स्वास्थ्य प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी व सुविधायुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह डिजिटाइज करने जा रही है। माउस के एक क्लिक से किसी भी रोगी का न केवल पूरा डाटा मिल जाएगा बल्कि किस स्वास्थ्य केंद्र में कौन–कौन सी दवाएं हैं और किन–किन रोगियों को कौन–कौन दवाएं दी गई हैं‚ इसकी भी जानकारी मिल जायेगी। डिजिटाइजेशन पर तेजी से काम चल रहा है।
इसी क्रम में गुरुवार को स्टेट हेल्थ सोसाइटी‚ बिहार के साथ रोडिक कंसल्टेंट्स ने अपने डेवलपमेंट पार्टनर प्लस ९१ टीम के साथ मिलकर पहला ज्वाइंट एप्लीकेशन डिप्लायमेंट (जेएडी) सेशन सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि आने वाले दिनों में बिहार की नकल दूसरे राज्य करेंगे। डिजिटाइजेशन से स्वास्थ्य विभाग के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य उपकेंद्र से लेकर मेडिकल कालेजों की पूरी जानकारी एक क्लिक में मिल जाएगी। इस परियोजना का उद्ेश्य राज्य के ३८ जिलों में ११ करोड की आबादी की सेवा करना है। इसमें १२‚९३२ विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। प्रत्यय अमृत ने कहा कि इस जेएडी सत्र का उद्ेश्य बिहार राज्य के लिए डिजिटल रूप से एकीकृत रियल टाइम हेल्थ इन्फामæशन मैनेजमेंट सलूशन को शुरू करने के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों‚ व्यावसायिक प्रक्रियाओं और आवश्यकताओं को समझना था। जेएडी सत्र एकीकृत एचआईएमएस के विकास के साथ–साथ कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण गतिविधि है और परियोजना के व्यापक और समग्र उद्ेश्य को प्राप्त करने के लिए सभी हितधारकों को एक ही मंच पर लाने पर जोर देगा। इस डिजिटाइजेशन से पूरे राज्य के हेल्थ सिस्टम में पारदर्शिता आएगी एवं रियल टाइम सूचना प्राप्त करना आसान होगा एवं राज्य सरकार की स्वास्थ्य संबंधी योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर चलने से ही हम इस मिशन को पूरा कर सकते हैं। इस मौके पर कार्यकारी निदेशक‚ राज्य स्वास्थ्य सोसायटी संजय कुमार सिंह‚ रोडिक कंसल्टेंट्स के सीएमडी राजकुमार ने भी डिजिटाइजेशन के महत्व की विस्तृत जानकारी दी। एक रोगी के लिए यह कितना फायदेमंद होगा‚ इसकी जानकारी दी गई।







