आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की संजीदगी कितनी है‚ यह हर मुल्क जान और समझ चुका है। यही वजह है कि आतंकी फंडिं़ग के खिलाफ वैश्विक सम्मेलन में पड़़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुक्रवार को शुरू हुआ‚ जिसमें ७३ देशों व छह संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। ‘नो मनी फॉर टेरर’ सम्मेलन में वैसे तो चीन को भी न्योता गया था मगर उसकी रजामंदी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। बहरहाल‚ चीन की भी फितरत आतंकवाद के पोषण और समर्थन की रही है। चीन ने तो एक नहीं बल्कि सैकड़़ों बार विश्व मंच और बिरादरी में पाकिस्तान का बचाव किया है। जबकि उसके यहां उइगर मुस्लिम समुदाय को लेकर यह धारणा है कि चीन खुद आतंकवाद से पीडि़़त है। खैर‚ भारत में आतंकी फंडिं़ग के स्रोेत के बारे में एजेंसियों की ओर से तैयार रिपोर्ट में पाकिस्तान की ओर से कश्मीर‚ खालिस्तान समर्थक आतंकवाद को वित्तीय मदद की बात कही गई है। तफ्तीश में इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि पाकिस्तान इन तीन क्षेत्रों में आतंकी संगठनों को फंडिंग करता है। साफ है कि पाकिस्तान का आचरण आतंकवाद को लेकर बेहद लचर‚ लापरवाही भरा और साजिशपूर्ण है। दरअसल‚ आतंकवाद का मसला सिर्फ भारत से जुड़़ा नहीं है। यह तो दुनिया भर के लिए नासूर बन चुका है और कमोबेश हरेक देश इससे किसी–न–किसी रूप में प्रभावित हैं। इस नाते फंडिं़ग रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही सभी देशों को समग्र रूप से ब्लू प्रिंट बनाकर इस भयावह खतरे से निपटने की दरकार आन पड़़ी है। खासकर भारत की एकता और अखंड़ता को इससे बड़़ा खतरा है। मसलन पिछले आठ वर्षों में कश्मीर‚ नक्सल‚ इस्लामिक आतंकवाद और पूर्वोत्तर भारत के सभी क्षेत्रों में आतंकी घटनाओं में कमी आई है‚ लेकिन यहां सक्रिय संगठनों को फंडिं़ग जारी रहना निश्चित तौर पर भविष्य के लिए बड़़ा खतरा साबित हो सकता है। आतंकवाद और नक्सलवाल को समूल नष्ट करने के लिए उसकी फंडिं़ग जुटाने के लिए इंटरनेट मीडि़या प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी अगर अमन की स्थापना जरूरी है तो समय रहते इस समस्याओं से पार पाना होगा और सभी देशों को ईमानदारी से आतंकवाद का जड़़–मूल से नाश करने का संकल्प लेना होगा।
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