बिहार में राजद के अंदर चल रही खींचतान का अंत हो जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बहुत जल्द राजद नेतृत्व जगदानंद सिंह पर फैसला ले लेगा। जगदानंद सिंह अपने बेटे पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद से कार्यालय नहीं आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसी सप्ताह इस पर फैसला हो जाएगा। लालू यादव इस बात पर ध्यान देने लगे हैं और बहुत जल्द पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा। सिंगापुर जाने से पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पार्टी से संबंधित सभी पेंडिंग फाइल को निबटा लेना चाहते हैं। इसके लिए वो पार्टी नेता तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव इलाज के लिए सिंगापुर जाने से पहले प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बड़ा फैसला ले सकते है. हालांकि, यह खबर भी सामने आ रही है कि लालू प्रसाद यादव अंतिम बार जगदानंद सिंह को मनाने की भी कोशिश करेंगे. अगर वे तैयार नहीं होते हैं तो अगले एक सप्ताह के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर फैसला लिया जा सकता है.
क्या जगदानंद सिंह अध्यक्ष पद से हटाए जा सकते हैं?
प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह अंतिम बार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन प्रदेश कार्यालय आए थे. लेकिन, इसके बाद प्रदेश कार्यालय नहीं आए हैं. जगदानंद सिंह की नाराजगी की मुख्य वजह कृषि मंत्री और पुत्र सुधाकर सिंह का इस्तीफा और नितिन कुमार का 2023 में मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का बयान माना जा रहा है.
जगदानंद सिंह को अध्यक्ष पद से हटाना आसान नहीं
वहीं, दूसरी ओर राजद के सामने दुविधा की स्थिति है. दरअसल, जगदानंद सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के कुर्सी से हटाने का फैसला पार्टी के लिये बड़ा फैसला साबित हो सकता है. जगदानंद सिंह राजद और लालू के साथ हर अच्छे और बुरे वक्त में साथ खड़े रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष रहते जगदानंद सिंह ने कई बड़े फैसले लिए और राजद में अनुशासन कायम किया है.
किस नेता को मिल सकती है प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी?
प्रदेश अध्यक्ष के पद से अगर जगदानंद सिंह को हटाया जाता है तो राजद को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो ना सिर्फ संगठन को समझता हो, बल्कि संगठन को मजबूती से चला सकने की क्षमता रखता हो. इसके साथ ही वह लालू परिवार का विश्वस्त भी हो. इसके लिए कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है. नये प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में अब्दुल बारी सिद्दकी, उदय नारायण चौधरी, तनवीर हसन नामों को लेकर चर्चा जारी है.
चर्चा तो यह भी है कि पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटबैंको में बिखराव को देखते हुए मुस्लिम प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर भी फैसला हो सकता है. खास तौर पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के बढ़ते प्रभाव की काट खोजने के लिए राजद यह फैसला ले सकता है. हालांकि, सबकुछ जगदानंद सिंह के अगले रुख पर निर्भर करता है.






