पीएम मोदी ने नए संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित किया है। हवन-पूजन के कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने सेंगोल को दंडवत प्रणाम किया और उसे लोकसभा में स्पीकर के आसन के पास स्थापित किया। इसके बाद पीएम मोदी ने संसद भवन के निर्माण में काम करने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया।
नए भवन का उद्घाटन वैदिक विधि विधान और सर्व धर्म प्रार्थना के साथ किया गया. पीएम ने यहां ‘सेंगोल’ को भी स्थापित किया. इस दौरान पीएम के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद थे. हालांकि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कुछ विपक्षी दलों ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया. वहीं बीजेपी के साथ ही बीजू जनता दल, तेलुगुदेशम, बसपा और वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों ने इस समारोह का समर्थन किया.
नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के खास पल
- रविवार को सुबह-सुबह सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नए संसद भवन परिसर में हवन-पूजन किया गया. 7:30 बजे शुरू हुई पूजा के अवसर पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी मौजूद थे.
- प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के शृंगेरी मठ के पुजारियों द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर आशीर्वाद देने के लिए देवताओं का आह्वान करने के लिए ‘गणपति होम’ किया.
- इस अवसर पर PM नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु से आए शैव पुरोहितों से सेंगोल स्वीकार किया, उसे साष्टांग दण्डवत किया, और फिर उसे लोकसभा भवन में स्थापित किया. सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया गया.
- नया संसद भवन राष्ट्र को समर्पित किए जाने के अवसर पर केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, विदेशमंत्री एस. जयशंकर, विज्ञान एवं तकनीक मंत्री जितेंद्र सिंह, कई राज्यों के मुख्यमंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा भी उपस्थित थे.
- नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन श्रमिकों को सम्मानित किया, जिनका योगदान संसद भवन के निर्माण में रहा है.
- भव्य उद्घाटन समारोह के दौरान सर्व धर्म प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया, जिसके दौरान अनेक राज्यों से अनेक भाषाओं में परमात्मा का स्मरण किया गया.
- संसद का अब तक प्रयोग होता रहा भवन वर्ष 1927 में बनाया गया था, और अब उसकी आयु 96 वर्ष हो चुकी है. पिछले काफी अरसे से पुराने संसद भवन को आज की ज़रूरतों के मुताबिक अपर्याप्त माना जा रहा था.
- नए संसद भवन में लोकसभा चैम्बर में 888 तथा राज्यसभा चैम्बर में 300 सदस्य बैठ सकते हैं. संसद के संयुक्त अधिवेशन के लिए लोकसभा चैम्बर में 1,280 सांसदों को बिठाया जा सकता है.
- टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा निर्मित नए संसद भवन में भारत की लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए भव्य संविधान कक्ष, सांसदों के लिए लाउंज, पुस्तकालय, समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और पर्याप्त पार्किंग स्थान है.
- त्रिभुज के आकार में बनी चार-मंज़िला इमारत में 64,500 वर्ग मीटर का निर्मित क्षेत्र है. इसमें तीन मुख्य द्वार – ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार – हैं. यहां सांसदों, VIP और आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार हैं.
नए संसद भवन के उद्घाटन की पूर्व संध्या पर मंत्रोच्चार के बीच सेंगोल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया. पीएम मोदी अपने दिल्ली स्थित आवास पर अधिनाम महंत से मिले और उनका आशीर्वाद लिया. साथ ही पीएम मोदी ने सेंगोल को “उचित सम्मान” नहीं देने के लिए कांग्रेस पर कटाक्ष किया. पीएम मोदी ने कहा, “… अच्छा होता अगर पवित्र सेंगोल को आजादी के बाद उचित सम्मान और एक सम्मानजनक स्थान दिया जाता, लेकिन इस सेंगोल को प्रयागराज के आनंद भवन में एक छड़ी के तौर पर प्रदर्शन के लिए रखा था. आपके सेवक और हमारी सरकार सेंगोल को आनंद भवन से बाहर लाई है.”

कर्तव्य मार्ग से विचलित नहीं होगा’
अधिनम के महंतों से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा, “तमिल परंपरा में शासन चलाने वाले को सेंगोल दिया जाता था, सेंगोल इस बात का प्रतीक था कि उसे धारण करने वाले व्यक्ति पर देश के कल्याण की जिम्मेदारी है और वो कभी कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होगा.”
वीडियो साझाा करने का आग्रह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते शुक्रवार को कहा था कि नया संसद भवन हर भारतीय को गौरवान्वित करेगा. उन्होंने नवनिर्मित परिसर का एक वीडियो भी साझा किया. PM मोदी ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट करते हुए लोगों से ‘माई पार्लियामेंट माई प्राइड’ हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए अपने ‘वॉयसओवर’ के साथ वीडियो साझा करने का भी आग्रह किया था.
त्रिकोणीय संसद भवन, तीन मुख्य द्वार
त्रिकोणीय आकार के चार मंजिला संसद भवन का निर्माण क्षेत्र 64,500 वर्गमीटर है. इस इमारत के तीन मुख्य द्वार- ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार हैं.
भारतीय संस्कृति के दर्शाता नया संसद भवन
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के कालीन, त्रिपुरा के बांस के फर्श और राजस्थान के पत्थर की नक्काशी के साथ नया संसद भवन भारतीय संस्कृति की विविधता को भी दर्शाएगा. सरकार इस ऐतिहासिक समारोह को यादगार बनाने के लिए 75 रुपये का सिक्का जारी करेगी.
अपडेट्स…
- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नई संसद की क्या जरूरत थी? पुरानी इमारत ऐतिहासिक थी। मैंने बार-बार कहा है कि सत्ता में बैठे लोग इस देश का इतिहास बदलकर रख देंगे। ऐसे में आज नीति आयोग की बैठक में भाग लेने और कल संसद के इनॉगरेशन में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है।
- प्रधानमंत्री मोदी नए संसद भवन के इनॉगरेशन के मौके पर 75 रुपए का सिक्का जारी करेंगे। सिक्के के एक तरफ अशोक स्तंभ का सिंह होगा, जिसके नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा होगा। वहीं, बाईं ओर देवनागरी लिपि में ‘भारत’ और दाईं ओर अंग्रेजी में ‘इंडिया’ शब्द लिखा होगा।
नए भवन में त्रिपुरा के बांस की फ्लोरिंग, सीलिंग की संरचना दमन-दीव से मंगाई गई
नए संसद भवन में देश के हर क्षेत्र की झलक देखने को मिलेगी। इसकी फ्लोरिंग त्रिपुरा के बांस से की गई है। कालीन मिर्जापुर का है। लाल-सफेद सैंड स्टोन राजस्थान के सरमथुरा का है। वहीं निर्माण के लिए रेत हरियाणा के चरखी दादरी से और भवन के लिए सागौन की लकड़ी नागपुर से मंगाई गई है।
भवन के लिए केसरिया हरा पत्थर उदयपुर, लाल ग्रेनाइट अजमेर के पास लाखा और सफेद संगमरमर राजस्थान के ही अंबाजी से मंगवाया गया है। लोकसभा और राज्यसभा की फाल्स सीलिंग में लगाई गई स्टील की संरचना दमन-दीव से मंगाई गई है। वहीं, संसद में लगा फर्नीचर मुंबई में तैयार किया गया। पत्थर की जाली का काम राजस्थान के राजनगर और नोएडा से करवाया गया।

संसद के बाहर लगा अशोक चक्र इंदौर का
प्रतीक चिह्न अशोक स्तंभ के लिए सामग्री महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से बुलाई गई। वहीं लोकसभा-राज्यसभा की विशाल दीवार और संसद के बाहर लगा अशोक चक्र इंदौर से मंगाया गया है।
पत्थर की नक्काशी का काम आबू रोड और उदयपुर के मूर्तिकारों ने किया है। पत्थर राजस्थान के कोटपूतली से लाए गए। फ्लाई ऐश ईंटें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मंगवाई गईं, जबकि पीतल के काम और सीमेंट के बने-बनाए ट्रेंच अहमदाबाद से लाए गए।
नई संसद का पहला वीडियो जारी हुआ था
नई संसद के इनॉगरेशन में अब एक दिन बचा है। इससे पहले शुक्रवार को पहला वीडियो जारी किया गया था। वीडियो की शुरुआत एंट्री गेट से होती है। फिर गुंबद पर लगा अशोक चिन्ह और बाहरी दीवारें इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा का दृश्य नजर आता है।
लोकसभा और राज्यसभा स्पीकर की सीट के पीछे विशाल अशोक चक्र हैं। लोकसभा के कालीन पर मोरपंख की डिजाइन हैं। ऐसी ही प्रतीकात्मक डिजाइन सदस्यों के डेस्क पर बनी है। हर डेस्क पर स्क्रीन लगी हैं।
पीएम मोदी ने माय संसद माय प्राइड हैश टैग के साथ वीडियो शेयर करते हुए लिखा- नई संसद हर भारतीय को गौरवांवित करती है। यह वीडियो संसद की भव्यता को दर्शाता है। लोगों से अपील की कि अपने विचारों और वॉयस ओवर के साथ इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करें। इनमें से कुछ अच्छे वीडियो को वे रीट्वीट करेंगे।
आइए जानते हैं नई संसद के निर्माण में कहां-कहां से मंगवाया गया सामान:-
– नई संसद के लिए सागौन (टिक वुड) की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से मंगाई गई है.
-सैंडस्टोन यानी बलुआ पत्थर (लाल और सफेद) राजस्थान के सरमथुरा से खरीदा गया है.
-नई संसद के लिए कार्पेट उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से मंगवाए गए.
-त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से बांस की लकड़ी की फ्लोरिंग मंगवाई गई है.
-स्टोन जाली वर्क्स राजस्थान के राजनगर और उत्तर प्रदेश के नोएडा से लिए गए हैं.
-अशोक प्रतीक को महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से मंगवाया गया है.
-नई संसद के लिए अशोक चक्र को मध्य प्रदेश के इंदौर से लिया गया है.
-नई संसद भवन के लिए कुछ फर्नीचर मुंबई से भी मंगाए गए थे.
-लाल लाख राजस्थान के जैसलमेर से लिया गया है.
-राजस्थान के अंबाजी से सफेद संगमरमर पत्थर खरीदे गए हैं.
-केसरिया ग्रीन स्टोन राजस्थान के उदयपुर से मंगवाया गया है.
-पत्थर की नक्काशी का काम आबू रोड और उदयपुर से लिया गया. कुछ पत्थर राजस्थान के कोटपूतली से भी मंगवाए गए
-एम-सैंड को हरियाणा के चकरी दादरी, फ्लाई ऐश ब्रिक्स को एनसीआर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से खरीदा गया था.
-ब्रास वर्क और प्री-कास्ट ट्रेंच गुजरात के अहमदाबाद से लिए गए.
-एलएस/आरएस फाल्स सीलिंग स्टील संरचना दमन और दीव से ली गई.







