अखिलेश प्रसाद सिंह को दिसंबर 2022 में बिहार कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन वे अब तक बिहार प्रदेश कमेटी का गठन नहीं कर पाए है। इसकी वजह है कि आईसीसी मेंबर और डेलिगेट्स बनाए जाने के बाद काफी विवाद शुरू हो गया। चर्चा है कि कमेटी गठन होने के बाद फिर विवाद शुरू नहीं हो जाए।
कमेटी का गठन कब होगा? इस पर प्रदेश अध्यक्ष का यही जवाब है कि जल्द ही कमेटी गठित कर लिया जाएगा। लेकिन यह ‘जल्दी’ दिख नहीं रही है। अखिलेश प्रसाद सिंह की छवि फैसला लेने वाले नेता की रही है। केंद्र से राज्य तक की राजनीति में वे हिस्सेदार रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें कमेटी गठन में सोचना पड़ रहा है।
अखिलेश का मूड भांपना मुश्किल
इसकी चर्चा खूब है कि प्रदेश कमेटी का गठन होते ही कांग्रेस में गुटबाजी तेज हो जाएगी। इसका असर 2024 लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है। अखिलेश प्रसाद सिंह के बारे में कहा जाता है कि उनका मूड भांपना मुश्किल है। वे जल्द ही बड़ा फैसला ले सकते हैं। कमेटी गठन में हो रही विलंब से नेतृत्व पर सवाल उठने लगा है।
23 को लौट रहे हैं अखिलेश
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अखिलेश प्रसाद सिंह 23 मई को दिल्ली से लौट रहे हैं। कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि इस बार वे कुछ खास करेंगे। कमेटी में दो महत्वपूर्ण पद होते हैं उपाध्यक्ष और महासचिव। इस पर सभी की नजर है। अखिलेश चाहेंगे कि किसी विश्वासी को उपाध्यक्ष और महासचिव पद दें, ताकि पार्टी चलाने में दिक्कत नहीं हो। कमेटी में उपाध्यक्ष, महासचिव के अलावा सचिव, संयुक्त सचिव आदि महत्वपूर्ण पद हैं।
संगठन नहीं बनने से क्या नुकसान हो रहा
अखिलेश प्रसाद सिंह से पहले डॉ. मदन मोहन झा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। वे चार वर्षों से अधिक समय तक बिहार प्रदेश के अध्यक्ष रहे, लेकिन कमेटी नहीं बना पाए। कांग्रेस को बिना कमेटी के चलाते रहे। इससे कांग्रेस का संगठन कमजोर होता गया। स्थिति यह है कि कांग्रेस में सेकेंड और थर्ड लाइन लीडरशिप खड़ी नहीं हो पा रही है।
इंटरनल पॉलिटिक्स का असर है
कमेटी गठन नहीं करना कांग्रेस की इंटरनल पॉलिटिक्स का हिस्सा है। इसकी वजह है कि चुनाव में टिकट बांटना हो या फिर कोई अन्य काम में हंगामा हो जाता है। कई बार मारपीट की नौबत आ जाती है। अखिलेश प्रसाद सिंह कांग्रेसी नहीं हैं। वे बाहरी हैं। इसलिए पुराने कांग्रेसी अखिलेश प्रसाद सिंह को पचा नहीं पा रहे हैं।
दूसरी बड़ी बात यह है कि कांग्रेस या बीजेपी जैसी पार्टियों में कमेटी का गठन दिल्ली से तय होता है। कांग्रेस की नेशनल कमेटी का भी गठन होना है। इंटरनल पॉलिटिक्स की वजह से कांग्रेस की प्रदेश कमेटी नहीं बन पा रही। अखिलेश सिंह अपनी ही कुर्सी बचाने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।







