ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी (BBC) के प्रमुख और बेहद लोकप्रिय फुटबॉल हाइलाइट्स शो ‘मैच ऑफ द डे’ को शनिवार को बीच में रोक कर हटाना पड़ा. इसकी वजह यह रही कि इस शो के प्रेजेंटर गैरी लिनेकर (Gary Lineker) के निलंबन के बाद फुटबॉल विशेषज्ञों और कमेंटेटर्स ने शो में शामिल होने से मना कर दिया. 1999 से शो को प्रेजेंट कर रहे गैरी लिनेकर को शुक्रवार को उनकी एक ट्वीट के कारण निलंबित कर दिया गया. लिनेकर ने यूके सरकार के गृह सचिव के अवैध अप्रवासियों से निपटने के बयान की तुलना जर्मनी में नाजी दौर से कर दी थी. इसके बाद बीबीसी की निष्पक्षता पर छिड़े विवाद के बीच उनसे शो से हटने को कहा गया. इस शो का 1964 में पहली बार प्रसारण हुआ था. ‘मैच ऑफ द डे’ दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला फुटबॉल टेलीविजन कार्यक्रम है, जो ब्रिटेन में एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है. शनिवार को पहली बार इसे बिना किसी प्रेजेंटर, फुटबॉल विशेषज्ञ या कमेंट्री के प्रसारित किया गया था. नतीजतन शो निर्धारित समय से पहले ही रोक दिया गया. हंगामा इस कदर बढ़ गया है कि ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक (Rishi Sunak) तक को बयान जारी कर कहना पड़ा कि उम्मीद है कि विवाद जल्द सुलझा लिया जाएगा. बीबीसी के इस विवाद पर भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने भी तंज कसा है. उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट कर बीबीसी की प्रेस स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए. जानते हैं कि आखिर गैरी लिनेकर कौन हैं, यह पूरा विवाद क्या है और किस तरह इसने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी के इतिहास में एक बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया है.
गैरी लिनेकर से जुड़ा विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ
इस पूरे विवाद की शुरुआत गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन के ‘एनफ इज इनफ’ वीडियो से हुई. इस 78 सेकंड के वीडियो में सुएला ने कहा, ‘हमें अब नावों को रोकना होगा. ब्रिटेन अप्रवासियों के बोझ तले दबा जा रहा है.’ इसके साथ ही सुएला ब्रेवरमैन ने एक अप्रवासी कानून को घोषणा की, जो अनधिकृत अप्रवासियों को राष्ट्र में रहने से रोकेगा. ब्रेवरमैन ने कहा, ‘ऐसे अप्रवासियों को उनके गृह राष्ट्र या रवांडा जैसे किसी सुरक्षित तीसरे देश में वापस भेज दिया जाएगा.’ इस बयान की गैरी लिनेकर ने जर्मनी के नाजी दौर से तुलना कर दी. इसका बाद लिनेकर को फ्लैगशिप प्रीमियर लीग हाइलाइट्स शो पेश करने से रोक दिया गया. गौरतलब है कि गैरी लिनेकर अपने घरों में शरणार्थियों को रख चुके हैं. उन्होंने ट्वीट की, ‘हे भगवान, यह भयानक से परे है.’ लिनेकर ने आगे कहा, ‘अप्रवासियों की यह कोई बड़ी आमद नहीं है. हम अन्य प्रमुख यूरोपीय देशों की तुलना में बहुत कम शरणार्थियों को लेते हैं. यह भाषा में सबसे कमजोर लोगों को निशाना बनाती एक बेहद क्रूर नीति है, जो 30 के दशक में जर्मनी द्वारा उपयोग की जाने वाली नाजी भाषा से भिन्न नहीं है?’
गैरी लिनेकर से जुड़ा विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ
इस पूरे विवाद की शुरुआत गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन के ‘एनफ इज इनफ’ वीडियो से हुई. इस 78 सेकंड के वीडियो में सुएला ने कहा, ‘हमें अब नावों को रोकना होगा. ब्रिटेन अप्रवासियों के बोझ तले दबा जा रहा है.’ इसके साथ ही सुएला ब्रेवरमैन ने एक अप्रवासी कानून को घोषणा की, जो अनधिकृत अप्रवासियों को राष्ट्र में रहने से रोकेगा. ब्रेवरमैन ने कहा, ‘ऐसे अप्रवासियों को उनके गृह राष्ट्र या रवांडा जैसे किसी सुरक्षित तीसरे देश में वापस भेज दिया जाएगा.’ इस बयान की गैरी लिनेकर ने जर्मनी के नाजी दौर से तुलना कर दी. इसका बाद लिनेकर को फ्लैगशिप प्रीमियर लीग हाइलाइट्स शो पेश करने से रोक दिया गया. गौरतलब है कि गैरी लिनेकर अपने घरों में शरणार्थियों को रख चुके हैं. उन्होंने ट्वीट की, ‘हे भगवान, यह भयानक से परे है.’ लिनेकर ने आगे कहा, ‘अप्रवासियों की यह कोई बड़ी आमद नहीं है. हम अन्य प्रमुख यूरोपीय देशों की तुलना में बहुत कम शरणार्थियों को लेते हैं. यह भाषा में सबसे कमजोर लोगों को निशाना बनाती एक बेहद क्रूर नीति है, जो 30 के दशक में जर्मनी द्वारा उपयोग की जाने वाली नाजी भाषा से भिन्न नहीं है?’
अनुराग ठाकुर की बीबीसी को खरी-खरी
बीबीसी की गुजरात दंगों पर विवादास्द डॉक्यूमेंट्री की याद दिलाते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर को जमकर आड़े हाथों लिया. बीबीसी की पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते अनुराग ठाकुर ने गैरी लिनेकर की दो खबरों को शेयर कर कटाक्ष किया. उन्होंने ट्वीट किया, ‘यह देखना बेहद दिलचस्प है कि पत्रकारिता की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर बड़े-बड़े दावे करने वाले बीबीसी ने अपने स्टार एंकर को उनकी सोशल मीडिया टिप्पणी को लेकर निलंबित कर दिया.’ एक के बाद एक की गई कई ट्वीट में अनुराग ठाकुर ने यह भी लिखा कि बीबीसी ने समाज के एक वर्ग को नाराज नहीं करने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण रोक दिया. फर्जी फैक्ट्स से प्रोपेगेंडा करने वालों से नैतिक समझ या पत्रकारिता की आजादी की उम्मीद नहीं की जा सकती. अनुराग ठाकुर यह कहने से भी नहीं चूके कि फर्जी नेरेटिव बनाना और नैतिक पत्रकारिता अपने आप में ही परस्पर विरोधाभासी हैं.







