इस साल 9 राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. महाराष्ट्र में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक दल के नेता बालासाहेब थोराट ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. थोराट के इस्तीफे की खबर से कांग्रेस पार्टी में हड़कंप मच गया है. आपको बता दें कि बालासाहेब थोराट ने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले के साथ काम करने के साफ इनकार कर दिया था. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि महाराष्ट्र कांग्रेस में गुटबाजी अपने चरम पर पहुंच चुकी है. इसके साथ ही पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले की आलोचना भी जोरों पर है.
कुछ दिन पूर्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट ने महाराष्ट्र कांग्रसे के प्रमुख नाना पटोले के साथ काम करने में असमर्थता जताते हुए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखा है. ऐसा उनके प्रति पटोले की नाराजगी की वजह से है. थोराट के एक सहयोगी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने पत्र में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रमुख और राज्य के पूर्व मंत्री थोराट ने यह भी कहा है कि यहां फैसले लेने से पहले उनसे सलाह नहीं ली जाती है.
यह मामला तब सामने आया है जब थोराट के बहनोई और नासिक के तत्कालीन एमएलसी सुधीर तांबे ने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार होने के बावजूद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया और अपने बेटे सत्यजीत तांबे को निर्दलीय चुनाव लड़वाया. दो फरवरी को परिणाम घोषित हुआ और सत्यजीत तांबे चुनाव जीत गए. सूत्रों ने बताया कि जहां इस प्रकरण के कारण कांग्रेस को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, वहीं कंधे की चोट से उबर रहे थोराट की चुप्पी को ताम्बे पिता-पुत्र की जोड़ी के मौन समर्थन के रूप में देखा गया.
हालांकि, थोराट ने 30 जनवरी को होने वाले चुनावों में सत्यजीत तांबे के अभियान में भाग नहीं लिया लेकिन थोराट के कई रिश्तेदार मौजूद थे. एमएलसी चुनाव में हुए इस उलट पलट के लिए कांग्रेस ने सुधीर तांबे और सत्यजीत तांबे को पार्टी से निलंबित कर दिया है. थोराट ने कांग्रेस नेतृत्व को लिखे अपने पत्र में प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के साथ काम करने में असमर्थता जताते हुए कहा है कि अगर पटोले को उनके खिलाफ इतना गुस्सा है तो उनके साथ काम करना मुश्किल होगा. थोराट के करीबी ने यह भी दावा किया कि निर्णय लेने के दौरान उनसे सलाह नहीं ली जा रही है.
पत्र का हवाला देते हुए सहयोगी ने बताया कि थोराट ने यह भी कहा है कि प्रदेश के पार्टी नेतृत्व ने उनका अपमान किया और ताम्बे के मुद्दे पर उनके परिवार के खिलाफ बयान दिए गए. खड़गे को लिखे पत्र में आगे कहा गया है कि अहमदनगर के कुछ पदाधिकारियों को इस मुद्दे पर दंडित किया गया था. पटोले ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ को देखते हुए 26 जनवरी को कांग्रेस की अहमदनगर जिला समिति को भंग कर दिया था, क्योंकि इसके कुछ सदस्यों ने कांग्रेस के आधिकारिक रूप से समर्थित उम्मीदवार के बजाय सत्यजीत तांबे के लिए प्रचार किया था.







