लेकिन उससे पहले तेजस्वी का मुख्यमंत्री बनने का कोई दूर-दूर तक रास्ता नहीं दिख रहा है.

10) हालांकि तेजस्वी यादव या लालू प्रसाद यादव इस पर ज्यादा उतावले नहीं हैं. जेडीयू-आरजेडी दोनों पार्टी के कुछ नेता कभी-कभी ऐसा बोल देते हैं लेकिन लालू परिवार किसी भी सूरत में नीतीश को खफा करके कोई काम नहीं कर सकता है क्योंकि वे सत्ता में बने हुए हैं यह उनके लिए सबसे बड़ी बात है. क्योंकि नीतीश कुमार अगर बीजेपी का साथ नहीं छोड़ते तो वह विपक्ष में ही अब तक रहते इसलिए 2025 के पहले तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलना अभी असंभव दिख रहा है.

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज, सीजेपी प्रवक्ता का दावा- दीपके को हिरासत में लिया

क्या पेपरलीक केवल कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नीतिगत विफलता का परिणाम है ……………….

by UB India News
July 26, 2026
0

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल लिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। इससे...

पेपर लीक पर बढ़ते बवाल के आगे झुकी सरकार, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा………………….

पेपर लीक पर बढ़ते बवाल के आगे झुकी सरकार, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा………………….

by UB India News
July 26, 2026
0

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया. जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से भी...

जंतर-मंतर पर पथराव, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोल दागे:कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल

जंतर-मंतर पर पथराव, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोल दागे:कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल

by UB India News
July 26, 2026
0

NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन के खत्‍म होने के आसार फिलहाल...

जेपी मूवमेंट से कितना अलग CJP प्रदर्शन?

जेपी मूवमेंट से कितना अलग CJP प्रदर्शन?

by UB India News
July 25, 2026
0

दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब महीने भर से चल रहा काक्रोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब राष्ट्रव्यापी विस्तार ले...

गुजरात में बाढ़ का कहर!

गुजरात में बाढ़ का कहर!

by UB India News
July 25, 2026
0

दक्षिण गुजरात के एक बड़े हिस्से में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रभावित इलाकों...

Next Post
भारतीय रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट जारी , FY24 में GDP ग्रोथ 6.5% रहने की उमीद

भारतीय रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट जारी , FY24 में GDP ग्रोथ 6.5% रहने की उमीद

बृजभूषण के खिलाफ पहलवानों ने खोला नया मोर्चा, गंगा में बहाएंगे मेडल, करेंगे आमरण अनशन

बृजभूषण के खिलाफ पहलवानों ने खोला नया मोर्चा, गंगा में बहाएंगे मेडल, करेंगे आमरण अनशन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend