मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिंदू धर्म ग्रंथ रामचरितमानस पर शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर द्वारा दिये गये विवादास्पद बयान पर मंगलवार को साफ शब्दों में कहा कि धर्म के मामले में किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए ।
समाधान यात्रा पर मंगलवार को अरवल पहुंचे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों द्वारा इस संबंध में पूछे गये सवाल पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा‚ ‘कहां कोई विवाद है‚ यह सब फालतू चीज है। इन सब चीजों पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने कहा‚ ‘हमलोगों का दृष्टिकोण है कि किसी भी धर्म को मानने वाला कोई भी हो‚ उसके धर्म के मामले में किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग जिस ढंग से अपने धर्म का पालन करते हैं‚ उन्हें करने देना चाहिए। सब को इज्जत मिलनी चाहिए और इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने इस बात पर यहीं विराम लगाने के अंदाज में कहा‚ ‘हमने तो पहले ही उन्हें (चंद्रशेखर) समझा दिया है और अब तो उपमुख्यमंत्री ने भी इस बारे में कह दिया है। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने हाल ही में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा था कि मनुस्मृति‚ रामचरितमानस और गुरु गोलवलकर का बंच ऑफ थॉट्स समाज को बांटने वाली पुस्तक है। उनके इस बयान की खूब आलोचना हो रही है। मुख्यमंत्री कहा कि प्रदेश का विकास और जीविका दीदियों को सशक्त बनाना मेरी पहली प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का बड़े पैमाने पर विकास हुआ है। इसका दायरा और व्यापक हो‚ इसके लिए हमलोग प्रयासरत हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सोनवर्षा पंचायत के वार्ड़ नम्बर १२ में हुए विकास कार्यों का निरीक्षण किया और कहा कि गांवों में नल–जल योजना चल रही है और शिक्षा और स्वास्थ्य की अच्छी सुविधा दी गयी है। अब गांवों की गलियां सोलर लाइट से रोशनी होंगी। मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों का निरीक्षण करने के साथ–साथ आम जनमानस से संवाद भी किया। उन्होंने जीविका समूहों द्वारा लगाये गये स्टॉल का भी मुआयना किया।
उन्होंने सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत २२ परिवारों के लिए ५ लाख ८४ हजार १०० रुपये की राशि का सांकेतिक चेक जीविका दीदियों को प्रदान किया। भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामवासियों की समस्याएं भी सुनीं और उसके यथाशीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया।







