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उत्तर-दक्षिण की संस्‍कृतियों, परंपरा, खानपान और शैलियों का संगम तो होगा ही………..

UB India News by UB India News
November 18, 2022
in अध्यात्म
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उत्तर-दक्षिण की संस्‍कृतियों, परंपरा, खानपान और शैलियों का संगम तो होगा ही………..
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ऐतिहासिक नगरी काशी आज से भारत की दो पौराणिक संस्कृतियों के मिलन की गवाह बनने जा रही है। भारतीय सनातन संस्‍कृति के दो पौराणिक केंद्र विश्‍वेश्‍वर और रामेश्‍वर के मिलन के लिए काशी नगरी तैयार है। एक महीने तक चलने वाले काशी-तमिल संगमम में इस बार एक भारत श्रेष्‍ठ भारत की थीम है। इसी थीम पर काशी को भी सजाया जा रहा है। इस मौके पर उत्तर-दक्षिण की संस्‍कृतियों, परंपरा, खानपान और शैलियों का संगम तो होगा ही, तमिलनाडु के 12 प्रमुख मठों के महंतों को सम्‍मानित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह ऐसा दांव साबित हो सकता है, जो 2024 लोकसभा की तैयारी में जुटे राहुल गांधी की कोशिश पर पानी फेर सकता है।

देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी भी देश की दो संस्कृतियों के संगम में सम्मिलित होंगे। काशी हिंदू विश्‍वविद्यालय (बीएचयू) के एम्फीथिएटर मैदान में बनाए गए भव्‍य पंडाल में 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में तमिल संगमम का उद‌्घाटन होगा। 2024 आम चुनावों को लेकर जहां एक और कांग्रेस के राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी दक्षिण को अपनी प्राथमिकता में रखा हुआ है। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने कोई यात्रा नहीं बल्कि तमिल भाषियों को उत्तर भारत से मिलाने का प्लान तैयार किया है।

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आज से शुरू होकर अगले एक महीने तक करीब 3 हजार तमिल भाषी लोग काशी आएंगे और अपनी तमिल संस्कृति को काशी के लोगों के साथ साझा करेंगे। इस कार्यक्रम का महत्व क्या है, इस बात से समझा जाता है कि इसमें शिरकत करने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 नवंबर को काशी आ सकते हैं। प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की तैयारियां तेज कर दी गई है। बीएचयू के एंफीथियेटर ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा भी प्रस्तावित है।

17 नवंबर से लेकर 16 दिसंबर तक काशी में तमिल भाषी लोगों का जमावड़ा लगेगा। इस कार्यक्रम में एक महीने तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एंफीथियेटर ग्राउंड में तमिलनाडु के अलग-अलग क्षेत्र के लोग अपनी कला और संस्कृति का परिचय काशी के लोगों से कराएंगे। वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा भी संभावित है। इसी जनसभा स्थल को का निरीक्षण करने के लिए वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने शनिवार को दौरा कर निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबतपुर एयरपोर्ट से सीधे हेलीकॉप्टर से बीएचयू के हेलीपैड आएंगे और वहां से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे।

एक महीने तक तमिल संस्कृति से परिचित होंगे काशी वासी
बीएचयू के एंफीथियेटर ग्राउंड में तमिलनाडु से जुड़ी खानपान, क्राफ्ट, वहां के छोटे उद्योग धंधों से जुड़े उत्पाद, कला संस्कृति से जुड़े स्टॉल लगाए जाएंगे। इस पूरे परिक्षेत्र में काशी के लोग आकर के तमिलनाडु के सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में जानकारी भी ले सकेंगे। इस पूरे एक माह के दौरान यहां पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे जोकि आमजनों के लिए भी होगा। काशी तमिल समागम के नोडल अधिकारी बनाए गए स्टेट आर्कियोलॉजी विभाग के अधिकारी सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि हर 2 दिन पर दो सौ से ढाई सौ के लोगों का एक ग्रुप वाराणसी आएगा।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम, काल भैरव, केदारनाथ मंदिर के साथ सारनाथ का भ्रमण करेंगे। ये ग्रुप क्रूज से गंगा आरती की विहंगम छटा भी देखेंगे। काशी में विकास कार्यों को देखने के बाद ये ग्रुप प्रयागराज और अयोध्या के लिए रवाना होगा। पूरे महीने में तकरीबन ढाई हजार से 3 हजार तमिल भाषी लोग काशी आएंगे। इस ग्रुप में अलग-अलग क्षेत्र के लोग शामिल होंगे जिसमें छात्र, उद्यमी ,सामाजिक कार्यकर्ता , महिलाएं भी शामिल हैं।

काशी से तमिलनाडु के विशेष जुड़ाव पर परिचर्चा के साथ दोनों स्‍थानों की समानता और महत्ता को भी दर्शाया जाएगा। इस आयोजन को लेकर काशीवासियों के साथ ही यहां कई पीढ़ियों से बसे 2 से ज्‍यादा तमिल परिवारों में गजब का उत्‍साह है। मेहमानों को काशी में बसे लघु तमिलनाडु को भी देखने का मौका मिलेगा। हर दिन शाम को सांस्‍कृतिक संध्‍या में तमिलनाडु से आने वाले कलाकारों के साथ ही देश की विभिन्‍न जगहों से आए कलाकार अपनी प्रस्‍तुति देंगे।

ऐसा है काशी से कन्याकुमारी का रिश्ता
काशी-तमिल समागम में आने वाले मेहमान काशी के हनुमान घाट इलाके में बसे लघु तमिलनाडु को देखेंगे, जहां पीढ़ियों से यहां आकर बसे तमिल परिवार रह रहे हैं। देखा जाए तो काशी का कन्‍याकुमारी से याराना दो हजार साल से भी ज्‍यादा पुराना है। काशी में करीब दो सौ तमिल परिवार रहते हैं, जिनके दादा-परदादा आए और यहीं बस गए। इनमें तमिल के राष्‍ट्रकवि सुब्रह्मण्‍यम भारती के नाती 97 वर्षीय प्रो. के. वी. कृष्‍णन भी हैं। राष्‍ट्रकवि ने 1898 में वाराणसी आकर चार साल पढ़ाई की थी। सुब्रह्मण्‍यम भारती की बुआ भी बनारस में रहती हैं।

तमिलनाडु के नाट्कोट्टई क्षत्रम की ओर से काशी विश्‍वनाथ मंदिर में 210 वर्षों से निर्बाध 3 आरती की जाती हैं। आरती के लिए भस्‍मी और चंदन तमिलनाडु से ही मंगाया जाता है। देश की आजादी से पहले 1926 में बनारस में दक्षिण भारतीय व्‍यंजन परोसने की शुरुआत अय्यर परिवार ने की थी। 1950 के बाद कुछ चुनिंदा सिनेमा हॉल में सुबह का एक शो दक्षिण भारतीयों के लिए चला करता था।

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